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राष्ट्रीय हथकरघा दिवस: 30 लाख लोगों की आजीविका बना यूपी का हथकरघा-पावरलूम

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बुनकरों को 109 करोड़ की बिजली सहायता, भदोही की कालीन से नई संसद तक यूपी के हस्तशिल्प की बढ़ी वैश्विक पहचान

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में हथकरघा और पावरलूम उद्योग अब केवल पारंपरिक शिल्प नहीं, बल्कि करीब 30 लाख लोगों की आजीविका का मजबूत आधार बन चुका है। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार बुनकरों और हस्तशिल्पियों को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि डिजाइन, आधुनिक तकनीक, पैकेजिंग और वैश्विक बाजार से जोड़कर उनके उत्पादों को नई पहचान दिलाने की दिशा में काम कर रही है। इसी क्रम में पिछले वर्ष 40 हजार से अधिक हस्तशिल्पियों को बिजली मद में 109 करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध कराई गई।

लोकभवन में आयोजित संत कबीर राज्यस्तरीय हथकरघा पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्यमंत्री ने उत्कृष्ट बुनकरों को सम्मानित किया, विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को चेक वितरित किए और हथकरघा उत्पादों के प्रमुख खरीदारों के साथ कई महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर कराए। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य कारीगरों को सम्मान के साथ स्थायी बाजार उपलब्ध कराना है, ताकि उनका हुनर सीधे वैश्विक मांग से जुड़ सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भदोही की कालीन, जो कभी संकट के दौर से गुजर रही थी, आज दुनिया के बाजारों में उत्तर प्रदेश की पहचान बन चुकी है। देश की नई संसद भवन में भी भदोही की कालीन का उपयोग प्रदेश के कारीगरों की उत्कृष्ट कला का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि वाराणसी ट्रेड फैसिलिटेशन सेंटर, भदोही एक्सपो सेंटर तथा आधुनिक डिजाइन और टेक्नोलॉजी के माध्यम से प्रदेश के हस्तशिल्प को अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि टेक्सटाइल क्षेत्र को नई गति देने के लिए लखनऊ में 1000 एकड़ में पीएम मित्र मेगा टेक्सटाइल पार्क विकसित किया जा रहा है, जबकि संत कबीर के नाम पर प्रदेश में पांच टेक्सटाइल पार्क स्थापित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि कृषि के बाद सर्वाधिक रोजगार देने वाला टेक्सटाइल क्षेत्र उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देगा और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट (ओडीओपी), विश्वकर्मा श्रम सम्मान और पीएम विश्वकर्मा योजना के माध्यम से बुनकरों और कारीगरों को प्रशिक्षण, टूलकिट और बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने सरकारी विभागों, अस्पतालों, होटलों और गेस्ट हाउसों में हथकरघा उत्पादों की खरीद बढ़ाने के निर्देश देते हुए आमजन से भी स्थानीय हस्तशिल्प उत्पादों को उपहार के रूप में अपनाने की अपील की।

समारोह में सम्मानित बुनकरों और हस्तशिल्पियों ने सरकार की योजनाओं को उत्साहवर्धक बताते हुए कहा कि आर्थिक सहायता, सम्मान और विपणन के नए अवसरों से उनका कारोबार मजबूत हुआ है। वाराणसी, सीतापुर, हाथरस, टांडा, इटावा और ललितपुर सहित विभिन्न जिलों के लाभार्थियों ने कहा कि सरकारी सहयोग से पारंपरिक हुनर को नई पहचान और नई पीढ़ी को नए अवसर मिल रहे हैं।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के महत्व पर मुख्यमंत्री ने कहा कि 7 अगस्त 1905 का स्वदेशी आंदोलन आत्मनिर्भर भारत की नींव था। महात्मा गांधी ने खादी और चरखे को आजादी के आंदोलन का प्रतीक बनाया था और आज उसी स्वदेशी भावना को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश के हथकरघा और हस्तशिल्प उत्पाद वैश्विक बाजार में भारत की पहचान मजबूत कर रहे हैं। 

कार्यक्रम में खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हस्तकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक नीरज बोरा, जय देवी, विधान परिषद सदस्य लालजी प्रसाद निर्मल, मुकेश शर्मा, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त दीपक कुमार, प्रमुख सचिव हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग अनिल कुमार सागर, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, निदेशक हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विजयेंद्र पांडियन, विशेष सचिव शेषमणि त्रिपाठी समेत अन्य गण्यमान्य अतिथि उपस्थिति रहे।

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