लोक आयुक्त के 50 साल: जनविश्वास ही लोकतंत्र की असली ताकत
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बोले, संवैधानिक संस्थाओं पर आमजन का भरोसा ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत
सुशासन की बुनियाद है पब्लिक ट्रस्ट
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
लखनऊ। लोक आयुक्त संगठन के 50वें स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोकतंत्र की सबसे बुनियादी कसौटी सामने रखी, संवैधानिक संस्थाओं पर आम नागरिक का भरोसा। उन्होंने साफ कहा कि संस्था के पास अधिकार होना पर्याप्त नहीं, उसकी असली ताकत तब है जब अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति भी उसके प्रति विश्वास और गौरव महसूस करे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि “गुड गवर्नेंस पब्लिक ट्रस्ट पर निर्भर करता है।” जनता का भरोसा खत्म हुआ तो सुशासन का लक्ष्य भी अधूरा रह जाएगा। संस्था की विश्वसनीयता उसके काम, पारदर्शिता और शिकायतों के निष्पक्ष निस्तारण से तय होती है।
शिकायत हो तो समाधान भी हो, लेकिन सिस्टम का दुरुपयोग नहीं
सीएम योगी ने शिकायत निवारण व्यवस्था के दुरुपयोग पर भी सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आईजीआरएस, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और जनता दर्शन के जरिए शिकायतों का समयबद्ध समाधान किया जा रहा है, लेकिन कुछ लोग बिना तथ्य के अनावश्यक शिकायतें करते हैं।
उन्होंने कहा कि झूठी शिकायतें केवल सिस्टम का समय बर्बाद नहीं करतीं, बल्कि न्याय की उम्मीद लेकर आने वाले ईमानदार शिकायतकर्ता का अधिकार भी प्रभावित करती हैं। इसलिए शिकायतों का मेरिट के आधार पर परीक्षण जरूरी है और शिकायत प्रणाली का दुरुपयोग करने वालों पर भी शिकंजा कसना चाहिए।

तकनीक बनी पारदर्शिता की ताकत
मुख्यमंत्री ने पीडीएस और भूमि विवादों का उदाहरण देते हुए बताया कि तकनीक के इस्तेमाल से शिकायतों में बड़ी कमी लाई जा सकती है। ई-पॉस, ट्रैकिंग सिस्टम और डिजिटल निगरानी से राशन वितरण में हेराफेरी की गुंजाइश लगभग खत्म हुई है।
राजस्व विभाग में लंबित करीब 34 लाख मामलों के निस्तारण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि पैमाइश में पारदर्शिता के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। हर तहसील में रोबोटिक तकनीक के जरिए पैमाइश की व्यवस्था से जमीन की माप में मानवीय गड़बड़ी की संभावना कम करने का प्रयास किया गया है।
लोकसेवक के लिए अधिकार के साथ नैतिकता भी जरूरी
योगी ने कहा कि किसी लोकसेवक को बचाने का प्रयास हो सकता है, लेकिन जब शिकायत लोक आयुक्त के पास पहुंचे तो उसका फैसला मेरिट के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने चेताया कि अधिकार मिलने के बाद उदंडता स्वीकार नहीं की जा सकती।
उनके मुताबिक लोकसेवक को अपने अधिकारों के साथ संवैधानिक मूल्यों, नैतिकता और जवाबदेही से जोड़ना जरूरी है।
14 सितंबर 1977 से शुरू हुई यात्रा
उत्तर प्रदेश में लोक आयुक्त संगठन का विधिवत कार्य 14 सितंबर 1977 को शुरू हुआ था। न्यायमूर्ति विशंभर दयाल ने संगठन को प्रारंभिक नेतृत्व दिया। 50 वर्ष की इस यात्रा को मुख्यमंत्री ने लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही और जनविश्वास से जोड़ते हुए आगामी 50 वर्षों के लिए नई कार्ययोजना तैयार करने की अपेक्षा जताई।
उन्होंने देशभर के लोक आयुक्तों, लोकपाल और अन्य सदस्यों को आमंत्रित कर संवाद का भव्य कार्यक्रम आयोजित करने का सुझाव भी दिया।
सीएम का बड़ा संदेश: जिसका जो है, उसे वही मिले
मुख्यमंत्री ने डीबीटी और जनधन खातों का उदाहरण देते हुए कहा कि लोकतंत्र की असली कसौटी यही है कि “जिसका जो है, उसे वह प्राप्त होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि तकनीक ने सरकारी योजनाओं में बिचौलियों की भूमिका कम की है और करोड़ों लाभार्थियों तक सहायता सीधे पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि एआई, डेटा एनालिसिस, साइबर सिक्योरिटी और ई-गवर्नेंस का इस्तेमाल लोक कल्याण और सुशासन का माध्यम बनना चाहिए।
इस दौरान लोक आयुक्त न्यायमूर्ति संजय मिश्र, उप लोक आयुक्त शंभू सिंह यादव, दिनेश कुमार सिंह, सुरेंद्र कुमार यादव, अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद, पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण आदि मौजूद रहे।
