कंप्लीशन सर्टिफिकेट समेत 10 मांगों पर मोती रेजीडेंसी के निवासियों का बिल्डर को अल्टीमेटम
13 साल से लंबित समस्याओं पर 3 दिन में एक्शन प्लान मांगा
NEWS1UP
एओए/आरडब्ल्यूए डेस्क
गाजियाबाद। फ्लैट की पूरी कीमत चुकाई, टैक्स और दूसरे भुगतान किए, वर्षों से मेंटेनेंस शुल्क भी दिया, लेकिन 13 साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष जारी है। राजनगर एक्सटेंशन स्थित मोती रेजीडेंसी के निवासियों ने अब बिल्डर/प्रबंधन को चौथा औपचारिक विरोध पत्र भेजकर अपने सब्र की सीमा साफ कर दी है। पत्र की कॉपी पुलिस आयुक्त को भी भेजी गई है।
निवासियों के पत्र में बिजली और वोल्टेज की समस्या, लिफ्ट व विद्युत सुरक्षा, पानी की गुणवत्ता, बेसमेंट लीकेज, सुरक्षा, पार्किंग, सफाई, AOA और कॉमन एरिया समेत कई मुद्दे उठाए गए हैं। यानी घर खरीदने के 13 साल बाद भी सुविधाओं की वह तस्वीर सामने नहीं आई, जिसका भरोसा फ्लैट खरीदारों को दिया गया था।
13 साल से CC कहां अटका है ?
मामले का सबसे गंभीर पहलू पूर्णता प्रमाण पत्र (CC) का है। निवासियों के अनुसार यह प्रमाण पत्र पिछले 13 वर्षों से लंबित है। यहीं से सवाल सीधे बिल्डर से निकलकर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण तक पहुंचता है। उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट एक्ट के सक्षम प्राधिकारी GDA को यह बताना चाहिए कि इतने लंबे समय से मामला लंबित क्यों है और बिल्डर की जिम्मेदारियां पूरी कराने के लिए अब तक क्या ठोस कार्रवाई हुई।
क्या बिल्डर लंबित प्रक्रियाओं की आड़ में अपनी जिम्मेदारियों से बच रहा है ? और क्या GDA की कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित है ?
13 साल की देरी इन सवालों को और गंभीर बना देती है।
CC अटका तो AOA का रास्ता भी अटका ?
मोती रेजीडेंसी के निवासियों के सामने कंप्लीशन सर्टिफिकेटका लंबित होना केवल भवन से जुड़ी औपचारिकता का सवाल नहीं है। निवासियों का कहना है कि CC लंबित होने के कारण अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) के गठन और पंजीकरण की प्रक्रिया भी प्रभावित हो रही है। यही वजह है कि चौथे विरोध पत्र में AOA के गठन और पंजीकरण के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करने की मांग की गई है।
मेंटेनेंस शुल्क लेते रहे, सुविधाएं कब देंगे ?
निवासियों ने मेंटेनेंस शुल्क की समीक्षा और लंबित शिकायतों के समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि वे कोई एहसान नहीं मांग रहे, बल्कि उन्हीं बुनियादी सेवाओं की मांग कर रहे हैं जिनके लिए वे नियमित भुगतान कर रहे हैं।
पानी के मामले में पत्र में TDS 450+ का उल्लेख है। लिफ्ट और इलेक्ट्रिकल सेफ्टी ऑडिट की मांग भी की गई है।
अब तीन दिन में जवाब
निवासियों ने बिल्डर से तीन दिन के भीतर लिखित, समयबद्ध Action Plan और जमीन पर कार्रवाई की मांग की है। कार्रवाई नहीं होने पर मामला GDA, जिला प्रशासन, पुलिस, विद्युत विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्वास्थ्य विभाग तक ले जाने की चेतावनी दी गई है।
