KDP ग्रैंड सवाना में दसवें दिन निकला शांतिपूर्ण मार्च, गेस्ट हाउस से कंप्लीशन सर्टिफिकेट तक उठे सवाल
सैकड़ों निवासियों ने शांतिपूर्ण मार्च निकालकर GDA से गेस्ट हाउस को N-111 में बदलने की प्रक्रिया और दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग की
NEWS1UP
संवाददाता
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन स्थित केडीपी ग्रैंड सवाना सोसायटी में कॉमन गेस्ट हाउस और अन्य लंबित समस्याओं को लेकर चल रहा धरना रविवार को दसवें दिन भी जारी रहा। बड़ी संख्या में निवासियों ने सोसायटी परिसर में शांतिपूर्ण विरोध रैली निकालकर गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और संबंधित रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की। रैली में महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, युवाओं और बच्चों ने भी हिस्सा लिया।
विवाद का केंद्र गेस्ट हाउस से जुड़ा N-111 है। AOA और निवासियों के अनुसार, फरवरी 2014 की डीड ऑफ डिक्लेरेशन में संबंधित क्षेत्र को गेस्ट हाउस एवं साझा सुविधा के रूप में दर्शाया गया था, जबकि उसमें N-111 नाम की स्वतंत्र इकाई का उल्लेख नहीं था। वहीं, निवासियों का दावा है कि बायर/सेल एग्रीमेंट में भी गेस्ट हाउस को कॉमन प्रॉपर्टी के रूप में दर्शाया गया। ऐसे में उनका सवाल है कि बाद में N-111 को किस दस्तावेज, किस प्रक्रिया और किस वैधानिक आधार पर स्वीकृति मिली।
AOA ने GDA से केवल अंतिम स्वीकृत नक्शा दिखाने के बजाय पूरी फाइल सार्वजनिक करने की मांग की है। इसमें आवेदन, संलग्न दस्तावेज, तकनीकी रिपोर्ट, अधिकारियों की टिप्पणियां, संस्तुतियां और अंतिम स्वीकृति से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं। साथ ही मूल और संशोधित नक्शों, डीड ऑफ डिक्लेरेशन तथा खरीदारों के पंजीकृत समझौतों का आपस में मिलान कराने की मांग की गई है।

पांच प्रमुख मांगें
निवासियों ने गेस्ट हाउस और N-111 की स्थिति की स्वतंत्र जांच, जांच पूरी होने तक संबंधित निर्माण या उपयोग परिवर्तन पर रोक, सभी 15 टावरों की वैध फायर एनओसी और कंप्लीशन सर्टिफिकेट उपलब्ध कराने, 500 KVA क्षमता के पांच DG सेट लगाने तथा कन्वीनियंस शॉप्स से जुड़े मुद्दे के समाधान की मांग की है।
AOA अध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी और सचिव राहुल बालियान ने कहा कि यदि मामले का समाधान उपलब्ध दस्तावेजों और उत्तर प्रदेश अपार्टमेंट अधिनियम के अनुरूप नहीं हुआ तो अगला शांतिपूर्ण प्रदर्शन GDA कार्यालय में किया जाएगा। इसके बाद शासन और अन्य उच्च अधिकारियों के समक्ष मामला उठाने तथा आवश्यकता पड़ने पर सक्षम न्यायालय की शरण लेने की बात भी कही गई है।
निवासियों का कहना है कि उनका मुख्य सवाल यही है कि यदि मूल दस्तावेजों में क्षेत्र गेस्ट हाउस के रूप में दर्ज था, तो बाद में N-111 की स्थिति कैसे बनी और उसे किस प्रक्रिया के तहत मंजूरी दी गई। AOA ने कहा कि दस्तावेजी स्थिति स्पष्ट होने और प्रशासन की ओर से लिखित कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
