अभावों को ढाल नहीं, संघर्ष का रास्ता बनाया, रामनाथ कोविन्द का जीवन हर भारतीय के लिए प्रेरणा: योगी
पूर्व राष्ट्रपति की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा’
‘मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ का लोकभवन में विमोचन
सीएम बोले- कच्चे घर थे, लेकिन इरादे पक्के थे
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
लखनऊ। अभावों में जन्म, बचपन में मां का साया उठ जाना और जीवन में तमाम चुनौतियां, लेकिन न परिस्थितियों के आगे हार मानी और न संघर्ष का रास्ता छोड़ा। गांव के स्कूल से पढ़ाई शुरू कर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने वाले पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की जीवन यात्रा संघर्ष, परिश्रम और दृढ़ संकल्प की मिसाल है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को लोकभवन सभागार में रामनाथ कोविन्द की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के हिंदी संस्करण का विमोचन करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनाथ कोविन्द ने अभावों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता बनाया। उनका जीवन देश के युवाओं और विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि रामनाथ कोविन्द का उत्तर प्रदेश आना प्रदेशवासियों के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह उनकी जन्मभूमि भी है और कर्मसाधना की भूमि भी। जिस आत्मकथा का पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विमोचन किया था, उसका हिंदी संस्करण अब उनकी जन्मभूमि वाले प्रदेश की राजधानी लखनऊ में विमोचित हुआ है। योगी ने कहा कि रामनाथ कोविन्द की यात्रा सिखाती है कि महानता केवल अनुकूल परिस्थितियों में आगे बढ़ने से नहीं मिलती, बल्कि विपरीत हालात का सामना करने के साहस से हासिल होती है।
परौंख गांव से राष्ट्रपति भवन तक का सफर
मुख्यमंत्री ने कहा कि कानपुर देहात के परौंख गांव के एक अत्यंत गरीब परिवार में जन्मे रामनाथ कोविन्द के बचपन में ही मां का निधन हो गया था। इसके बावजूद उन्होंने अभावों को अपनी राह की बाधा नहीं बनने दिया। गांव के विद्यालय से शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की और अधिवक्ता के रूप में गरीबों तथा वंचितों की आवाज बने। इसके बाद राष्ट्रवादी विचारधारा और सार्वजनिक जीवन से जुड़ते हुए उन्होंने राजनीति में कदम रखा। भारतीय जनता पार्टी में सदस्य और पदाधिकारी के रूप में अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करने के बाद वह राज्यसभा के सदस्य बने, बिहार के राज्यपाल नियुक्त हुए और अंततः भारत के राष्ट्रपति के पद तक पहुंचे।
योगी ने कहा कि रामनाथ कोविन्द ने पांच वर्ष तक लगभग 145 करोड़ भारतीयों के संवैधानिक प्रमुख के रूप में देश का नेतृत्व किया। उन्हें जो भी जिम्मेदारी मिली, उसका निर्वहन सहजता, सरलता और संवैधानिक मर्यादाओं के अनुरूप किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि परिस्थितियां अनुकूल हों तो लोककल्याण और विकास के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए, लेकिन मुश्किलें सामने आने पर संघर्ष से पीछे हटने के बजाय उनका सामना करना चाहिए। रामनाथ कोविन्द का जीवन इसी संकल्प का उदाहरण है। मुख्यमंत्री ने कहा, “कच्चे घर थे, लेकिन इरादे पक्के थे।”

राष्ट्रपति बनने के बाद भी नहीं भूले अपनी मिट्टी
मुख्यमंत्री ने रामनाथ कोविन्द के अपनी जन्मभूमि, गांव और पुराने परिचितों के प्रति लगाव का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की पहचान केवल उसके पद से नहीं, बल्कि उसके संस्कारों से भी होती है। जीवन में कितनी भी ऊंचाई हासिल कर लें, अपनी जड़ों और उन लोगों को नहीं भूलना चाहिए, जिन्होंने जीवन की यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हो।
योगी ने बताया कि उन्हें कई बार रामनाथ कोविन्द के परौंख गांव जाने का अवसर मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उनके गांव पहुंच चुके हैं। राष्ट्रपति पद से कार्यकाल पूरा होने के बाद भी रामनाथ कोविन्द अवसर मिलने पर अपने पुराने साथियों और परिचितों से मिलते हैं। कानपुर आने पर गांव की ओर रुख करना और लखनऊ आने पर पुराने परिचितों से मिलना उनकी सादगी और आत्मीयता को दर्शाता है। चाट वाले, चाय वाले, कपड़े वाले और दूसरे पुराने परिचितों से उनके संबंध आज भी बने हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जन्मभूमि के प्रति प्रेम और कृतज्ञता हर भारतीय के जीवन का महत्वपूर्ण संस्कार होना चाहिए।

