नोटिस पर नोटिस! फिर भी 100 फुटे नाले पर निर्माण!!
एनजीटी के आदेश की अनदेखी का आरोप, यूपीसीडा की कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल
NEWS1UP
संवाददाता
गाजियाबाद। यूपीसीडा के नोटिस जारी होते रहे और साहिबाबाद औद्योगिक क्षेत्र साइट-4 में करीब 100 फुटे नाले पर कथित अवैध निर्माण का काम चलता रहा। उजागर फाउंडेशन ने अब पूरे मामले को लेकर जिलाधिकारी गाजियाबाद और संबंधित विभागों से शिकायत कर निर्माण तत्काल रुकवाने और नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की मांग की है।

फाउंडेशन का आरोप है कि भूखंड संख्या 60/2/1 के रियर साइट बैक में नाले पर पुलिया निर्माण किया जा रहा है, जबकि यह क्षेत्र एनजीटी के आदेश से संरक्षित है।
एनजीटी का आदेश साफ, फिर निर्माण कैसे ?

उजागर फाउंडेशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवानी जैन के मुताबिक मामला एनजीटी के वाद संख्या 16/2014 से आच्छादित है। फाउंडेशन ने एनजीटी के 13 मई 2022 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि नाले के तल और उसके किनारे से निर्धारित 12 मीटर बफर जोन में किए गए निर्माण और नाले की कवरिंग को अवैध माना गया है तथा ऐसे निर्माण को हटाकर नाले और उसके बफर क्षेत्र को अवरोध एवं प्रदूषण से मुक्त कराने का निर्देश दिया गया है।
इसके बावजूद फाउंडेशन का आरोप है कि नाले पर पुलिया निर्माण जारी रहा।
फाउंडेशन के अनुसार शिकायत संख्या 40014025027988 के बाद यूपीसीडा के उपमहाप्रबंधक ने मैसर्स उषा रबर एंड पेंट पार्टनरशिप फर्म को नोटिस जारी किया। लेकिन आरोप है कि नोटिस के बाद भी निर्माण नहीं रुका। दोबारा शिकायत हुई तो विभाग ने फिर नोटिस जारी कर निर्माण बंद करने के निर्देश दिए। इसके बावजूद कथित तौर पर निर्माण कार्य जारी रहा।
यहीं से सबसे बड़ा सवाल उठता है कि-
अगर निर्माण नियमों के खिलाफ था तो केवल नोटिस जारी कर मामला खत्म क्यों किया गया ? और यदि निर्माण वैध था तो बार-बार नोटिस जारी करने की जरूरत क्यों पड़ी ?
एक साल में आधा दर्जन शिकायतें, फिर भी ध्वस्तीकरण नहीं

उजागर फाउंडेशन के राष्ट्रीय महासचिव सचिन सोनी के अनुसार करीब एक वर्ष में इस मामले को लेकर आधा दर्जन शिकायतें की गईं। आरटीआई के जरिए भी जानकारी मांगी गई, लेकिन कथित अवैध निर्माण के खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई नहीं हुई।
फाउंडेशन का यह भी आरोप है कि यूपीसीडा के क्षेत्रीय प्रबंधक ने मामले को न्यायालय में विचाराधीन बताया, लेकिन संबंधित न्यायालयीन प्रकरण के संबंध में मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
अब अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में
फाउंडेशन ने आरोप लगाया है कि बार-बार शिकायतों और विभागीय नोटिस के बावजूद यदि निर्माण जारी रहा, तो यह जांच का विषय है कि आखिर निर्माणकर्ता को किसका संरक्षण मिल रहा था ?
फाउंडेशन ने मामले की शिकायत जिलाधिकारी, यूपीसीडा और प्रदूषण विभाग समेत संबंधित अधिकारियों से की है और संकेत दिया है कि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने की पूरी जानकारी एनजीटी के समक्ष रखी जाएगी।
