October 14, 2026
[t4b-ticker]

दो साल में ही रुचिरा सफायर की व्यवस्थाओं पर सवाल, बिल्डर के खिलाफ आंदोलन! पुलिस पहुंची तो बनी सहमति

0
SF1

पजेशन के दो साल में ही मेंटेनेंस, STP, लिफ्ट और पानी के रिसाव पर उठे सवाल

बिल्डर ने भी पुलिस से की शिकायत, बैठक के बाद आंदोलन स्थगित

NEWS1UP

विशेष संवाददाता

गाजियाबाद। किसी सोसाइटी में पजेशन मिले महज दो साल हुए हों और इतने कम समय में ही बुनियादी सुविधाओं व रखरखाव पर सवाल उठने लगें, तो यह बिल्डर की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। NH-24 स्थित रुचिरा सफायर सोसाइटी में निवासी पानी के रिसाव, सीवेज की बदबू, लिफ्ट की परेशानी और अधूरी सुविधाओं से परेशान होकर आंदोलन पर उतर आए। बुधवार को सामूहिक बैठकें कर बिल्डर के खिलाफ विरोध का ऐलान किया गया। सोसाइटी के गेट पर बैनर लगाकर निवासियों ने अपनी मांगें सामने रखीं। मामला बढ़ने पर पुलिस मौके पर पहुंची और बिल्डर व निवासियों के बीच बैठक हुई। समस्याओं के समाधान का आश्वासन मिलने के बाद आंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया गया।

लेकिन सवाल बरकरार है,

जब पजेशन के दो साल के भीतर ही लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए आंदोलन करने को मजबूर हों, तो जिम्मेदारी किसकी है ?

निवासियों ने बताईं अपनी समस्याएं

सोसाइटी निवासी रविंदर पुंडीर ने मेंटेनेंस सेवाओं को बेहद खराब बताते हुए कहा कि-

रविंद्र पुंडीर

 महज दो साल में बिल्डिंग में पानी के रिसाव की समस्या सामने आने लगी है। इस संबंध में प्रबंधन के साथ कई बैठकें हुईं, लेकिन उन्हें अब तक समाधान नहीं मिला।

 रमेश रामानी का कहना है कि-

रमेश रामानी

 समस्याओं के समाधान के नाम पर बिल्डर की ओर से केवल तारीख पर तारीख मिल रही है। लंबे इंतजार के बाद निवासी निराश हो चुके हैं और उन्हें अपनी मांगें उठाने के लिए आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

राजेश रावत ने बताया कि-

राजेश रावत

 करीब दो साल पहले लगभग 250 लोगों ने यहां घर खरीदे थे, लेकिन उनके मुताबिक अब तक IGL गैस पाइपलाइन की सुविधा उपलब्ध नहीं हुई है। लिफ्टों में भी परेशानियां बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि समाधान नहीं मिलने पर निवासी रोजाना धरना देने को भी तैयार थे।

वहीं, सपना चौहान ने STP की समस्या को गंभीर बताते हुए कहा कि-

सपना चौहान

 H टावर में प्लांट की टेस्टिंग तक पूरी नहीं हुई है। उनके मुताबिक, फ्लैटों में बदबू के कारण रहना मुश्किल हो रहा है और अब निवासी इस परेशानी से राहत चाहते हैं।

घाटे में भी सुविधाएं दे रहे, मेंटेनेंस शुल्क में बदलाव जरूरी: गुप्ता

वहीँ मैसर्स पवित्रा कंसबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक राजीव गुप्ता का कहना है कि मेंटेनेंस एग्रीमेंट के तहत कुछ निवासी शुल्क की दरों में संशोधन नहीं होने दे रहे हैं। कंपनी घाटे में रहकर भी सुविधाएं दे रही है और कमियां दूर करने के प्रयास जारी हैं। उन्होंने व्यवस्था सुधारने के लिए निवासियों से सहयोग करने और नियमानुसार मेंटेनेंस शुल्क पर विचार करने की अपील की।

बैनर पर समस्याएं, बिल्डर ने भी दर्ज कराई शिकायत

निवासियों ने सोसाइटी के गेट पर लगाए बैनर में फायर सेफ्टी, स्विमिंग पूल, सुरक्षा व्यवस्था, बेसमेंट में कैमरे, डीजल जनरेटर के लोड कैलकुलेशन ऑडिट, सीवेज और पानी की व्यवस्था समेत कई मुद्दे उठाए हैं। उनका आरोप है कि कई जरूरी काम अब तक अधूरे हैं।

दूसरी ओर, बिल्डर कंपनी ने विरोध के तरीके पर आपत्ति जताई है। कंपनी का आरोप है कि सोसाइटी के साझा क्षेत्रों में अवरोध पैदा करने, पोस्टर-बैनर लगाने और संभावित खरीदारों को बिजली, पानी व लिफ्टों को लेकर कथित तौर पर गलत जानकारी देने से परियोजना की छवि और बिक्री प्रभावित हो रही है। कंपनी ने पुलिस से एक निवासी को नामजद करते हुए कुछ अन्य लोगों के खिलाफ शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है।

पुलिस की मौजूदगी में बैठक, आंदोलन अस्थायी रूप से स्थगित

पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद बिल्डर और निवासियों के बीच बैठक हुई। इसमें सुरक्षा गार्डों की व्यवस्था, लिफ्टों, बेसमेंट-2 में जलभराव, पानी के रिसाव और स्विमिंग पूल से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। बिल्डर की ओर से समाधान का आश्वासन मिलने के बाद निवासियों ने फिलहाल आंदोलन स्थगित कर दिया।

हालांकि, आंदोलन थमने से समस्याओं का समाधान होना अभी बाकी है। अब देखना होगा कि बिल्डर अपने आश्वासनों को कब तक पूरा करता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

error: Content is protected !!