ट्रेड शो में बदली तस्वीर: यूपी की महिलाएं अब सिर्फ उत्पाद नहीं बना रहीं, अपना ब्रांड और बाजार भी चला रहीं
स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर, दूसरी महिलाओं को भी दे रहीं रोजगार
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
ग्रेटर नोएडा। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में इस बार महिला उद्यमिता की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसमें महिलाएं केवल कारीगर नहीं, बल्कि उद्यमी, ब्रांड मैनेजर और बाजार विस्तार की रणनीतिकार बनकर उभर रही हैं। मेरठ से गाजियाबाद, बुलंदशहर से सहारनपुर तक पहुंची महिलाओं ने अपने हुनर को कारोबार में बदला है और अब उत्पाद तैयार करने से लेकर उनकी ब्रांडिंग, बिक्री, ग्राहक तलाशने और नए बाजार तक पहुंच बनाने की जिम्मेदारी खुद संभाल रही हैं।
शौक से शुरू हुआ सफर, कारोबार तक पहुंचा

गाजियाबाद के बजरिया की अंजली की कहानी इसकी मिसाल है। चित्रकारी के शौक को उन्होंने अंजली क्रिएशन के जरिए कारोबार का रूप दिया। जिला ग्रामोद्योग विकास से ऋण लेकर सादे कपड़ों पर चित्रकारी से शुरुआत करने वाली अंजली के उत्पाद अब बाजार में 10 हजार रुपये तक की कीमत में बिक रहे हैं। कारोबार बढ़ा तो इसका लाभ सिर्फ उनके परिवार तक सीमित नहीं रहा, वह सात अन्य महिलाओं को नियमित रोजगार भी दे रही हैं।

मेरठ के कंकरखेड़ा की हरप्रीत कौर अपनी फर्म सॉल फॉर अर्थ के माध्यम से पीतल की कलाकृतियां और ट्रॉफियां लेकर ट्रेड शो में पहुंची हैं। उनके मुताबिक बड़े मंच पर उत्पादों की प्रस्तुति से उन्हें नए बाजार और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंच बनाने का अवसर मिल रहा है।
हुनर से आगे बढ़कर बना ब्रांड

गाजियाबाद के वसुंधरा की प्रतिभा त्यागी प्रतिभा डिजाइनर हब के जरिए हैंडमेड सूट, दुपट्टे, लहंगे और जूट बैग जैसे उत्पादों को बाजार से जोड़ रही हैं। उनके लिए ट्रेड शो सिर्फ बिक्री का स्थान नहीं, बल्कि नए ग्राहक, नए कारोबारी संपर्क और बाजार विस्तार का प्लेटफॉर्म है।
13 महिलाओं का समूह, एक साथ आत्मनिर्भरता की राह

बुलंदशहर के नंगला गोविंदपुर की सितारा आजीविका स्वयं सहायता समूह का संचालन करती हैं। उनके समूह से 13 महिलाएं जुड़ी हैं। बेडशीट समेत विभिन्न उत्पाद तैयार कर समूह की महिलाएं अपनी आय का साधन विकसित कर रही हैं। सितारा के मुताबिक स्वयं सहायता समूह ने महिलाओं को एक साथ काम करने, उत्पादन बढ़ाने और बाजार से जुड़ने का रास्ता दिया है।

सहारनपुर के नांगल क्षेत्र की सितारा भी हस्तशिल्प उत्पादों के साथ ट्रेड शो में पहुंची हैं। वह चलोरी स्वयं सहायता समूह का संचालन करती हैं और लगातार चौथी बार नोएडा के ट्रेड शो में भाग ले रही हैं। उनके अनुसार इस तरह के मंच ने स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों को व्यापक बाजार और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंचाने का अवसर दिया है।
सबसे बड़ा बदलाव: महिला अब ‘मेकर’ नहीं, ‘मार्केट लीडर’
इन कहानियों को जोड़कर देखें तो तस्वीर साफ है। महिलाओं की भूमिका अब केवल उत्पाद बनाने तक सीमित नहीं रह गई है। वे उत्पाद की कीमत तय करने, उसकी प्रस्तुति और ब्रांडिंग, ग्राहक से संवाद, बिक्री और नए बाजार की तलाश तक कारोबार की पूरी श्रृंखला में सक्रिय हैं।
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में दिखाई दे रही इन महिला उद्यमियों की कहानी यह भी बताती है कि स्वयं सहायता समूह और स्थानीय हुनर जब बाजार से जुड़ते हैं तो उनका प्रभाव व्यक्तिगत आय से आगे बढ़कर रोजगार सृजन तक पहुंचता है। एक महिला के आत्मनिर्भर बनने के साथ दूसरी महिलाओं के लिए भी काम के अवसर पैदा हो रहे हैं।
