घर खरीदा था, अब अपना ही घर पाने की लड़ाई लड़ रहे 408 परिवार!!
मोती रेजीडेंसी में मूलभूत सुविधाओं से लेकर कंप्लीशन सर्टिफिकेट तक का संकट
पांचवें रविवार भी सड़क पर उतरे निवासी
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। जिस घर के लिए किसी परिवार ने अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी जमा-पूंजी लगा दी हो, बैंक का कर्ज उठाया हो और बच्चों के भविष्य की उम्मीदें उससे जोड़ दी हों, उस घर के लिए बार-बार सड़क पर उतरना पड़े तो सवाल सिर्फ सुविधाओं का नहीं रहता, सवाल पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर खड़ा होता है।
राजनगर एक्सटेंशन की हम-तुम रोड स्थित मोती रेजीडेंसी के 408 परिवार आज इसी सवाल के बीच खड़े हैं। फ्लैट की पूरी कीमत चुकाने के बाद भी उनके सामने पानी, बिजली, लिफ्ट, एसटीपी, पार्किंग और अधूरे विकास कार्यों की समस्याएं हैं। इससे भी बड़ा संकट यह है कि फेज-1 के चारों टावरों का कंप्लीशन सर्टिफिकेट अब तक नहीं मिल सका है।

रविवार को एक बार फिर निवासी बिल्डर के मेंटिनेंस कार्यालय पहुंचे। आरोप है कि बिल्डर प्रतिनिधियों ने शिकायत लेने से इनकार कर दिया। विवाद बढ़ने पर पुलिस को मौके पर आना पड़ा और पुलिस के हस्तक्षेप के बाद शिकायत ली गई। निवासियों ने बिल्डर प्रतिनिधियों पर डराने-धमकाने के आरोप भी लगाए हैं।
यह लगातार पांचवां रविवार था जब नौकरीपेशा परिवार अपने परिवार के साथ समय बिताने के बजाय अपने घर के अधिकारों के लिए संघर्ष करते दिखाई दिए।
408 फ्लैट, लेकिन सवाल एक: घर पूरा कब होगा ?
ग्राम मोरटा के खसरा संख्या 237 और 238 पर टैकमेन बिल्डवैल प्राइवेट लिमिटेड ने प्रथम फेज में अलग-अलग टावरों में 408 फ्लैट बनाए। निवासियों का आरोप है कि जीडीए से कंप्लीशन सर्टिफिकेट हासिल किए बिना ही फ्लैटों का कब्जा दे दिया गया। लोग घरों में रहने लगे, लेकिन समय के साथ सपनों की चमक पर समस्याओं की परत चढ़ती गई।
निवासियों के मुताबिक सोसाइटी में पीने योग्य पानी की समस्या है, ओवरलोडिंग के कारण बिजली आपूर्ति प्रभावित होती है, लिफ्टों की सुरक्षा पर सवाल हैं, बेसमेंट में पानी भरता है, पार्किंग की समस्या है और विकास कार्यों के साथ एसटीपी जैसी सुविधाओं को लेकर भी शिकायतें हैं।
मेंटिनेंस शुल्क देने के बावजूद यदि परिवारों को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़े, तो जवाबदेही किसकी है ?
पांच साल से आदेश और चेतावनियां, लेकिन इंतजार खत्म नहीं हुआ
मामला नया नहीं है। 12 अक्टूबर 2021 को जीडीए के तत्कालीन अपर सचिव एवं प्रवर्तन जोन-1 के प्रभारी ने बिल्डर को कंप्लीशन सर्टिफिकेट के लिए बताई गई आपत्तियों का निराकरण करने के निर्देश दिए थे। नियमों के उल्लंघन की स्थिति में कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई। इसके बाद भी मामला आगे बढ़ने के बजाय नोटिस और समयसीमाओं के बीच उलझता रहा।
6 मई 2026 को जीडीए के सहायक अभियंता ने बिल्डर को एक सप्ताह के भीतर सोसाइटी की कमियां और अधूरे निर्माण पूरे करने, गठित एओए को सम्पूर्ण हैंडओवर देने तथा आईएफएमएस की राशि लौटाने के निर्देश दिए। पालन न होने पर यूपी नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम-1973 के तहत कार्रवाई, फेज-2 पर सील और एफआईआर की संस्तुति की चेतावनी दी गई।
लेकिन चेतावनी के बाद भी निवासी समाधान की प्रतीक्षा में हैं!!
9 जुलाई 2026 को जीडीए उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल ने भी स्वीकृत मानचित्र के अनुसार मौके पर निर्मित फ्लैटों, सामुदायिक सुविधाओं और आंतरिक विकास कार्यों के संबंध में अधिकारियों को महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए और समयसीमा निर्धारित की। इसके बावजूद निवासियों की शिकायतों का सिलसिला खत्म नहीं हुआ।
निवासियों को मध्यस्थता नहीं, कार्रवाई चाहिए

मोती रेजीडेंसी का मामला अब एक बेहद बुनियादी सवाल पूछ रहा है कि नियामक संस्था का अंतिम उद्देश्य क्या है ? यदि बिल्डर को बार-बार कमियां दूर करने के निर्देश दिए गए, समयसीमा दी गई और कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई, तो फिर उन निर्देशों का जमीन पर परिणाम क्यों नहीं दिखाई दे रहा ?
निवासी चाहते हैं कि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण उन्हें सिर्फ अगली बैठक या अगले आश्वासन तक न ले जाए, बल्कि नियमों के मुताबिक स्पष्ट और निर्णायक कार्रवाई करे। क्योंकि आम आदमी ने बिल्डर को अपना पैसा दिया है और प्राधिकरण को अपना भरोसा।
26 अक्टूबर: चुनाव से पहले कंप्लीशन की आस
अब 26 अक्टूबर को प्रस्तावित एओए चुनाव पर भी सबकी नजर है। दो वर्ष पहले चुनाव और एओए गठन की प्रक्रिया हुई थी, लेकिन कंप्लीशन सर्टिफिकेट के अभाव में एओए का पंजीकरण नहीं हो सका। निवासियों की उम्मीद है कि फेज-1 के चारों टावरों का कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिले, एओए का विधिसम्मत पंजीकरण हो और बिल्डर से पूरा हैंडओवर लेकर सोसाइटी की व्यवस्था अपने हाथों में ली जा सके।
यह उस परिवार की लड़ाई है जिसने कहा था “यह मेरा घर है” और अब वही परिवार व्यवस्था से पूछ रहा है कि-
“अगर हमने घर की पूरी कीमत चुका दी, तो अपने घर को पूरा और कानूनी रूप से सुरक्षित पाने के लिए हमें आखिर कितने रविवार और सड़क पर बिताने होंगे ?”
