गुलमोहर ग्रीन्स: बिना कंप्लीशन सर्टिफिकेट कब्जा कैसे ? 2012 से अब तक के सभी GDA उपाध्यक्षों का ब्यौरा तलब!
नोटिस के बावजूद बिल्डर पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई ?
हाईकोर्ट ने GDA की जवाबदेही की कड़ी खंगाली
फिलहाल GDA के मौजूदा उपाध्यक्ष की व्यक्तिगत मौजूदगी से छूट
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। गुलमोहर ग्रीन्स मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्ती लगातार बढ़ती जा रही है। अदालत ने अब वर्ष 2012 से वर्तमान उपाध्यक्ष के कार्यभार संभालने तक GDA में तैनात रहे सभी उपाध्यक्षों का ब्यौरा तलब किया है। कोर्ट का यह कदम मामले में प्रशासनिक जवाबदेही की कड़ी को पीछे तक खंगालने वाला माना जा रहा है।
मामले की सुनवाई के दौरान GDA की ओर से दाखिल हलफनामे में सामने आया कि संबंधित पक्ष को नियमों और बायलॉज के उल्लंघन तथा कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं लेने को लेकर कई नोटिस जारी किए गए थे। इसके बावजूद अदालत ने सवाल उठाया कि फ्लैटों की बिक्री और कब्जा दिए जाने के खिलाफ सक्षम अधिकारियों ने प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की।
एक तरफ नोटिस, दूसरी तरफ कंपाउंडिं! हाईकोर्ट ने उठाया सवाल

अदालत ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि जब Completion Certificate नहीं होने की जानकारी संबंधित अधिकारियों को थी, तो बाद में 13 जनवरी 2015 और 18 दिसंबर 2024 को fresh compounding map कैसे स्वीकृत हुए। यही घटनाक्रम अब GDA की निगरानी और बिल्डर के प्रति उसकी कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
क्या नोटिस सिर्फ कागजों तक सीमित रहे ? हाईकोर्ट ने नोटिस जारी होने, प्रभावी कार्रवाई न होने और बाद में कंपाउंडिंग की मंजूरी से जुड़े सवालों ने GDA और बिल्डर के बीच संभावित मिलीभगत की आशंका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब अदालत की नजर इस पूरे प्रशासनिक घटनाक्रम की जिम्मेदारी पर है।
हाईकोर्ट ने फिलहाल GDA के मौजूदा उपाध्यक्ष की व्यक्तिगत मौजूदगी से छूट दी है, लेकिन जरूरत पड़ने पर उन्हें दोबारा अदालत में बुलाने की बात कही है। मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर 2026 को होगी।
