February 9, 2026

भारत मंडपम में कल से सजेगा ज्ञान का महाकुंभ, 53वाँ विश्व पुस्तक मेला 18 जनवरी तक

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35 से अधिक देशों के प्रकाशक होंगे शामिल

आम जनता के लिए प्रवेश निःशुल्क, पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

नई दिल्ली। देश की राजधानी का भारत मंडपम कल, 10 जनवरी से साहित्य, विचार और संस्कृति के वैश्विक उत्सव का साक्षी बनने जा रहा है। 53वाँ विश्व पुस्तक मेला नौ दिनों तक यानी 18 जनवरी तक आयोजित किया जाएगा। यह बहुप्रतीक्षित आयोजन न केवल भारत बल्कि दुनिया भर के प्रकाशकों, लेखकों, विचारकों और पाठकों को एक साझा मंच पर लाने का सबसे बड़ा अवसर माना जाता है।

इस वर्ष के विश्व पुस्तक मेले में 35 से अधिक देशों के प्रकाशक हिस्सा ले रहे हैं, जिससे यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक संवाद का एक सशक्त केंद्र बनकर उभरेगा।

प्रवेश निःशुल्क, पुस्तक संस्कृति को जन-जन तक पहुँचाने की पहल

नेशनल बुक ट्रस्ट ऑफ इंडिया (NBT) के निदेशक युवराज मलिक ने बताया कि इस बार मेले में आगंतुकों के लिए प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क रखा गया है। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को पुस्तक संस्कृति से जोड़ना और पढ़ने की आदत को समाज के हर वर्ग तक पहुँचाना है।

मलिक के अनुसार, “विश्व पुस्तक मेला केवल पुस्तकों की बिक्री का मंच नहीं है, बल्कि यह विचारों के आदान-प्रदान और बौद्धिक संवाद का उत्सव है।”

कतर अतिथि देश, स्पेन फोकस देश

53वें संस्करण की एक विशेष उपलब्धि यह है कि कतर को अतिथि देश और स्पेन को फोकस देश के रूप में आमंत्रित किया गया है। दोनों देशों की समृद्ध साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को विशेष कार्यक्रमों, पुस्तकों, लेखक संवादों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से दर्शकों के सामने रखा जाएगा। यह पहल भारत और इन देशों के बीच सांस्कृतिक सेतु को और मजबूत करेगी।

भारतीय सैन्य इतिहास को समर्पित विशेष थीम

इस वर्ष का विश्व पुस्तक मेला एक बेहद महत्वपूर्ण और भावनात्मक विषय को समर्पित किया गया है  “भारतीय सैन्य इतिहास: शौर्य और बुद्धिमत्ता @75”

इस विषय के अंतर्गत स्वतंत्रता के बाद राष्ट्र निर्माण में भारतीय सशस्त्र बलों, थलसेना, नौसेना और वायुसेना के योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी जाएगी। इसके लिए करीब एक हज़ार वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला एक विशेष रूप से तैयार किया गया भव्य पवेलियन स्थापित किया गया है।

इस पवेलियन में सेना, नौसेना और वायुसेना से संबंधित 500 से अधिक पुस्तकों की प्रदर्शनी, दृश्य प्रस्तुतियाँ, लाइव कार्यक्रम और संवाद सत्र आयोजित किए जाएंगे, जो आगंतुकों को भारतीय सैन्य इतिहास की गौरवशाली गाथाओं से रूबरू कराएंगे।

बच्चों के लिए विशेष पवेलियन

पुस्तक मेले में बच्चों के लिए एक अलग और आकर्षक पवेलियन भी स्थापित किया गया है। यहाँ बाल साहित्य, रचनात्मक गतिविधियाँ, कहानी सत्र और शैक्षिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसका उद्देश्य बच्चों में पढ़ने की आदत को बढ़ावा देना और उन्हें किताबों की दुनिया से जोड़ना है।

साहित्य से आगे, संस्कृति का वैश्विक मंच

आयोजकों के अनुसार, 53वाँ विश्व पुस्तक मेला सिर्फ़ साहित्य प्रेमियों के लिए उत्सव नहीं है, बल्कि यह सभी में पढ़ने की संस्कृति को प्रोत्साहित करेगा। भारतीय सांस्कृतिक विविधता को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करेगा। विचार, संवाद और ज्ञान के नए द्वार खोलेगा।

नौ दिनों तक चलने वाला यह आयोजन निस्संदेह नई दिल्ली को एक बार फिर ज्ञान और साहित्य की राजधानी में बदल देगा, जहाँ किताबें केवल पढ़ी नहीं जाएँगी, बल्कि विचारों का उत्सव मनाया जाएगा।

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