आयुष्मान कार्ड बनाने में रामपुर पूरे यूपी में अव्वल, एक साल में बने 1.79 लाख कार्ड
कैंसर पीड़ितों और दिव्यांगों तक पहुंची इलाज की उम्मीद, लखनऊ में रामपुर को मिला सम्मान
अब तक 6.91 लाख से ज्यादा कार्ड जारी, जनता दर्शन में डीएम ने जरूरतमंदों को सौंपे कार्ड
NEWS1UP
संवाददाता
रामपुर। गंभीर बीमारी और इलाज का भारी खर्च किसी गरीब परिवार को बेबस न कर दे, इसी उम्मीद के साथ शुरू की गई आयुष्मान भारत योजना के तहत रामपुर ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। आयुष्मान कार्ड बनाने में जिला पूरे उत्तर प्रदेश में पहले स्थान पर पहुंच गया है। पिछले एक साल में यहां 1.79 लाख कार्ड बनाए गए, जबकि अब तक कुल 6,91,928 कार्ड जारी हो चुके हैं। इस उपलब्धि के लिए लखनऊ के गोमती नगर स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने रामपुर को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।
कैंसर पीड़ित को कार्ड, सर्जरी की उम्मीद को सहारा
आयुष्मान योजना का महत्व उन परिवारों के लिए सबसे ज्यादा है, जिनके सामने बीमारी के साथ इलाज के खर्च की भी चुनौती खड़ी होती है। इसी कड़ी में जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने जनता दर्शन के दौरान गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों और दिव्यांग लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड सौंपे।
इनमें टांडा तहसील के ग्राम पोयली नायक निवासी कैंसर पीड़ित केविन्दर सिंह और मिलक तहसील के राजकुमार माहेश्वरी शामिल हैं, जिनके पैर की सर्जरी होनी है। स्वार तहसील क्षेत्र के 100 प्रतिशत दिव्यांग हेमराज और प्रेमशंकर को भी कार्ड दिए गए।
एक साल में 1.79 लाख कार्ड, अब इलाज तक पहुंच की चुनौती
रामपुर में कार्ड बनाने की रफ्तार ने जिले को प्रदेश में पहला स्थान दिलाया है। प्रशासन का कहना है कि विभिन्न विभागों के तालमेल से पात्र लोगों को योजना से जोड़ने का अभियान तेज किया गया। लेकिन आयुष्मान योजना की सफलता केवल कार्डों की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से भी तय होती है कि जरूरत पड़ने पर लाभार्थी को अस्पताल में समय पर इलाज मिल रहा है या नहीं।
जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप कोशिश है कि कोई भी पात्र जरूरतमंद योजना के लाभ से वंचित न रहे। जिले में अब तक 6.91 लाख से अधिक कार्ड बन चुके हैं। प्रदेश में पहला स्थान मिलना उपलब्धि है, लेकिन असली राहत तब होगी जब गंभीर बीमारी से जूझ रहे हर पात्र परिवार को इलाज के लिए आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
