वीवीआईपी एड्रेसेस सोसाइटी के वर्ष 2018 से अब तक के खातों की विशेष जाँच के आदेश!
सोसाइटी के सैकड़ों निवासियों के लिए यह जाँच न केवल जवाबदेही तय करने का माध्यम है,
बल्कि भविष्य में पारदर्शी और नियमसम्मत संचालन की उम्मीद भी जगाती है।
NEWS1UP
विशेष संवाददाता
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन स्थित वीवीआईपी एड्रेसेस सोसाइटी की अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (एओए) विवादों के घेरे में आ गई है। सोसाइटी के प्रशासनिक और वित्तीय कार्यों में अनियमितताओं की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए डिप्टी रजिस्ट्रार, फर्म्स, सोसाइटीज एवं चिट्स ने औपचारिक जाँच के आदेश जारी कर दिए हैं। आदेश के अनुसार वर्ष 2018 से लेकर वर्तमान तक की सभी वित्तीय गतिविधियों, चल-अचल संपत्तियों और सोसाइटी के सभी बैंक खातों की गहन जाँच कराई जाएगी।
जाँच का दायित्व एक प्राइवेट ऑडिट एजेंसी को सौंपा गया है, जिसे चार सप्ताह के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय में प्रस्तुत करनी होगी। इस ऑडिट का पूरा खर्च संबंधित एओए द्वारा वहन किया जाएगा।

पूर्व अध्यक्ष की शिकायत बनी जाँच की वजह
इस कार्रवाई की पृष्ठभूमि में एओए के पूर्व अध्यक्ष यज्ञदत्त त्यागी द्वारा की गई लिखित शिकायत है। त्यागी ने आरोप लगाया है कि सोसाइटी में उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट एक्ट और मॉडल बायलॉज़ के प्रावधानों का लगातार उल्लंघन किया जा रहा है। शिकायत के अनुसार एओए द्वारा मनमाने ढंग से फैसले लेकर भारी खर्च किए जाते हैं, जिनमें न तो पूरे बोर्ड की सहमति ली जाती है और न ही जनरल बॉडी मीटिंग (GBM) से आवश्यक अनुमोदन प्राप्त किया जाता है। इतना ही नहीं, GBM आयोजित करने और उसके लिए निर्धारित मानकों का भी पालन नहीं किया जा रहा।
पूर्व अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान हुए सभी कार्यों के ऑडिट की भी मांग की है। उनका कहना है कि सोसाइटी का संचालन निवासियों द्वारा दिए जाने वाले मेंटिनेंस फंड से होता है, इसलिए पारदर्शिता हर अपार्टमेंट ओनर का मौलिक अधिकार है।
कानून के तहत हुई कार्रवाई
डिप्टी रजिस्ट्रार वैभव कुमार ने बताया कि सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 की धारा-22 के तहत प्राप्त सूचनाओं, धारा-23(3) के अंतर्गत ऑडिट निष्कर्षों अथवा किसी अन्य विश्वसनीय माध्यम से सूचना मिलने पर यदि यह स्पष्ट होता है कि कोई एओए अपने पंजीकृत उद्देश्यों के अनुरूप कार्य नहीं कर रही है या एक्ट व मॉडल बायलॉज़ का उल्लंघन कर रही है, तो रजिस्ट्रार को स्वयं या अपने द्वारा नामित अधिकारी के माध्यम से जाँच कराने का पूर्ण अधिकार है।
उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वर्तमान एओए जाँच प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग करे और मांगी गई सभी सूचनाएं व दस्तावेज समय पर उपलब्ध कराए।
फर्जी पदाधिकारियों पर भी प्रशासन सख़्त
गौरतलब है कि गाजियाबाद सहित एनसीआर की कई हाउसिंग सोसाइटीज में वित्तीय गड़बड़ियों और एओए द्वारा मनमाने निर्णय थोपे जाने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। कई मामलों में यह भी पाया गया है कि एओए के महत्वपूर्ण पदों पर ऐसे लोग काबिज हैं जो वास्तविक अपार्टमेंट ओनर तक नहीं हैं, इसके बावजूद वे संवेदनशील प्रशासनिक और वित्तीय निर्णय लेते हैं। डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय इस तरह की अनियमितताओं को बेहद गंभीरता से ले रहा है।
