हाईकोर्ट के आदेश पर डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय की जांच, लखनऊ से पहुंची टीम ने खोली 3 साल की फाइलें
रजिस्ट्रेशन, रिन्यूअल, चुनाव, ऑडिट और शिकायतों का मांगा हिसाब
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद डिप्टी रजिस्ट्रार, चिट्स, फर्म एवं सोसायटीज कार्यालय में गुरुवार को उस समय हलचल मच गई, जब लखनऊ मुख्यालय से करीब तीन सदस्यीय टीम अचानक निरीक्षण के लिए पहुंच गई।

सूत्रों के मुताबिक टीम ने पिछले तीन वर्षों के रजिस्ट्रेशन, रिन्यूअल, पत्राचार, सोसायटी चुनावों से जुड़े आदेश और दस्तावेज, ऑडिट रिपोर्ट, शिकायतों और उन पर हुई कार्रवाई से संबंधित रिकॉर्ड खंगाला। फाइलों के निस्तारण की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में रही। मेरठ के डिप्टी रजिस्ट्रार के भी टीम में शामिल होने की चर्चा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद क्यों अहम है जांच ?
दरअसल, 31 जुलाई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजनगर एक्सटेंशन की क्लासिक रेजीडेंसी सोसायटी से जुड़े देशमणि शर्मा बनाम राज्य एवं अन्य मामले में डिप्टी रजिस्ट्रार कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी की थी। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने कहा था कि कार्यालय “पोस्ट ऑफिस की तरह कार्य कर रहा है।”
इसी मामले में हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब लखनऊ मुख्यालय की टीम द्वारा तीन वर्षों के रिकॉर्ड की पड़ताल को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक निरीक्षण के दौरान स्टाफ में भी बेचैनी दिखाई दी।
मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर 2026 को होनी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या लखनऊ की जांच टीम को उन फाइलों में भी जवाब मिलेंगे, जिन पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाए हैं ?
