नक्शा निरस्त हुआ तो मूल आदेश कहां है ? हाईकोर्ट ने GDA उपाध्यक्ष को किया तलब!
कंप्लीशन सर्टिफिकेट पर सवालों के बीच GDA के रिकॉर्ड में बड़ा विरोधाभास
ऑफिस नोटिंग में आदेश, मूल रिकॉर्ड में नहीं मिला!
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
प्रयागराज/गाजियाबाद। फ्लैट खरीदारों को कंप्लीशन सर्टिफिकेट से जुड़े विवाद के बीच कब्जा दिए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (GDA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। 7 सितंबर को सुनवाई के दौरान अदालत के सामने GDA की ऑफिस नोटिंग में 29 मई 2006 को स्वीकृत भवन मानचित्र को 3 जुलाई 2010 के आदेश से निरस्त किए जाने का उल्लेख सामने आया, लेकिन जब हाईकोर्ट ने कथित निरस्तीकरण आदेश को मूल रिकॉर्ड से पेश करने को कहा, तो अदालत को बताया गया कि ऐसा मूल आदेश उपलब्ध नहीं है। अदालत ने इस स्थिति को भवन मानचित्रों के निरस्तीकरण और स्वीकृति की प्रक्रिया पर संदेह पैदा करने वाला माना और GDA उपाध्यक्ष को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया।
एक तरफ कंप्लीशन सर्टिफिकेट पर आपत्तियां, दूसरी तरफ खरीदारों को कब्जा
मामले की सुनवाई के दौरान बिल्डर की ओर से कहा गया कि उसने CC के लिए आवेदन किया था और GDA की ओर से कोई आपत्ति न होने के कारण संबंधित कानूनी प्रावधान के तहत Completion Certificate को स्वतः स्वीकृत (Deemed granted) माना गया। वहीं दूसरी ओर, अदालत के समक्ष यह दलील रखी गई कि GDA ने बिल्डर के आवेदन पर आपत्तियां उठाई थीं और इस संबंध में बिल्डर के खिलाफ FIR भी दर्ज की गई थी।
इन्हीं विरोधाभासी दावों के बीच हाईकोर्ट ने गंभीर सवाल उठाया कि यदि GDA की ओर से वास्तव में आपत्तियां की गई थीं, तो बिल्डर को फ्लैट बेचने और खरीदारों को कब्जा सौंपने की अनुमति किस परिस्थिति में दी गई, इसे स्पष्ट करना होगा।
अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि पूर्णता प्रमाण पत्र (CC) का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भवन सभी आवश्यकताओं के अनुरूप पूरा हो चुका है और खरीदारों के रहने एवं निवास (Occupation and dwelling) के लिए उपयुक्त है।

अब मामला पहुंचा GDA के मूल रिकॉर्ड तक
सुनवाई के दौरान सामने आई सबसे महत्वपूर्ण विसंगति 29 मई 2006 के स्वीकृत भवन मानचित्र से जुड़ी है। GDA की ऑफिस नोटिंग में उल्लेख था कि इस स्वीकृत भवन मानचित्र को तत्कालीन GDA उपाध्यक्ष द्वारा 3 जुलाई 2010 के आदेश से निरस्त किया गया था।
हाईकोर्ट ने जब अदालत में पेश किए गए मूल रिकॉर्ड से इस कथित निरस्तीकरण आदेश को दिखाने को कहा, तो अदालत को बताया गया कि 3 जुलाई 2010 का ऐसा कोई आदेश मूल रिकॉर्ड में मौजूद नहीं है और निरस्तीकरण केवल ऑफिस नोटिंग में दर्ज है।
यहीं से अदालत के सामने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक प्रश्न खड़ा हुआ कि यदि किसी भवन मानचित्र के निरस्तीकरण का उल्लेख आधिकारिक ऑफिस नोटिंग में है, तो उस कार्रवाई का मूल आदेश रिकॉर्ड में क्यों उपलब्ध नहीं है ?
हाईकोर्ट ने कहा कि यह स्थिति GDA द्वारा भवन मानचित्रों को निरस्त करने और स्वीकृत करने की प्रक्रिया के तरीके पर संदेह पैदा करती है।
GDA उपाध्यक्ष की व्यक्तिगत पेशी क्यों महत्वपूर्ण ?
इन्हीं परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने GDA उपाध्यक्ष को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। अदालत ने विशेष रूप से उन्हें यह स्पष्ट करने के लिए तलब किया है कि-
Completion Certificate को लेकर कथित आपत्तियों के बावजूद खरीदारों को कब्जा किन परिस्थितियों में दिया गया ?
29 मई 2006 के स्वीकृत भवन मानचित्र को निरस्त करने की प्रक्रिया क्या थी ?
3 जुलाई 2010 के कथित निरस्तीकरण आदेश का मूल रिकॉर्ड अदालत के सामने क्यों उपलब्ध नहीं था ?
कोर्ट ने बिल्डर के अधिवक्ता को भी निर्देश दिया है कि वह यह जानकारी लेकर आएं कि बिल्डर के खिलाफ FIR कब दर्ज हुई और यदि बिल्डर को Completion Certificate पर आपत्तियों की जानकारी थी, तो उसके बावजूद फ्लैटों का कब्जा खरीदारों को किन परिस्थितियों में सौंपा गया।
एक और सवाल: परियोजना पूरी करने की तारीख कहां है ?
हाईकोर्ट ने U.P. Apartment (Promotion of Construction, Ownership and Maintenance) Act, 2010 की धारा 4(5) का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रमोटर/बिल्डर को निर्धारित अवधि के भीतर Completion Certificate प्राप्त करना होता है।
लेकिन अदालत के सामने रखे गए 15 नवंबर 2011, 6 अप्रैल 2015 और 19 दिसंबर 2024 के स्वीकृत कंपाउंडेड बिल्डिंग प्लान में परियोजना पूरी करने की तारीख का उल्लेख नहीं मिला। कोर्ट ने इस पर भी कोई पर्याप्त स्पष्टीकरण न दिए जाने की बात दर्ज की।
हालांकि, हाईकोर्ट ने इस स्तर पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। अदालत ने सामने आए विरोधाभासों और रिकॉर्ड की स्थिति पर स्पष्टीकरण मांगा है।
10 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले को 10 सितंबर 2026 को फिर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। उस दिन GDA उपाध्यक्ष की व्यक्तिगत उपस्थिति और बिल्डर की ओर से मांगे गए स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण होंगे।
