October 16, 2026
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डाय़ट : 200 सेवारत अध्यापकों को दिया गया पांच दिवसीय प्रशिक्षण

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मेंटल स्किल विकसित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए अनेकों रोचक गतिविधियां अध्यापकों से कराईं

गाजियाबादः- राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की रुपरेखा के अनुरूप जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा आयोजित जीवन कौशल प्रशिक्षण के दोनों बैच का सकुशल समापन हो गया। जिले भर के 200 सेवारत अध्यापकों को दिए जाने वाले इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन द्वारा परिभाषित 10 जीवन कौशलों को छात्रों, शिक्षकों एवं अभिभावकों के जीवन में परिलक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।

डायट के प्रधानाचार्य एवं उप शिक्षा निदेशक जितेंद्र कुमार मलिक के निर्देशन में आयोजित इस प्रशिक्षण में वरिष्ठ प्रवक्ता व प्रशिक्षण के समन्वयक सुधीर जायसवाल व सह समन्वयक नंद किशोर ने सीखे गए कौशलों को अपने जीवन में भी उतारने का अध्यापकों से आह्वान किया। उन्होंने बताया कि जीवन कौशल वास्तव में सार्थक और सकारात्मक रुप से जीने की एक कला है जो जीवन पर्यंत चलती रहती है। इस दौरान स्टेट रिसोर्स ग्रुप की सदस्या और मुख्य संदर्भ दाता डॉ. विनीता त्यागी ने अध्यापकों को प्रशिक्षण देते हुए लाइफ स्किल डेवलप करने के टिप्स दिए। उन्होंने मेंटल स्किल विकसित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए अनेकों रोचक गतिविधियां अध्यापकों से कराईं।

संदर्भ दाताओं ने आत्म जागरूकता, समस्या समाधान, भावना व तनाव प्रबंधन, किसी की आलोचना के स्थान पर समालोचना और अपने संप्रेषणों का सही प्रयोग करने को ही जीवन की कुशलता बताया। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान के वरिष्ठ प्रवक्ता और प्रशिक्षण के समन्वयक सुधीर जायसवाल ने कहा कि इस प्रशिक्षण में मुख्य रुप से छात्रों, अभिभावकों और अध्यापकों के जीवन में कुशलताओं को उभारने के लिए डब्ल्यूएचओ द्वारा परिभाषित जीवन के 10 कौशल अध्यापकों के साथ साझा किए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न प्रकार की गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों का ध्यानाकर्षण लक्ष्य की ओर कराया गया है। जायसवाल ने आशा व्यक्त की कि अध्यापक इस प्रशिक्षण के बाद पूर्व प्राथमिक, प्राथमिक और जूनियर हाई स्कूल स्तर के बच्चों तक भी जीवन कौशल के ये लक्ष्य कुशलता पूर्वक पहुंचा सकेंगे। इन जीवन कौशलों को अपने जीवन में उतारने के बाद व्यक्ति साहसी और आत्मजागरूक बंद सकेगा। उनका मानना था कि जिले भर के 200 स्कूलों की अध्यापक अपनी मासिक संकुल बैठकों में अध्यापकों के साथ इस प्रशिक्षण का फॉलो अप करेंगे।

इस प्रशिक्षण की विशेषता यह है कि इसमें छात्रों के साथ ही शिक्षकों और अभिभावकों को भी इस प्रशिक्षण का केंद्र बिंदु बनाया गया है। संदर्भ दाताओं डॉ० मुहम्मद सलीम, अनीता यादव, शिववती पांडे, गीतांजलि सक्सेना, अंशुमान भारद्वाज और अमित चौधरी ने अध्यापकों को अच्छे श्रोता बनने, लिखने की आदत डालने और लगातार फीडबैक देते रहने के लिए भी प्रेरित किया। मुझे पहचानो- मैं हूं कौन?, बाल संसद, गाए गीत खुशी के, गुब्बारा गतिविधि, रैपिड फायर और हमारे कर्तव्य और अधिकार जैसी लघु नाटिकाओं और गतिविधियों ने प्रतिभागियों का ही नहीं वरन अधिकारियों का भी सार्थक मनोरंजन किया।

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