February 9, 2026

साधारण गांव से सर्वोच्च न्यायालय तक: जस्टिस सूर्यकांत बने भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश

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9 फरवरी 2027 तक रहेगा कार्यकाल

NEWS1UP

विशेष संवाददाता

नई दिल्ली। वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ग्रहण की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक विशेष समारोह में शपथ दिलाई। उनका कार्यकाल 9 फरवरी 2027 को समाप्त होगा।

शपथ ग्रहण समारोह में देश-विदेश की न्यायपालिका से जुड़े शीर्ष पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। इसके साथ ही न्यायिक समुदाय ने जस्टिस सूर्यकांत के अनुभव, संवेदनशील दृष्टिकोण और प्रभावशाली न्यायिक योगदान को देखते हुए उनसे महत्वपूर्ण न्यायिक नेतृत्व की उम्मीद जताई है।

शपथ ग्रहण समारोह में विदेशी मेहमानों की विशेष उपस्थिति

इस समारोह में कई देशों के मुख्य न्यायाधीश और वरिष्ठ न्यायाधीश मौजूद रहे, जिनमें भूटान के मुख्य न्यायाधीश ल्योंपो नॉर्बू शेरिंग, ब्राजील के मुख्य न्यायाधीश एडसन फाचिन, केन्या की मुख्य न्यायाधीश जस्टिस मार्था कूम और सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस सुसान नजोकी, मलेशिया संघीय न्यायालय की जज जस्टिस टैन श्री दातुक नालिनी पाथमनाथन, मॉरीशस की मुख्य न्यायाधीश बीबी रेहाना मुंगली-गुलबुल, नेपाल के मुख्य न्यायाधीश प्रकाश मान सिंह राउत, सुप्रीम कोर्ट जज सपना प्रधान मल्ला और पूर्व न्यायाधीश अनिल कुमार सिन्हा, श्रीलंका के मुख्य न्यायाधीश पी. पद्मन सुरेसन और सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस एस. थुरैराजा व जस्टिस एच. एम. डी. नवाज शामिल थे। 

अंतरराष्ट्रीय न्यायिक समुदाय की यह उपस्थिति भारत की सर्वोच्च न्यायपालिका की वैश्विक प्रतिष्ठा को भी दर्शाती है।

हरियाणा के एक साधारण गाँव से भारत के सर्वोच्च न्यायिक पद तक की यात्रा

जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले के छोटे से गाँव पेटवार में हुआ था। शिक्षक परिवार से आने वाले सूर्यकांत का बचपन गांव की सामान्य परिस्थितियों में बीता। उन्होंने गाँव के सरकारी स्कूल से आठवीं तक पढ़ाई की, जहाँ बेंच तक नहीं थीं।

  • 1981: गवर्नमेंट पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज, हिसार से स्नातक

  • 1984: महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से कानून की पढ़ाई

  • उसी वर्ष हिसार की जिला अदालत से वकालत की शुरुआत

  • 1985: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू

  • 2000: राज्य के सबसे युवा एडवोकेट जनरल बने

  • 2001: सीनियर एडवोकेट का दर्जा

  • 2004: पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के स्थायी जज

  • 2018: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश

  • 2019: सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश नियुक्त

उनकी यह यात्रा असाधारण मेहनत, संतुलित दृष्टिकोण और विधिक सूझबूझ का प्रतीक मानी जाती है।

एक गंभीर, संतुलित और संवेदनशील न्यायविद के रूप में पहचान

जस्टिस सूर्यकांत को उनके सहयोगी एक ऐसे न्यायविद के रूप में याद करते हैं जो गंभीर और व्यवहारिक दृष्टिकोण रखते हैं, न्यायिक संतुलन पर जोर देते हैं और सामाजिक व संवैधानिक मुद्दों के प्रति संवेदनशील रुख अपनाते हैं। उन्होंने समाज के कमजोर वर्गों, पीड़ितों के अधिकारों, पर्यावरण संरक्षण, आरक्षण नीति और सार्वजनिक संसाधनों की रक्षा जैसे मुद्दों पर उल्लेखनीय निर्णय दिए।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दिए महत्वपूर्ण फैसले

चंडीगढ़ में 14 वर्षों के कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई ऐतिहासिक निर्णय दिए, जिनमें शामिल हैं:

  • कैदियों को वैवाहिक मुलाकात व कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से संतान प्राप्ति का अधिकार

  • 2017 डेरा सच्चा सौदा हिंसा के बाद डेरा की सफाई, जांच और आर्थिक अनियमितताओं की जांच के आदेश

  • नागरिक अधिकारों और शासन की पारदर्शिता को मजबूत करने वाले कई फैसले

सुप्रीम कोर्ट में लिखे प्रमुख फैसले

सुप्रीम कोर्ट में करीब 80 महत्वपूर्ण फैसलों के माध्यम से जस्टिस सूर्यकांत ने न्यायिक विमर्श को नई दिशा दी। इनमें प्रमुख हैं-

  • एएमयू के अल्पसंख्यक दर्जे पर पुनर्विचार की राह खोलने वाला फैसला

  • दिल्ली की आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल को जमानत

  • पेगासस स्पाइवेयर मामले की सुनवाई करने वाली पीठ का हिस्सा

  • अदालत का यह ऐतिहासिक कथन:
    राज्य को राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर असीमित अधिकार नहीं दिए जा सकते।

इसके अलावा उन्होंने नागरिकता अधिनियम की धारा–6A, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, अनुच्छेद-370, लोकतंत्र और भ्रष्टाचार विरोधी मामलों पर भी असरदार निर्णय दिए।

आगे के लिए न्यायपालिका की बड़ी उम्मीदें

जस्टिस सूर्यकांत का समृद्ध अनुभव, व्यावहारिक दृष्टिकोण, और संविधान के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को देखते हुए न्यायपालिका व विधि विशेषज्ञों को उम्मीद है कि उनके कार्यकाल में न्यायिक पारदर्शिता बढ़ेगी, लंबित मामलों के समाधान में तेजी आएगी, तकनीक के माध्यम से न्यायपालिका का आधुनिकीकरण तेज होगा और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा और मजबूत होगी।

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