September 21, 2026
[t4b-ticker]

कांशीराम की पुण्यतिथि से मायावती की ‘रीसेट पॉलिटिक्स’ की शुरुआत: सपा पर हमला, योगी पर भरोसे के संकेत!

0

 

बसपा सुप्रीमो का नया राजनीतिक संतुलन

भाजपा से दूरी नहीं, सपा से टकराव

2027 से पहले दलित वोट बैंक को साधने की तैयारी

NEWS1UP

भूमेश शर्मा 

लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की रैली ने उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर मायावती की वापसी के संकेत दिए हैं। कांशीराम की पुण्यतिथि के मौके पर आयोजित इस रैली में मायावती ने जहां समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा हमला बोला, वहीं योगी आदित्यनाथ सरकार की अप्रत्याशित प्रशंसा कर यह जताया कि वे अब एक नए राजनीतिक संतुलन की तलाश में हैं। 

सपा पर हमला, भाजपा पर संयमित रुख

मायावती ने अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी पर “दोहरा चरित्र” अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने याद दिलाया कि बसपा शासन में जब कासगंज जिले का नाम कांशीराम नगर रखा गया था, तो सपा सरकार ने सत्ता में आते ही उसका नाम बदल दिया। उन्होंने कहा, “जब सपा सरकार में होती है, तब न उन्हें PDA याद आता है, न कांशीराम जी।”

यह बयान न केवल सपा के खिलाफ राजनीतिक हमले का हिस्सा है, बल्कि यह दलित मतदाताओं को यह याद दिलाने का प्रयास भी है कि बसपा ही कांशीराम की असली विरासत की वाहक है। इसके विपरीत, मायावती ने योगी सरकार को “सपा जैसी नहीं” बताया, जो भाजपा के प्रति उनके सावधानीपूर्वक अपनाए गए सॉफ्ट टोन को दर्शाता है।

‘रीसेट मोड’ में मायावती

पिछले कुछ वर्षों में बसपा का जनाधार तेजी से घटा है। दलित–मुस्लिम समीकरण, जो कभी बसपा की ताकत हुआ करता था, अब सपा और भाजपा के बीच बंट चुका है। ऐसे में मायावती की यह रैली पार्टी के भीतर ऊर्जा भरने की कोशिश मानी जा रही है।

कांशीराम स्मारक में लाखों समर्थकों की मौजूदगी बसपा के लिए साईकोलॉजिकल बढ़त का काम कर सकती है। लंबे समय से निष्क्रिय पड़े कार्यकर्ताओं के लिए यह संकेत है कि पार्टी अब पुनर्गठन के चरण में प्रवेश कर रही है।

बदलते सियासी समीकरणों की झलक

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति में बसपा का यह “रीसेट” कदम अहम माना जा रहा है। मायावती अब न तो भाजपा विरोधी खेमे में पूरी तरह शामिल हैं, न ही किसी गठबंधन की राजनीति में दिलचस्पी दिखा रही हैं।
उनका लक्ष्य बिलकुल साफ है, दलित वोट बैंक को दोबारा सक्रिय करना और खुद को तीसरे विकल्प के रूप में पुनः स्थापित करना।

कांशीराम की पुण्यतिथि पर बसपा सुप्रीमो ने संकेत देने की कोशिश की है कि वे अब भी खेल से बाहर नहीं हैं, बस अपने राजनीतिक समय का इंतज़ार कर रही हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

error: Content is protected !!