60 लाख का खून: बीमा क्लेम मर्डर में अनिल को उम्रकैद! अदालत ने कहा, प्लान्ड मर्डर पर कोई रहम नहीं!!
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विशेष संवाददाता
अलवर। राजस्थान के अलवर जिले में बीमा धनराशि हड़पने की सनसनीखेज साजिश के मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य आरोपी अनिल खत्री को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने टिप्पणी की कि केवल 60 लाख रुपये की बीमा राशि पाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से दोस्त की हत्या करना किसी भी तरह की रहमदिली का पात्र नहीं है।
बीमा क्लेम के लोभ में रची गई भयावह साजिश
सरकारी वकील नवनीत तिवारी के अनुसार, अलापुर निवासी अनिल के भाई सुनील खत्री का काफी समय से कोई पता नहीं था। इसी का फायदा उठाते हुए अनिल ने सुनील की एलआईसी पॉलिसी के 60 लाख रुपये प्राप्त करने की योजना बनाई। इसके लिए उसने अपने साथियों पवन और याकूब के साथ मिलकर ऐसा शख्स तलाशना शुरू किया जिसकी कद-काठी सुनील से मिलती-जुलती हो।
इस खोज में उनकी नजर सालपुर निवासी 24 वर्षीय रामकेश पर पड़ी, जो अलवर के महावीर ढाबे पर काम करता था। मासूम और सरल स्वभाव वाले रामकेश को इन लोगों ने अपने जाल में फँसाने के लिए पहले दोस्ती का सहारा लिया।
नए कपड़े, शराब और फिर मौत

30 सितंबर की रात आरोपी रामकेश को नए कपड़े और जूते दिलाकर बोलेरो में बैठाकर घुमाने निकले। रास्ते में उसे शराब पिलाई गई और योजनाबद्ध तरीके से उसकी हत्या कर दी गई। हत्या के बाद आरोपी रामकेश की जेब में सुनील खत्री का वोटर आईडी कार्ड डालकर उसे सुनील दिखाना चाहते थे, ताकि बीमा कंपनी को भ्रमित कर 60 लाख की पॉलिसी का क्लेम लिया जा सके।
प्रारंभिक जांच में पुलिस भी भ्रमित हो गई और शव को सुनील समझते हुए पंचनामा की कार्रवाई शुरू कर दी थी। लेकिन कुछ ही समय बाद पुलिस को कई तथ्यों पर संदेह हुआ।
पुलिस की सूझबूझ से खुली पूरी साजिश

संदेह होने पर पुलिस ने अनिल और पवन को हिरासत में लिया। पूछताछ के दौरान दबाव में अनिल ने पूरी साजिश स्वीकार कर ली। उसने बताया कि बीमा की राशि मिलने पर उसे अपने साथियों में बांटने का भी प्लान था। घटना के तार जोड़ते हुए पुलिस ने पूरा मामला उजागर किया और सभी आरोपियों पर हत्या का मामला दर्ज किया।
पहले ही दो आरोपी दोषी करार
दो दिन पहले ही इस केस में पवन और याकूब को अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। शुक्रवार को जब सुनवाई हो रही थी, तब मुख्य आरोपी अनिल स्वयं अदालत में उपस्थित हुआ।
अदालत की कड़ी टिप्पणी
सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अनिल खत्री को आजीवन कारावास एवं 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा-
“जब बीमा की बड़ी राशि प्राप्त करने की नीयत से किसी की योजना बनाकर हत्या की गई हो, तो आरोपी किसी भी प्रकार की नर्मी का पात्र नहीं है।”
हत्या और धोखाधड़ी दोनों का संगीन मामला
यह मामला केवल हत्या का नहीं बल्कि गंभीर आर्थिक धोखाधड़ी, बीमा फ्रॉड और साजिश का संगठित अपराध भी माना जा रहा है। पुलिस की सतर्कता और गहन जांच के चलते यह अपराध उजागर हो सका, अन्यथा एक निर्दोष युवक की हत्या हमेशा के लिए गलत पहचान के साथ दफन हो जाती।
