[t4b-ticker]

गंगा एक्सप्रेसवे की दरारों पर अखिलेश ने सरकार को घेरा! बोले, ‘खतरे में है आपकी जान’

0
FF

पैचवर्क वाले हिस्से में फिर दिखीं दरारें

एक सप्ताह पहले बारिश में 10 मीटर गहरा गड्ढा बनने से मचा था हड़कंप

NEWS1UP

पॉलिटिकल डेस्क

लखनऊ। गंगा एक्सप्रेसवे पर सामने आईं नई दरारों को लेकर सियासत गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने एक्सप्रेसवे की तस्वीरों और वीडियो के जरिए योगी सरकार पर निशाना साधते हुए इसे लोगों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला बताया है। उन्नाव के पास एक्सप्रेसवे के जिस हिस्से में दरारें दिखाई दी हैं, वहां पहले मिट्टी धंसने और कटाव के बाद मरम्मत और पैचवर्क कराया गया था। अब उसी हिस्से में दोबारा दरारें सामने आने से निर्माण गुणवत्ता और बारिश के दौरान एक्सप्रेसवे की मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं।

अखिलेश यादव ने एक्स पर वीडियो साझा करते हुए लिखा,

“सावधान… खतरे में है आपकी जान! ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ पर नदी की धाराओं की तरह दिख रहीं ये अनगिनत दरारें… भाजपा के भ्रष्टाचार की गवाही दे रही हैं।”

उनके इस बयान के बाद एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

एक सप्ताह पहले 10 मीटर गहरा गड्ढा

दरारों का मामला ऐसे समय सामने आया है, जब 18 अगस्त को मेरठ-प्रयागराज कैरिजवे पर 421वें किलोमीटर के पास भारी बारिश के बाद करीब 10 मीटर गहरा गड्ढा बन गया था। बारिश के तेज बहाव में सड़क का एक हिस्सा और उससे जुड़ा तटबंध बह गया था। घटना ने एक्सप्रेसवे की जल निकासी, तटबंध की मजबूती और निर्माण गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

जुलाई में भी क्षतिग्रस्त हुआ था हिस्सा

गंगा एक्सप्रेसवे पर बारिश से नुकसान की यह पहली घटना नहीं है। जुलाई में उन्नाव में सोनिक टोल प्लाजा को एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाली करीब सात मीटर लंबी अप्रोच रोड क्षतिग्रस्त हो गई थी। तटबंध के पास मिट्टी का कटाव हुआ और कैरिजवे का एक हिस्सा ढह गया था। इसके बाद क्षतिग्रस्त हिस्से में मरम्मत और पैचवर्क कराया गया।

अब मरम्मत वाले हिस्से में ही नई दरारें दिखाई देने से सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पैचवर्क के जरिए सिर्फ ऊपर से सड़क को दुरुस्त किया जा रहा है या मिट्टी के कटाव, तटबंध और जल निकासी की मूल समस्या का भी स्थायी समाधान किया गया है ?

अप्रैल में हुआ था उद्घाटन

594 किलोमीटर लंबे छह-लेन गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 29 अप्रैल 2026 को हुआ था। यह मेरठ को प्रयागराज से जोड़ता है और 12 जिलों से होकर गुजरता है। इसे मेरठ और प्रयागराज के बीच यात्रा का समय करीब 12 घंटे से घटाकर लगभग छह घंटे करने वाले महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर के तौर पर विकसित किया गया है।

हालांकि, उद्घाटन के कुछ ही महीनों के भीतर बारिश के दौरान अलग-अलग हिस्सों में सड़क, अप्रोच रोड और तटबंध को नुकसान पहुंचने की घटनाओं ने परियोजना की गुणवत्ता, ड्रेनेज व्यवस्था और दीर्घकालिक मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब उन्नाव के पास पैचवर्क वाले हिस्से में आई नई दरारों ने इस सवाल को और गंभीर बना दिया है कि बारिश में एक्सप्रेसवे की वास्तविक मजबूती कितनी है और क्या इसकी निर्माण एवं मरम्मत गुणवत्ता की स्वतंत्र तकनीकी जांच की जरूरत है ?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!