भगवान श्रीराम के प्रसंग से समझाया मातृभूमि का महत्व
मुख्यमंत्री ने जन्मभूमि के महत्व को समझाने के लिए भगवान श्रीराम और लक्ष्मण के प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लंका विजय के बाद सोने की लंका देखकर लक्ष्मण के वहां रुकने की इच्छा जताने पर भगवान श्रीराम उन्हें मातृभूमि और जन्मभूमि का महत्व समझाते हैं। इस प्रसंग में कहा गया है, ‘अपि स्वर्णमयी लंका न मे लक्ष्मण रोचते, जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी।’ अर्थात सोने की लंका भी आकर्षक हो सकती है, लेकिन जननी और जन्मभूमि का स्थान स्वर्ग से भी ऊंचा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यक्ति को अपनी जन्मभूमि, समाज और संस्कारों के प्रति हमेशा सम्मान बनाए रखना चाहिए।
विदेश यात्राओं में भी प्रभावी ढंग से रखा भारत का पक्ष
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राष्ट्रपति के रूप में रामनाथ कोविन्द ने देश के विभिन्न राज्यों और दुनिया के अनेक देशों की यात्राएं कीं। इन यात्राओं के दौरान उन्होंने प्रभावी ढंग से भारत का पक्ष रखा और दूसरे देशों के साथ संबंध मजबूत करने में योगदान दिया। उनका सार्वजनिक जीवन संवैधानिक मर्यादा, सहज व्यवहार और देश के प्रति समर्पण का उदाहरण है। गांव से राष्ट्रपति भवन तक की उनकी यात्रा साबित करती है कि मेहनत, दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मविश्वास के दम पर बड़ी से बड़ी मंजिल हासिल की जा सकती है।

रील और लाइक्स की दुनिया से निकलकर किताबों से जुड़ें युवा
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों और युवाओं से महापुरुषों की जीवनियां तथा आत्मकथाएं पढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के जीवन संघर्ष को पढ़ने से यह समझने का अवसर मिलता है कि कठिन परिस्थितियों को अपनी ताकत में कैसे बदला जा सकता है। अच्छी पुस्तकें जीवन को दिशा देती हैं, सोचने-समझने की क्षमता बढ़ाती हैं और दूसरों के अनुभवों से सीखने का अवसर प्रदान करती हैं।
स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए योगी ने कहा कि आज लोग पांच से सात घंटे तक मोबाइल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बिता रहे हैं। यदि इस समय में से एक-दो घंटे बचाकर अध्ययन और चिंतन में लगाए जाएं तो इसका जीवन पर कहीं अधिक सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने युवाओं से कहा कि सोशल मीडिया पर रील बनाकर लाइक्स हासिल करने की होड़ में समय गंवाने के बजाय वास्तविक जीवन, ज्ञान, अध्ययन और व्यक्तित्व विकास पर ध्यान दें। उन्होंने यह भी कहा कि विद्यालयों, महाविद्यालयों और पंचायतों में ऐसी पुस्तकों की उपलब्धता बढ़ाना जरूरी है, जो विद्यार्थियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा दें।
57,600 ग्राम सचिवालयों में पुस्तकालय के लिए अलग कक्ष
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से उत्तर प्रदेश सरकार प्रत्येक ग्राम पंचायत में पुस्तकालय विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। प्रदेश में 57,600 ग्राम सचिवालय बन चुके हैं और इनमें पुस्तकालय के लिए अलग कक्ष निर्धारित किया गया है। सरकार का प्रयास है कि गांवों के बच्चे इन पुस्तकालयों में जाकर पढ़ सकें और उन्हें अच्छी पुस्तकों तथा अध्ययन सामग्री की सुविधा मिले। इसके साथ ही डिजिटल पुस्तकालयों के विकास पर भी जोर दिया जा रहा है।
योगी ने कहा कि पुस्तकालय ज्ञान, विचार और व्यक्तित्व निर्माण के केंद्र होते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को भी अच्छी पुस्तकों तक पहुंच मिलनी चाहिए, ताकि वे अपनी प्रतिभा विकसित कर भविष्य के लिए बेहतर तैयारी कर सकें। विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, माध्यमिक विद्यालयों और बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में भी पुस्तकालयों के विकास के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि विद्यार्थियों को केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि पढ़ने और विचार करने की आदत भी विकसित करनी चाहिए।
कार्यक्रम में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द, उनकी पत्नी सविता कोविन्द, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और बृजेश पाठक, वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण तथा रूपा पब्लिकेशंस के प्रबंध निदेशक कपिश मेहरा सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
