KW सृष्टि: जीडीए के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद केवल मेंटेनेंस हैंडओवर की तैयारी!
बिल्डर की रणनीति सफल ?
कई अहम बिंदु रहेंगे लंबित!
NEWS1UP
संवाददाता
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन स्थित केडब्ल्यू सृष्टि सोसाइटी के हैंडओवर प्रकरण में ताज़ा जानकारी के अनुसार GBM में मेंटेनेंस हैंडओवर पर सहमति बन गयी है। 1 दिसंबर को हैंडओवर केवल मेंटीनेंस तक सीमित रहेगा, जबकि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा था कि हैंडओवर में दैनिक रख-रखाव के साथ–साथ आईएफएमएस/कॉर्पस फंड, सभी आवश्यक अभिलेख, सीसी-ओसी, स्वीकृत मानचित्र, आर्किटेक्चरल व स्ट्रक्चरल ड्राइंग, एसटीपी/डब्ल्यूटीपी की एनओसी, पेंट, बेसमेंट लीकेज समाधान, 15% ग्रीन बेल्ट, पार्किंग चिन्हांकन और भूजल अधिनियम-2019 के अनुसार रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम आदि का हस्तांतरण भी अनिवार्य हैं।
रेजिडेंट्स में असंतोष!
जीडीए के आदेश के बावजूद आधा-अधूरा हैंडओवर लिए जाने की कवायद निवासियों में चर्चा और असंतोष का विषय बन गई है। सबसे बड़ा विवाद आईएफएमएस की राशि को लेकर है, करीब 3 करोड़ 65 लाख रुपये अब भी बिल्डर के पास हैं, जिसे हैंडओवर में शामिल नहीं किया जा रहा।

एओए सचिव प्रशांत कुमार पांडे का कहना है कि-
मेंटेनेंस एजेंसी से सोसाइटी चलाने पर निवासियों पर लाखों रुपये महीना अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है, इसलिए जीबीएम में मेंटेनेंस हैंडओवर पर सहमति बनी। वे कहते हैं “आईएफएमएस के लिए हमारी लड़ाई जारी रहेगी।”
बोर्ड ने भरोसा क्यों किया ?
निवासी नीतू सिंह इस फैसले से असहमति जताती हैं। उनका कहना है-

एओए ने एमओयू का मसौदा साझा नहीं किया और न ही GBM का कोरम पूरा किया गया। 5 वर्ष पहले भी बिल्डर सिर्फ मेंटेनेंस हैंडओवर को तैयार था, तब भी अपूर्ण मानते हुए हैंडओवर नहीं लिया गया था। “कोई भी बिल्डर जाने के बाद जिम्मेदारी नहीं निभाता, फिर भरोसा क्यों ?”
बोर्ड सदस्य भी असंतुष्ट!

बोर्ड सदस्य प्रवीन प्रधान कहते हैं कि-
निर्णय बिना सभी सदस्यों को विश्वास में लिए हुआ, जीडीए द्वारा जारी चेकलिस्ट के बाद भी अधूरा हैंडओवर क्यों ? “एओए जीडीए और जिलाधिकारी से हस्तक्षेप की मांग क्यों नहीं कर रहा ?”
बिल्डर पक्ष पर चुप्पी
बिल्डर प्रतिनिधियों से संपर्क की कोशिश की गई, लेकिन कॉल्स रिसीव नहीं किए गए।
आगे की चिंता: बिजली, सुरक्षा, संरचना, खर्च
सोसाइटी में डीजी भी किराए पर है तथा विद्युत विभाग का ऑडिट पेंडिंग है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि ऑडिट की जिम्मेदारी कौन लेगा ? विद्युत भार में असमानता निकली तो जवाबदेह कौन ? पेंट, बेसमेंट लीकेज, पार्किंग, ग्रीनबेल्ट का खर्च निवासी कैसे वहन करेंगे ?
केडब्ल्यू सृष्टि सोसाइटी में प्रस्तावित हैंडओवर केवल प्रशासनिक विवाद नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में अपार्टमेंट गवर्नेंस, बिल्डर उत्तरदायित्व, और नियामकीय पालन प्रणाली पर एक गहरी बहस का केंद्र बन गया है। आगामी 1 दिसंबर को जिस रूप में हस्तांतरण की तैयारी हो रही है, वह सोसाइटी गवर्नेंस नीति ढांचे के अनुरूप नहीं माना जा रहा।
जीडीए के आदेश में हैंडओवर के जो बिंदु अनिवार्य किए गए हैं, वे सीधे-सीधे उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट अधिनियम, जीडीए बिल्डिंग बाई-लॉज, भूजल अधिनियम–2019 और सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर कम्प्लायंस मानदंड से जुड़े हैं। ऐसे में अधूरा हैंडओवर केवल प्रथागत विचलन नहीं, बल्कि नियामकीय अपालन (Non-compliance) का संकेत है।
