अब बिल्डर्स की मनमानी खत्म! UP-RERA का बड़ा फैसला, जानें क्या…

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अनरजिस्टर्ड प्रोजेक्ट्स भी आए दायरे में

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

लखनऊ। रियल एस्टेट सेक्टर में लंबे समय से जारी अव्यवस्था और होमबायर्स की शिकायतों के बीच उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (UP-RERA) ने बड़ा हस्तक्षेप किया है। प्राधिकरण ने अपने जनरल रेगुलेशंस, 2019 में 10वां संशोधन लागू करते हुए ऐसे प्रावधान जोड़े हैं, जो सीधे तौर पर उपभोक्ताओं को राहत देने वाले माने जा रहे हैं। यह संशोधन 25 मार्च 2026 से प्रभावी हो चुका है।

सबसे अहम बदलाव यह है कि अब अनरजिस्टर्ड प्रोजेक्ट्स में फंसे खरीदार भी UP-RERA के पास अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे। अब तक ऐसे मामलों में खरीदारों के पास सीमित विकल्प थे, लेकिन नए नियम के तहत प्राधिकरण पहले यह तय करेगा कि संबंधित प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य था या नहीं।

यदि जांच में यह पाया जाता है कि रजिस्ट्रेशन जरूरी था, तो मामले को कार्रवाई के लिए आगे बढ़ाया जाएगा और प्रमोटर के खिलाफ कदम उठाए जाएंगे। इसके बाद शिकायत की सुनवाई कर खरीदार को राहत देने का निर्णय लिया जाएगा।

इसी के साथ प्राधिकरण ने प्रॉपर्टी ट्रांसफर के नाम पर वसूले जाने वाले मनमाने शुल्कों पर भी सख्ती दिखाई है। संशोधित नियमों के तहत अब परिवार के भीतर उत्तराधिकार (मृत्यु के बाद) के मामलों में अधिकतम प्रोसेसिंग फीस 1,000 रुपए तय की गई है। वहीं, गैर-परिवार के व्यक्ति को प्रॉपर्टी ट्रांसफर करने पर यह सीमा 25,000 रुपए तक तय की गई है।

नए प्रावधानों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ट्रांसफर के लिए नया एग्रीमेंट कराने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि मौजूदा एग्रीमेंट में ही बदलाव दर्ज कर रिकॉर्ड अपडेट किया जाएगा। इससे प्रक्रिया सरल होने के साथ-साथ समय और खर्च दोनों की बचत होगी।

सूत्रों के मुताबिक, अनरजिस्टर्ड प्रोजेक्ट्स से जुड़ी शिकायतों के लिए UP-RERA अपने पोर्टल पर एक अलग व्यवस्था विकसित करने की तैयारी में है, जहां शिकायतकर्ता से अतिरिक्त जानकारी ली जाएगी, ताकि प्रोजेक्ट और प्रमोटर का सही आकलन किया जा सके।

इस संबंध में UP-RERA के चेयरमैन संजय भूसरेड्डी का कहना है कि-

नए नियम शिकायत निवारण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, प्रभावी और उपभोक्ता-हितैषी बनाएंगे। 

रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि यह संशोधन न केवल बिल्डर्स की जवाबदेही तय करेगा, बल्कि उन हजारों खरीदारों को भी राहत देगा, जो अब तक अनरजिस्टर्ड प्रोजेक्ट्स में फंसकर न्याय की उम्मीद लगाए बैठे थे।

कुल मिलाकर, UP-RERA का यह कदम रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता बढ़ाने और उपभोक्ताओं का भरोसा मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

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