NSA केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल: अकेली डीएम को जिम्मेदार कैसे ठहरा सकते हैं ?
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा एवं स्टूडेंट एक्टिविस्ट आकृति चौधरी को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लेने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम की याचिका पर सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया है।
मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें आकृति चौधरी की NSA हिरासत को रद्द करते हुए 5 लाख रुपये का मुआवजा देने और इसकी वसूली अधिकारियों के वेतन से किए जाने का निर्देश दिया गया था। मेधा रूपम ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
पूरी प्रक्रिया में अकेली डीएम कैसे जिम्मेदार ?
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मौखिक टिप्पणी में सवाल उठाया कि यदि NSA के तहत हिरासत का फैसला कई स्तरों की जांच और रिपोर्ट के बाद लिया गया था, तो केवल जिलाधिकारी को अलग करके व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है।
कोर्ट के अनुसार, यदि प्रक्रिया पुलिस अधिकारियों की रिपोर्ट से शुरू होकर कई प्रशासनिक स्तरों से गुजरी और संबंधित सलाहकार बोर्ड ने भी मामले की समीक्षा की, तो डीएम को अकेले जिम्मेदार ठहराने का सवाल उठता है।
डीएम ने अकेले फैसला नहीं लिया
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि डीएम के सामने मामला आने से पहले पुलिस और प्रशासन के विभिन्न स्तरों पर प्रक्रिया पूरी हुई थी। वहीं, मेधा रूपम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने भी व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय किए जाने पर सवाल उठाया।
अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नजर
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अपना फैसला सुरक्षित रखा है। लिहाजा अभी 5 लाख रुपये की व्यक्तिगत वसूली के संबंध में अंतिम स्थिति सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगी।
