मैं टूट गया… काम के दबाव में ‘दिव्यांग’ कोर्ट कर्मचारी का सुसाइड!

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साकेत कोर्ट परिसर में आत्महत्या से हड़कंप!

NEWS1UP

संवाददाता

नई दिल्ली। साकेत कोर्ट परिसर से एक दुखद घटना सामने आई है। अदालत की इमारत से कूदकर एक कर्मचारी ने आत्महत्या कर ली। मृतक साकेत कोर्ट में कार्यरत था और 60 प्रतिशत दिव्यांग बताया जा रहा है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। मौके से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसमें उसने अपने कदम के पीछे काम के दबाव और मानसिक परेशानी का जिक्र किया है।

काम का दबाव और मानसिक संघर्ष

पुलिस के अनुसार, सुसाइड नोट में मृतक ने लिखा कि कार्यालयीन जिम्मेदारियों के दबाव के कारण वह यह कदम उठा रहा है और इसके लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। उसने उल्लेख किया कि अहल्मद (अदालती कर्मचारी) बनने के बाद से उसे लगातार तनाव, अनिद्रा और अत्यधिक सोचने की समस्या हो रही थी। नोट में यह भी कहा गया कि उसने अपने विचार किसी से साझा नहीं किए और हालात से उबरने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सका।

दिव्यांगता और नौकरी की चुनौतियां

मृतक ने अपने नोट में लिखा कि वह 60 प्रतिशत दिव्यांग है और मौजूदा नौकरी उसके लिए अत्यधिक कठिन साबित हो रही थी। उसने यह भी बताया कि जल्दी सेवानिवृत्ति लेने की स्थिति में भी पेंशन या बचत 60 वर्ष की आयु में ही मिलती, जिससे उसे कोई तात्कालिक राहत नहीं दिख रही थी। इसी असहायता के भाव ने उसे इस निर्णय तक पहुंचाया, ऐसा उसने नोट में उल्लेख किया है।

संस्थागत संवेदनशीलता की अपील

सुसाइड नोट में मृतक ने उच्च न्यायालय से अपील करते हुए कहा कि दिव्यांग कर्मचारियों के प्रति अधिक संवेदनशील और नरम रुख अपनाया जाए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति उसके जैसे कष्ट न सहे। उसने दोहराया कि उसकी आत्महत्या के लिए कोई व्यक्ति या संस्था जिम्मेदार नहीं है।

पुलिस जांच जारी, आधिकारिक बयान का इंतजार

दिल्ली पुलिस ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और सभी पहलुओं को देखा जा रहा है। फिलहाल साकेत कोर्ट प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। पुलिस सुसाइड नोट की सत्यता और घटनाक्रम की परिस्थितियों की पुष्टि कर रही है।

यदि आप या आपके आसपास कोई मानसिक तनाव से जूझ रहा है, तो सहायता उपलब्ध है। भारत में 24×7 मानसिक स्वास्थ्य हेल्पलाइन किरण (1800-599-0019) पर संपर्क किया जा सकता है। मदद मांगना कमजोरी नहीं, साहस है।

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