नाइट हेरिटेज रन: उत्साह के बीच आमजन की पीड़ा, घंटों जाम में जूझता रहा गाजियाबाद
NEWS1UP
संवाददाता
गाजियाबाद। फिट इंडिया अभियान को बढ़ावा देने और ऐतिहासिक धरोहरों के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से शहर में उत्तर प्रदेश की पहली नाइट हेरिटेज रन का आयोजन किया गया। अंतरराष्ट्रीय स्तर के धावकों की भागीदारी और आयोजन की भव्यता ने जहां एक ओर शहर को नई पहचान देने की कोशिश की, वहीं दूसरी ओर आम नागरिकों के लिए यह रात भारी परेशानियों से भरी रही।
एलिवेटेड रोड पर आयोजित इस रन के चलते शहर के कई प्रमुख मार्गों पर देर रात तक भीषण जाम की स्थिति बनी रही। हालात इतने खराब हो गए कि जो दूरी सामान्यतः 10 से 20 मिनट में तय हो जाती है, उसे पूरा करने में लोगों को 3 से 4 घंटे तक लग गए। दफ्तरों से लौट रहे कर्मचारी, परिवार के साथ सफर कर रहे लोग, बुजुर्ग और बच्चे, सभी इस अव्यवस्था की चपेट में आ गए।

ट्रांस हिंडन और राजनगर एक्सटेंशन क्षेत्र के लोगों में खासा आक्रोश देखने को मिला। कई लोग भूखे-प्यासे घंटों गाड़ियों में फंसे रहे। कुछ मामलों में तो छोटे बच्चों और बीमार व्यक्तियों को भी जाम में इंतजार करना पड़ा, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई।
सोशल मीडिया पर लोगों ने अपनी पीड़ा खुलकर जाहिर की।
एक व्यक्ति ने लिखा,
“बिना ठोस योजना और रिसर्च के ट्रैफिक डायवर्जन लागू करना आम जनता के साथ अन्याय है। वैकल्पिक रास्ते इतने संकरे हैं कि वे बढ़ते दबाव को झेल ही नहीं सकते।”
एक अन्य ने अपनी नाराजगी जताते हुए कहा,
“दिनभर की मेहनत के बाद घर लौटते समय घंटों सड़क पर फंसे रहना बेहद कष्टदायक है, लेकिन जिम्मेदारों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।”
एक महिला ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस बदइंतजामी का संज्ञान लेने की मांग करते हुए लिखा कि आम नागरिकों की परेशानियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
कुछ लोगों ने बताया कि गुड़गांव से गाजियाबाद अपने गंतव्य तक पहुंचने में उन्हें करीब पांच घंटे लग गए, जबकि सामान्य परिस्थितियों में यह सफर काफी कम समय में पूरा हो जाता है। कई लोग रात देर से अपने घर पहुंचे, जिससे उनके दैनिक जीवन और अगले दिन की दिनचर्या पर भी असर पड़ा।
हालांकि, ट्रैफिक पुलिस की ओर से डायवर्जन योजना लागू करने और वैकल्पिक मार्ग सुझाने की बात कही गई, लेकिन जमीनी हकीकत में यह व्यवस्था नाकाफी साबित हुई। सड़कों पर फंसे लोगों के लिए न तो कोई त्वरित राहत व्यवस्था दिखी और न ही ट्रैफिक को नियंत्रित करने के पर्याप्त इंतजाम।
