दहेज सहित 30 मामलों में सीधे FIR पर रोक: यूपी पुलिस का बड़ा फैसला !
DGP राजीव कृष्ण का सख्त निर्देश
जहां कानून में परिवाद का प्रावधान, वहां FIR दर्ज करना अवैध
इलाहाबाद हाईकोर्ट की आपत्ति के बाद बड़ा एक्शन
NEWS1UP
विशेष संवाददाता
लखनऊ। दहेज कानूनों के कथित दुरुपयोग और बिना पर्याप्त कानूनी आधार के दर्ज हो रही एफआईआर पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने संवेदनशीलता दिखानी शुरू कर दी है। इसी कड़ी में डीजीपी राजीव कृष्ण ने सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश जारी कर स्पष्ट किया है कि जिन मामलों में केवल परिवाद (शिकायत) का ही प्रावधान है, उनमें एफआईआर दर्ज करना पूरी तरह गलत माना जाएगा।
यह निर्देश इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ द्वारा इस विषय पर जताई गई आपत्ति के बाद जारी किया गया है। अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे गंभीर त्रुटि बताया था।
डीजीपी के आदेश में कहा गया है कि कई बार पुलिस नियमों के विपरीत जाकर सीधे एफआईआर दर्ज कर लेती है, जबकि संबंधित मामलों में केवल अदालत में परिवाद दाखिल करने की व्यवस्था होती है। इससे न केवल आरोपित को न्यायालय में लाभ मिल जाता है, बल्कि पूरी जांच प्रक्रिया भी प्रभावित होती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि मानहानि, निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट (चेक बाउंस), कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, माइंस एंड मिनरल एक्ट, पशु क्रूरता एवं दहेज सहित 30 प्रावधानों में सीधे एफआईआर दर्ज नहीं की जानी चाहिए। ऐसे मामलों में परिवाद के माध्यम से ही न्यायिक प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।
डीजीपी ने सभी थाना प्रभारियों और विवेचकों को निर्देशित किया है कि वे किसी भी मामले में एफआईआर दर्ज करने से पहले संबंधित कानून का गहन अध्ययन करें और यह सुनिश्चित करें कि उस मामले में एफआईआर का प्रावधान है या नहीं। साथ ही, उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि कोई अधिकारी इन निर्देशों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
