दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में
कक्षा 5 तक के छात्रों की पढ़ाई ‘हाइब्रिड मोड’ में
NEWS1UP
विशेष संवाददाता
नई दिल्ली/नोएडा/गाजियाबाद। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) की हवा एक लगातार लोगों की सांसों पर भारी पड़ रही है। शनिवार सुबह राजधानी का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘सीवियर’ श्रेणी के करीब पहुंचते ही वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) का स्टेज-3 लागू कर दिया। यह फैसला न सिर्फ प्रशासनिक स्तर पर सख्ती का संकेत है, बल्कि यह भी बताता है कि प्रदूषण अब स्वास्थ्य आपातकाल का रूप ले चुका है।
निर्माण पर ब्रेक, विकास की रफ्तार थमी
GRAP-3 के तहत पूरे NCR में निर्माण और विध्वंस (कंस्ट्रक्शन व डेमोलिशन) गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसका असर रियल एस्टेट, इंफ्रास्ट्रक्चर और दिहाड़ी मजदूरों पर साफ दिखाई देगा। सरकार का तर्क है कि धूल और मलबे से उठने वाले सूक्ष्म कण (PM10 और PM2.5) प्रदूषण को और खतरनाक बना सकते हैं, इसलिए यह सख्त कदम जरूरी था।
बच्चों की सेहत प्राथमिकता, स्कूलों में हाइब्रिड मोड

प्रदूषण का सबसे बड़ा असर बच्चों पर पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में कक्षा 5 तक के छात्रों की पढ़ाई को अनिवार्य रूप से ‘हाइब्रिड मोड’ में शिफ्ट करने का आदेश दिया गया है। इसका मतलब है कि बच्चे अब कम समय के लिए स्कूल जाएंगे या पूरी तरह ऑनलाइन पढ़ाई करेंगे, ताकि जहरीली हवा के सीधे संपर्क से बचा जा सके।
सड़कों पर भी सख्ती, पुराने वाहनों पर रोक
GRAP-3 के तहत BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल चार पहिया वाहनों के चलने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह फैसला ट्रैफिक से होने वाले उत्सर्जन को तुरंत कम करने के उद्देश्य से लिया गया है। हालांकि, इससे हजारों वाहन मालिकों को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ेगी, जिससे सार्वजनिक परिवहन पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
आंकड़े जो डराते हैं
शनिवार सुबह दिल्ली का औसत AQI 397 दर्ज किया गया, जबकि 21 मॉनिटरिंग स्टेशनों पर AQI 400 के पार चला गया। इसका सीधा मतलब है, सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन, गले में खराश और लंबे समय में फेफड़ों व दिल से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा।
सवाल वही पुराना: हर साल यही क्यों?
हर सर्दी में GRAP के अलग-अलग चरण लागू होते हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या ये कदम स्थायी समाधान हैं या सिर्फ तात्कालिक राहत ? पराली जलाने, वाहनों की बढ़ती संख्या, निर्माण धूल और मौसम की मार, इन सबका हल अब भी अधूरा नजर आता है।
फिलहाल, प्रशासन ने साफ कर दिया है कि हालात सुधरने तक सख्ती जारी रहेगी। लेकिन दिल्ली-NCR के लोगों के लिए यह सिर्फ एक और चेतावनी है कि साफ हवा अब सुविधा नहीं, बल्कि संघर्ष बन चुकी है।