दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा पर एसिड अटैक!
आरोपी की तलाश में पुलिस
कानून सख्त है, पर सोच कब बदलेगी ?
NEWS1UP
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली एक बार फिर शर्मसार हुई है। नॉर्थ वेस्ट दिल्ली स्थित लक्ष्मीबाई कॉलेज के पास उस वक्त हड़कंप मच गया, जब सेकंड ईयर की एक छात्रा पर एसिड फेंकने की सनसनीखेज वारदात सामने आई। यह घटना शनिवार सुबह करीब 10 बजे की बताई जा रही है, जब छात्रा एक्सट्रा क्लास के लिए कॉलेज जा रही थी। अचानक मोटरसाइकिल पर आए तीन युवकों ने उस पर ज्वलनशील पदार्थ फेंक दिया।
गनीमत यह रही कि छात्रा ने अपने चेहरे को बचा लिया, लेकिन उसके दोनों हाथ बुरी तरह झुलस गए। मौके पर अफरातफरी मच गई। राहगीरों ने तुरंत छात्रा को अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज आरएमएल हॉस्पिटल में चल रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, पीड़िता की स्थिति स्थिर है और जल्द ही उसे डिस्चार्ज कर दिया जाएगा।
जान-पहचान वाला निकला हमलावर
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह हमला किसी अनजान व्यक्ति ने नहीं, बल्कि छात्रा के जानकार ने किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी युवक की पहचान जितेंद्र के रूप में हुई है, जो मुकुंदपुर इलाके का रहने वाला है। उसके साथ दो और साथी, ईशान और अरमान, भी थे। बताया जा रहा है कि ईशान ने बोतल से अरमान को एसिड थमाया, जिसने छात्रा पर फेंक दिया। पीड़िता ने पुलिस को बताया कि आरोपी जितेंद्र उसका पीछा करता था और करीब एक महीने पहले दोनों के बीच किसी बात को लेकर तीखी बहस हुई थी। इसी रंजिश के चलते उसने यह भयानक कदम उठाया।
घटनास्थल पर पहुंची क्राइम टीम
घटना की जानकारी मिलते ही क्राइम टीम और एफएसएल की टीम मौके पर पहुंची और सबूत जुटाए। पुलिस ने पीड़िता के बयान और चोटों के आधार पर भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी के लिए लगातार रेड कर रही है।
समाज के लिए एक गहरा सवाल
यह घटना सिर्फ एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि समाज की उस सोच पर करारा तमाचा है, जो अस्वीकार या असहमति को ‘सज़ा’ देने का माध्यम बना देती है। एसिड अटैक कोई सामान्य अपराध नहीं, यह किसी की ज़िंदगी, सपनों और आत्मविश्वास पर हमला है।
जहां एक ओर देश में महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, वहीं ऐसे अपराध यह सवाल उठाते हैं कि आखिर हमारी मानसिकता कब बदलेगी? क्या किसी लड़की का ‘ना’ कहना अब भी किसी की ‘मर्दानगी’ को चुनौती लगता है? दिल्ली जैसी जागरूक मानी जाने वाली राजधानी में दिनदहाड़े इस तरह का हमला, न केवल कानून-व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाता है, बल्कि यह भी याद दिलाता है कि ‘बेटी बचाओ’ का नारा केवल पोस्टर पर नहीं, दिलों में उतरना चाहिए।
पुलिस की जांच जारी है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर पूरे समाज को झकझोर दिया है, कि जब तक मानसिकता नहीं बदलेगी, तब तक कानून भी अकेला कुछ नहीं कर सकता।
