इशिका को न्याय दिलाने सड़कों पर उतरा जनसैलाब, बढ़पुरा से उठी इंसाफ की मांग!
NEWS1UP December 28, 2025 0
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संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। दादरी क्षेत्र के बढ़पुरा गांव की बेटी इशिका उर्फ ईशु की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। आरोप है कि दहेज में स्कॉर्पियो गाड़ी और 10 लाख रुपये की मांग पूरी न होने पर ससुराल पक्ष ने उसकी हत्या कर फांसी पर लटका दिया। चार दिन बीत जाने के बाद भी जब पुलिस कार्रवाई की रफ्तार सुस्त नजर आई तो ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और इंसाफ की मांग को लेकर पूरा गांव एकजुट हो गया।
शादी के बाद शुरू हुआ दहेज का ज़हर
मृतका के पिता जितेंद्र भाटी के मुताबिक 23 नवंबर 2023 को उन्होंने अपनी बेटी इशिका और भतीजी की शादी बागपत जनपद के गोठरा गांव में की थी। शादी में सामर्थ्य से बढ़कर दान-दहेज दिया गया, लेकिन इसके बावजूद ससुराल वाले संतुष्ट नहीं हुए। आरोप है कि पति सचिन, जेठ नवीन और अन्य परिजन लगातार स्कॉर्पियो गाड़ी और 10 लाख रुपये की मांग को लेकर इशिका को मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित करते रहे।

आत्महत्या नहीं, हत्या का आरोप
24 अक्टूबर की दोपहर गोठरा गांव में इशिका का शव फंदे से लटका मिला। मायके पक्ष का साफ कहना है कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या है। मामले में पति सचिन, जेठ नवीन, मांगे सहित चार महिलाओं के खिलाफ खेकड़ा कोतवाली, बागपत में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। परिजनों ने यह भी चौंकाने वाला खुलासा किया कि इशिका की बड़ी बहन को छह महीने पहले दहेज प्रताड़ना के चलते ससुराल से निकाल दिया गया था।
पुलिस की भूमिका पर सवाल
परिजनों का आरोप है कि रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद पुलिस की कार्रवाई बेहद धीमी है। इसी नाराजगी के चलते बढ़पुरा गांव में ग्रामीणों की बैठक हुई, जहां एक स्वर में आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और कठोर सजा की मांग उठी। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों और मुख्यमंत्री तक शिकायत की जाएगी।
मोमबत्तियों की रोशनी में गुस्सा और दर्द!
कैंडल मार्च बढ़पुरा गांव से शुरू होकर मुख्य मार्गों से गुजरा। हर चेहरा गुस्से और गम से भरा था। “इशिका को न्याय दो”, “दहेज हत्यारे मुर्दाबाद” और “बेटी सुरक्षित नहीं तो समाज शर्मिंदा” जैसे नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। मार्च में शामिल लोगों का कहना था कि यह सिर्फ एक बेटी की मौत नहीं, बल्कि पूरे समाज की विफलता है।
महिलाएं सबसे आगे, टूटता डर
इस कैंडल मार्च की खास बात यह रही कि बड़ी संख्या में महिलाएं आगे-आगे चलती नजर आईं। कई महिलाओं की आंखों में आंसू थे, लेकिन आवाज में डर नहीं, बल्कि हौसला था। उनका कहना था कि इशिका आज नहीं रही, लेकिन उसकी मौत ने बेटियों के लिए बोलने की हिम्मत जगा दी है।
यह आत्महत्या नहीं, व्यवस्था की हत्या है
कैंडल मार्च में शामिल लोगों ने कहा कि इशिका की मौत को आत्महत्या बताकर दबाने की कोशिश की जा रही है, जबकि यह दहेज और अत्याचार के खिलाफ कानूनों की कमजोरी को उजागर करती है। उन्होंने मांग की कि सभी नामजद आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी हो और मामले की निष्पक्ष, तेज़ जांच कराई जाए।
समाज में गूंजा आक्रोश
दहेज एक अभिशाप निवारण समिति के संस्थापक मास्टर मनमिंदर भाटी ने कहा कि दहेज के नाम पर बेटियों की हत्या समाज के लिए कलंक है। उन्होंने दहेज उत्पीड़न करने वालों के सामाजिक बहिष्कार और कानूनों को सख्ती से लागू करने की मांग की। उनका कहना है कि जब तक समाज और व्यवस्था मिलकर कड़ा संदेश नहीं देंगे, तब तक बेटियां यूं ही दहेज के दानव की भेंट चढ़ती रहेंगी।
कैंडल मार्च ग्राम बढपुरा से दादरी जीटी रोड तक निकाला गया। इस अवसर पर समिति के प्रवक्ता आर्य सागर खारी ने कहा यदि इस मामले में पुलिस संतोषजनक कठोर कार्यवाही नहीं करती है तो बागपत जिलाधिकारी कार्यालय व मेरठ कमिश्नरी का घेराव किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अब हम किसी और बेटी को दहेज लोभियों की भेंट नहीं चढ़ने देंगे। कैंडल मार्च में क्षेत्र के सैकड़ो सामाजिक शामिल हुए।।
इशिका की मौत ने एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्या कानून का डर दहेज के लालच से बड़ा नहीं हो पा रहा ? और कब तक बेटियां शादी के बाद सुरक्षित जीवन के बजाय मौत की दहलीज पर खड़ी मिलेंगी ?
