7 दिसंबर बना निर्णायक दिन: वीवीआईपी एड्रेस सोसाइटी में अटके एओए चुनाव पर मचा घमासान!
छह महीने से लटका चुनाव
निवासियों का सब्र अब टूटने की कगार पर
NEWS1UP
संवाददाता
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन की प्रतिष्ठित वीवीआईपी एड्रेस सोसाइटी में एओए चुनाव को लेकर मचा घमासान अब चरम पर है। छह माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी चुनाव न होने से निवासी आक्रोशित हैं। इसी बीच 7 दिसंबर वह तारीख मानी जा रही है जब चुनाव अधिकारी की ओर से चुनाव की अंतिम घोषणा की जाएगी।
डिप्टी रजिस्ट्रार द्वारा स्वास्थ्य विभाग के राजीव कुमार तेवतिया को चुनाव अधिकारी नियुक्त किया गया था, लेकिन कई बार तारीख तय होने के बाद भी चुनाव नहीं कराया जा सका। निवासियों का आरोप है कि चुनाव अधिकारी जानबूझकर प्रक्रिया को धीमा कर रहे हैं।
कालातीत हो चुका बोर्ड, चुनाव न होना दुखद: एओए अध्यक्ष
एओए अध्यक्ष यज्ञदत्त त्यागी ने कहा कि वह कालातीत हो चुके हैं और स्वयं समय पर चुनाव कराना चाहते हैं। उनके अनुसार समूची चुनावी तैयारी कालातीत सचिव की निगरानी में चल रही है। त्यागी ने स्पष्ट कहा कि “चुनाव का इतने समय तक लंबित रहना दुर्भाग्यपूर्ण है।”
वोटर लिस्ट न मिलने से अटकी प्रक्रिया: चुनाव अधिकारी
चुनाव अधिकारी राजीव तेवतिया ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उन्होंने कई बार चुनाव की तारीखें प्रस्तावित कीं, लेकिन बोर्ड द्वारा अंतिम वोटर लिस्ट उपलब्ध न कराने की वजह से चुनाव नहीं हो पाए। उन्होंने बताया कि अब रेसिडेंट्स की दो-दो सदस्यों की तीन टीमों के जरिए वोटर लिस्ट अपडेट कराई जा रही है और 7 दिसंबर को अंतिम चुनाव तिथि की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी।
डिप्टी रजिस्ट्रार वैभव कुमार का बड़ा बयान

इस पूरे विवाद पर डिप्टी रजिस्ट्रार वैभव कुमार ने साफ किया कि अभी तक सोसाइटी की ओर से उन्हें चुनाव अधिकारी के खिलाफ कोई भी लिखित शिकायत प्राप्त नहीं हुई है।
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि “यदि यह पाया गया कि चुनाव अधिकारी की वजह से चुनाव में देरी हो रही है, तो उन्हें बदल दिया जाएगा। प्रशासन किसी भी स्तर पर चुनाव को लटकने नहीं देगा।”
निवासियों में आक्रोश
निवासियों का कहना है कि निर्वाचन अधिकारी जानबूझकर चुनाव में देरी करा रहे हैं। इससे सोसाइटी के कार्य ठप पड़ते जा रहे हैं। हाल ही में सोसाइटी के बैंक खाते सीज होने की खबर ने भी लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
अब सबकी निगाहें 7 दिसंबर पर
सोसाइटी में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की वापसी और पारदर्शी प्रबंधन की दिशा में 7 दिसंबर अब निर्णायक दिन बन गया है। क्या चुनाव की तारीख तय होगी ? क्या वोटर लिस्ट पूरी होगी ? और यदि ऐसा नहीं होता है तो क्या चुनाव अधिकारी पर कार्रवाई होगी ? इन सभी सवालों पर पूरे सोसाइटीवासी की निगाहें टिकी हुई हैं।
