November 2, 2026
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जब लोकतंत्र ने पुकारा, निवासी आगे आए, 97 हजार जुटाकर चुनाव की राह बनाई

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1.40 लाख की मांग के बीच निवासियों ने खुद जुटाए 97 हजार

सोमवार से शुरू होगी एओए चुनाव प्रक्रिया

NEWS1UP

एओए/आरडब्ल्यूए डेस्क

गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन की एसजी ग्रैंड सोसाइटी में एओए चुनाव को लेकर लंबे समय से चला आ रहा गतिरोध अब टूट गया है। चुनाव कराने के लिए निवासियों ने खुद 97 हजार रुपये जुटाकर नामित निर्वाचन अधिकारी को सौंप दिए। इसके साथ ही सोमवार से सोसाइटी में चुनावी प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है।

कालातीत एओए ने 1.40 लाख पर जताई थी आपत्ति

7 सितंबर को डिप्टी रजिस्ट्रार द्वारा नामित निर्वाचन अधिकारी प्रशांत सिंह, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी, ने एओए चुनाव के लिए कालातीत अध्यक्ष/सचिव को तीन दिन में 1.40 लाख रुपये जमा कराने के निर्देश दिए थे। अधिकारी ने इसे अनुमानित राशि बताते हुए स्पष्ट किया था कि वास्तविक खर्च जरूरत के मुताबिक ही किया जाएगा और बची हुई रकम वापस कर दी जाएगी। राशि को लेकर कालातीत एओए ने आपत्ति जताई और डिप्टी रजिस्ट्रार तथा जिलाधिकारी से मुलाकात कर रकम कम होने के बाद ही चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही थी।

इस बीच कालातीत एओए अध्यक्ष अरुण मलिक ने 97 हजार रुपये जमा किए जाने की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि उन्हें न तो राशि एकत्र किए जाने की जानकारी दी गई और न ही चुनाव अधिकारी ने इस संबंध में कोई सूचना दी। उन्होंने कहा कि यदि इतनी ही राशि जमा करानी थी तो एओए को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी जानी चाहिए थी। मलिक ने पूरी प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज कराई है।

प्रतीकात्मक इमेज

निवासियों ने उठाया लोकतंत्र का खर्च

गतिरोध के बीच सोसाइटी के निवासियों ने स्वयं आगे आकर 97 हजार रुपये एकत्र किए और चुनाव अधिकारी को सौंप दिए। निवासियों की इस पहल को सोसाइटी में लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

एक-एक रुपये का होगा हिसाब

नामित निर्वाचन अधिकारी प्रशांत सिंह ने कहा कि निवासियों द्वारा जमा की गई राशि सिर्फ आवश्यक मदों में ही खर्च होगी। चुनाव को न्यूनतम खर्च में निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि खर्च का पूरा हिसाब और बिल उपलब्ध कराया जाएगा तथा बची हुई राशि वापस की जाएगी।

सोसाइटी लोकतंत्र की बड़ी जीत

एसजी ग्रैंड के निवासियों ने यह साबित कर दिया कि चुनाव केवल पद पाने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि निवासियों के लोकतांत्रिक अधिकारों की बहाली का माध्यम है। अब सबकी निगाहें सोमवार से शुरू होने वाली निर्वाचन प्रक्रिया पर हैं। 97 हजार रुपये की यह सामूहिक पहल सोसाइटी लोकतंत्र के लिए एक मजबूत संदेश बनकर सामने आई है।

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