January 23, 2026

वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में मुस्लिम छात्रों के बड़े प्रवेश को लेकर बवाल!

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उप राज्यपाल से मिले भाजपा विधायक, पहली एमबीबीएस एडमिशन लिस्ट रद्द करने की मांग

NEWS1UP

संवाददाता

श्रीनगर/जम्मू। कटरा स्थित माता वैष्णो देवी के पवित्र धाम में स्थापित वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस के पहले बैच में 85 प्रतिशत यानी 50 में से 42 मुस्लिम छात्रों के चयन ने जम्मू-पट्टी में सियासी और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया है। मामला तूल पकड़ते हुए सड़कों से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक चर्चा में है।

 हिंदू संगठनों का विरोध: पवित्र स्थल पर मुस्लिम छात्रों का प्रवेश अस्वीकार्य

विहिप, बजरंग दल समेत कई हिंदू संगठनों ने मेडिकल कॉलेज में “एक समुदाय विशेष” के अधिक संख्या में प्रवेश पर कड़ा ऐतराज जताया है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कॉलेज श्राइन बोर्ड के धन से बनाया गया है, इसलिए इसमें हिंदू छात्रों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए

बीजेपी ने भी इस मुद्दे को उठाया है। पार्टी नेताओं ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल और श्राइन बोर्ड के चेयरमैन मनोज सिन्हा को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि-

“कटरा के धार्मिक महत्व को देखते हुए मेडिकल कॉलेज में सिर्फ उन्हीं छात्रों को प्रवेश मिलना चाहिए, जिनकी आस्था वैष्णो देवी में हो।”

 सुनील शर्मा ने उठाई आवाज 

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेता विपक्ष सुनील शर्मा ने आरोप लगाया कि कॉलेज में “एक समुदाय विशेष के छात्रों की असामान्य संख्या” देखकर वे हैरान हैं। शर्मा के अनुसार एलजी सिन्हा ने उन्हें भरोसा दिया है कि इस मामले में “उचित कार्रवाई” की जाएगी।

 प्रशासन की सफाई: NEET मेरिट से ही हुए हैं सभी चयन

आधिकारिक सूत्रों ने साफ किया है कि वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज को अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा नहीं मिला है, इसलिए यहां प्रवेश पूरी तरह NEET मेरिट और नेशनल मेडिकल काउंसिल की मानक गाइडलाइन के अनुसार हुआ है।
जम्मू-कश्मीर में NEET के नियमों के तहत-

  • 85% सीटें स्थानीय निवासियों के लिए आरक्षित रहती हैं

  • बाकी 15% सीटें अखिल भारतीय कोटा से भरी जाती हैं

पहले बैच में केवल 8 हिंदू छात्रों ने ही प्रवेश प्राप्त किया है।

 पीपुल्स कॉन्फ्रेंस का पलटवार: बीजेपी दे रही है मामले को सांप्रदायिक रंग

जम्मू-कश्मीर पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के नेता सज्जाद लोन ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह “पूरी तरह मेरिट-आधारित प्रवेश प्रक्रिया” को सांप्रदायिक रंग दे रही है।
सज्जाद लोन के अनुसार-

“जब गाइडलाइन स्पष्ट हैं और प्रवेश NEET मेरिट से हुआ है, तो इस विवाद का कोई औचित्य नहीं।”

 कॉलेज को मिले अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा

विहिप और बजरंग दल चाहती हैं कि वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज को हिंदू अल्पसंख्यक संस्थान घोषित किया जाए, ताकि भविष्य में सीटों पर धार्मिक प्राथमिकता लागू हो सके। ऊधमपुर के बीजेपी विधायक आर.एस. पठानिया ने भी इस मांग का समर्थन किया है।

 कॉलेज की शुरुआत और विवाद का बढ़ता दायरा

वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज ने 2025–26 सत्र से अपनी पहली बैच की प्रवेश प्रक्रिया शुरू की है। शुरुआत के साथ ही यह विवाद उभरना प्रशासन और कॉलेज प्रबंधन के लिए नई चुनौती बन गया है।
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि-

  • क्या श्राइन बोर्ड या एलजी प्रशासन प्रवेश प्रक्रिया पर पुनर्विचार करेगा,

  • अथवा मामला “मेरिट बनाम धार्मिक प्राथमिकता” की बहस में और गहराता जाएगा।

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