OC और CC रद्द होने से संकट में सोसाइटी!
खरीदारों की सुरक्षा और कानूनी वैधता पर उठते गंभीर सवाल!

NEWS1UP
भूमेश शर्मा
नोएडा/गाजियाबाद। घर खरीदना हर मध्यमवर्गीय भारतीय के जीवन का सबसे बड़ा सपना होता है, लेकिन NCR जैसे तेजी से विकसित होते शहरी इलाकों में यह सपना अब कानूनी उलझनों के जाल में उलझता जा रहा है। कई खरीदार अपनी पूरी उम्र की जमा-पूँजी लगाकर फ्लैट तो खरीद लेते हैं, पर ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट और कंप्लीशन सर्टिफिकेट जैसे दस्तावेज़ों की अहमियत से अक्सर अनजान रहते हैं। यही अनदेखी आगे चलकर उनके घर की कानूनी स्थिति को ही संदेह के घेरे में डाल देती है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है नोएडा के सेक्टर-78 स्थित अंतरिक्ष गोल्फ व्यू-2 सोसाइटी में, जहाँ बिल्डर कलरफुल एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड की मनमानी और मानकों की अनदेखी ने सैकड़ों परिवारों को संकट में डाल दिया है। वर्ष 2022 में इस प्रोजेक्ट का ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) और कंप्लीशन सर्टिफिकेट (CC) नोएडा प्राधिकरण द्वारा रद्द कर दिया गया, जिससे सोसाइटी की कानूनी वैधता और निवासियों की सुरक्षा दोनों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

OC–CC रद्द: खरीदारों के सपनों का घर अब कानूनी संकट में!
नोएडा प्राधिकरण की रिपोर्ट में साफ़ उल्लेख है कि बिल्डर ने निर्माण के दौरान कई गंभीर खामियां छोड़ीं-
-
फायर NOC का अभाव
-
नक्शे के नियमों से हटकर निर्माण
-
फायर टेंडर के लिए मार्ग का अभाव
-
यांत्रिक पार्किंग की तकनीकी खामियां
-
रिहायशी फ्लैटों का व्यावसायिक उपयोग
इन कारणों से प्राधिकरण ने सोसाइटी को “असुरक्षित और गैर-अनुपालक” घोषित कर दिया।
एक रेजिडेंट कहते हैं–
“बिल्डर ने प्राधिकरण मानकों का पालन नहीं किया, जिससे हमारी सोसाइटी का कानूनी अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।”
बिल्डर का बचाव: ‘छोटी-मोटी समस्याएं हर जगह होती हैं’
बिल्डर कलरफुल एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड का तर्क है –
“हमारा ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट रद्द हुआ है, जिसे हम जल्द बहाल करवा लेंगे। छोटी-मोटी समस्याएं हर जगह होती हैं, बातचीत से हल की जा सकती हैं।”
इस बयान ने निवासियों के गुस्से को और बढ़ा दिया।
एक निवासी ने कहा-
“कानूनी मानकों का उल्लंघन कोई छोटी समस्या नहीं। यह शर्मनाक और निंदनीय बयान है, जो हमारे अधिकारों का अपमान है।”
कानूनी स्थिति: बिना OC–CC के घर माने जाते हैं ‘अपूर्ण’!

रियल एस्टेट विशेषज्ञों के अनुसार, बिना OC और CC के कोई भी प्रोजेक्ट कानूनन अधूरा माना जाता है। इसका सीधा असर खरीदारों पर पड़ता है-
-
रजिस्ट्री की वैधता संदिग्ध हो जाती है!
-
बैंक लोन, पुनर्विक्रय और बिल्डिंग बीमा में बाधाएं आती हैं!
-
किसी दुर्घटना की स्थिति में प्राधिकरण जिम्मेदारी से बच सकता है!
रियल एस्टेट मामलों के कानूनी जानकार ‘एडवोकेट गजेंद्र सिंह आर्य’ कहते हैं-
“OC और CC के बिना रहना सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि कानूनन असुरक्षा है।”
नोएडा और गाजियाबाद की कई ऐसी सोसाइटियां वर्षों से इसी कानूनी संकट में जी रही हैं, जिनकी इमारतें भले तैयार हों, लेकिन कानूनी रूप से ‘अपूर्ण’ हैं।
ढांचागत खतरे: गिरता प्लास्टर और फेल सिस्टम
एक निवासी ने बताया-
“दीवारों से रोज प्लास्टर झड़ता है। बच्चों को खेलने भेजने में डर लगता है। हमने घर खरीदा था, डर नहीं।”
नोएडा प्राधिकरण की रिपोर्ट में पाया गया कि पानी की सप्लाई 650 फ्लैटों के लिए स्वीकृत थी, लेकिन बिल्डर ने 1050 फ्लैट बना दिए। फायर सिस्टम वर्षों से निष्क्रिय पड़ा है और यांत्रिक पार्किंग भी आधे हिस्से में काम नहीं कर रही।
बढ़ता रुझान: अधूरी सोसाइटियों में बढ़ती आबादी

यह सिर्फ अंतरिक्ष गोल्फ व्यू-2 का मामला नहीं है। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में सैकड़ों हाउसिंग प्रोजेक्ट्स ऐसे हैं, जिनके पास न तो कंप्लीशन सर्टिफिकेट है और न ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट। फिर भी वहाँ हजारों परिवार रह रहे हैं, और कानूनन अस्थिर जमीन पर खड़े हैं।
कानूनी जानकर ‘अधिवक्ता प्रभात राणा’ कहते हैं-
“कई खरीदारों की रजिस्ट्री भी तकनीकी रूप से गलत मानी जा सकती है।”
खरीदारों की लड़ाई, सिस्टम की परीक्षा
अंतरिक्ष गोल्फ व्यू-2 के निवासियों का संघर्ष सिर्फ एक सोसाइटी का आंदोलन नहीं, बल्कि पूरे NCR के खरीदारों की पुकार है। जब बिल्डर नक्शे के विपरीत निर्माण कर प्राधिकरण मानकों का उल्लंघन करते हैं और फिर “छोटी-मोटी खामियों” का हवाला देते हैं, तो यह केवल गैर-जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नागरिक अधिकारों और कानून दोनों का अपमान है।
अब सवाल यह है, क्या प्राधिकरण इन बिल्डरों की जवाबदेही तय करेगा, या फिर नोएडा और गाजियाबाद की ऊँची इमारतों के पीछे यह खामोश खतरा यूँ ही बढ़ता रहेगा ?
