February 12, 2026

प्रधानमंत्री आवासीय योजना: GDA ने किया काम, निजी डेवलपर्स लक्ष्य पूरा करने में बुरी तरह नाकाम!

0
0
0

समयसीमा, छूट और दावे

निजी डेवलपर्स फिर भी फेल

NEWS1UP

संवाददाता

गाजियाबाद।  प्रधानमंत्री आवास योजना–शहरी (PMAY-Urban) के तहत लगभग आठ वर्षों की देरी के बाद गाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) ने आखिरकार लाभार्थियों को फ्लैटों का कब्जा देना शुरू कर दिया है। यह कदम उन हज़ारों उम्मीदों को जीवन देता है जो वर्षों से अपने घर का सपना साकार होने का इंतज़ार कर रहे थे।

मधुबन बापूधाम में 300 से अधिक रजिस्ट्री पूरी

मधुबन बापूधाम आवासीय सेक्टर में तैयार 856 यूनिटों में से 300 से अधिक की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है। लॉटरी प्रणाली से चयनित लाभार्थियों को अब कब्जा भी दिया जा रहा है।

अन्य सेक्टरों, प्रताप विहार (1,200), नूर नगर (480) और निवाड़ी (528) यूनिट, में भी निर्माण पूरा हो चुका है। निवाड़ी में 3 करोड़ की लागत से अप्रोच रोड और 400 KLD की एसटीपी भी विकसित की गई है।

फंड और विभागीय सहयोग की कमी ने वर्षों तक रोके रखा काम

साल 2015 में शुरू हुई PMAY योजना को गाज़ियाबाद में 2017 के आसपास गति मिली, लेकिन निर्माण में बाधाएँ लगातार बनी रहीं। PWD, जल निगम और बिजली विभाग जैसी एजेंसियों के बीच तालमेल की कमी के कारण सड़क, बिजली, पानी और सीवर कनेक्शन समय पर उपलब्ध नहीं हो सके।

योजना के तहत प्रति यूनिट लागत 6 लाख रुपये निर्धारित है; 

• केंद्र सरकार: 2.5 लाख
• राज्य सरकार: 1 लाख
• लाभार्थी: 2.5 लाख
इसका लाभ उन्हीं परिवारों को मिलता है जिनकी वार्षिक आय 4 लाख रुपये से कम है।

निजी डेवलपर्स पर सवाल: छूट मिली, समयसीमा मिली… फिर भी नहीं दिए एक भी यूनिट का कब्जा

यहीं तस्वीर बदल जाती है। जहां GDA ने देरी के बावजूद कब्जा देना शुरू कर दिया है, वहीं निजी डेवलपर्स को दी गई तमाम छूटों के बावजूद उनकी प्रगति बेहद निराशाजनक है। गाज़ियाबाद में 11 डेवलपर्स को 6,481 PMAY यूनिट्स बनाने थे, लेकिन आधे से भी कम निर्माण कार्य पूरा हुआ है और आज तक एक भी फ्लैट का कब्जा नहीं दिया गया

इस विफलता के बावजूद:

• डेवलपर्स को विकास शुल्क में 50% की छूट मिली
• भूमि उपयोग शुल्क से राहत मिली
• लेकिन उन्होंने 24 माह की निर्माण समयसीमा का पालन नहीं किया
और अब किसी भी छूट के पात्र नहीं रहे।

लाइसेंस रद्द होने के बावजूद सुधार नहीं

राज नगर एक्सटेंशन स्थित सिग्नेचर बिल्डिंग प्रोजेक्ट का लाइसेंस GDA पहले ही रद्द कर चुका है, क्योंकि डेवलपर को 400 से अधिक PMAY यूनिट्स बनाने थे लेकिन प्रगति नगण्य रही। इसके बावजूद बाकी डीवलपर्स के खिलाफ कार्रवाई का स्तर बेहद कमजोर है।

प्राधिकरण की ‘नोटिस संस्कृति’: खानापूर्ति से आगे बढ़ने की ज़रूरत

यही बड़ा मुद्दा है।, GDA भले ही देरी से सही, लेकिन कब्जा देना शुरू कर चुका है। इसके विपरीत निजी डेवलपर्स लक्ष्य पूरा करने में बुरी तरह नाकाम हैं। डेवलपर्स को दिए गए नोटिस केवल औपचारिकता निभाने के समान हैं। ना कड़ी कार्रवाई, ना जुर्माना, ना परियोजना की ज़िम्मेदारी तय,  नतीजा यह कि PMAY जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक आवास मिशन का सबसे कमजोर कड़ी निजी डेवलपर साबित हो रहे हैं।

अब समय है जवाबदेही तय करने का

विशेषज्ञ मानते हैं कि-

  • ऐसे डेवलपर्स के लाइसेंस रद्द किए जाएं

  • परियोजनाओं की मॉनिटरिंग बढ़ाई जाए

  • लाभार्थियों के हितों की रक्षा के लिए ठोस दंडात्मक प्रावधान लागू हों

  • और सबसे महत्वपूर्ण, प्राधिकरण निजी डेवलपर्स को ‘नोटिस देकर छोड़ने’ की नीति से बाहर आए।

PMAY का लक्ष्य गरीब और कमजोर वर्गों को सस्ती आवास सुविधा उपलब्ध कराना है। GDA ने देरी के बावजूद गति पकड़ी है, लेकिन निजी बिल्डर्स की लापरवाही और प्राधिकरण की नरमी इस मिशन में सबसे बड़ी बाधा बनकर खड़ी है।

आवास योजना की सफलता सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी है कि निजी डेवलपर्स की कड़ी जवाबदेही तय की जाए और सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि लाभार्थियों का भरोसा टूटा न रहे और योजनाएँ समय पर पूरी हों।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!