भाई की हत्या से शुरू हुआ बदले का सिलसिला, जो अंत में उसके अपने ही खून से खत्म हुआ
रूबी, फाइल फोटो
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। राजनगर एक्सटेंशन की पॉश सोसाइटी अजनारा इंटीग्रिटी की बीती 14 अक्टूबर की सुबह एक खौफनाक सन्नाटे में तब्दील हो गई, जब एक पति ने अपनी पत्नी को 11 साल की बेटी के सामने गोली मार दी। लेकिन यह कहानी किसी मामूली पति-पत्नी के झगड़े की नहीं, बल्कि पांच साल पुराने एक खून और बदले की आग से जुड़ी है, जिसने आखिरकार पूरे परिवार को तबाह कर दिया।
शुरुआत: जब रूबी ने अपने भाई की लाश देखी
साल 2019, अप्रैल का महीना, मोदीनगर के तिबड़ा रोड पर दीपेन्द्र उर्फ टिप्पन की हत्या कर दी गई थी। रूबी के लिए यह सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि जिंदगी का सबसे बड़ा दर्द था। वह हर दिन पुलिस के दरवाज़े खटखटाती, अफसरों से गुहार लगाती, लेकिन जब अक्षय सांगवान, उसके भाई का हत्यारा जमानत पर रिहा हुआ, तो रूबी के भीतर कुछ टूट गया।
या तो उसे मारो, या मुझे छोड़ दो: रूबी की सौगंध
पुलिस रिकॉर्डस बताते हैं कि रूबी ने अपने पति विकास सहरावत के सामने शर्त रखी-
“या तो मेरे भाई के कातिल को सजा दिलाओ, या फिर मुझे तलाक दे दो।”
विकास ने पत्नी का बदला पूरा करने का वादा किया। उसने अपनी सास के नाम पर दर्ज डेढ़ बीघा जमीन बेची, पैसे जुटाए और योजना बनी, अक्षय सांगवान की हत्या की। लेकिन किस्मत ने खेल खेला, हत्या से छह दिन पहले ही विकास पुलिस के हत्थे चढ़ गया। तब रूबी ने खुद मोर्चा संभाला और अक्षय हत्याकांड को अंजाम तक पहुंचाया। इसी पल से, वह एक “बहन जो इंसाफ चाहती थी” से “महिला गैंगस्टर” बन गई।
प्यार, बदला और अपराध: जोड़े की अंधेरी दुनिया
अक्षय की हत्या के बाद रूबी और विकास दोनों पर गैंगस्टर ऐक्ट में केस दर्ज हुआ। दोनों समाज से कट गए, पड़ोसियों से बातचीत बंद कर दी, और धीरे-धीरे जिंदगी एक जाल बन गई। विकास बेरोज़गार, चिड़चिड़ा और संदिग्ध जीवन जी रहा था। रूबी में अब सिर्फ नियंत्रण और बदले की प्रवृत्ति बची थी।
मंगलवार की सुबह: जब गुस्से ने सब खत्म कर दिया
घटना वाले दिन विकास ने पासपोर्ट मांगा, मामूली बात पर झगड़ा शुरू हुआ। लेकिन उस झगड़े का अंजाम कोई नहीं सोच सकता था। गुस्से में आगबबूला विकास ने रिवॉल्वर उठाई और रूबी को गोली मार दी। 11 साल की बेटी सब देखती रही… और दूसरी बेटी स्कूल में थी। गोलियों की आवाज़ ने पॉश सोसाइटी के सन्नाटे को चीर दिया।
पुलिस का बयान:
एसीपी उपासना पांडेय बताती हैं कि प्रथम दृष्टया यह पारिवारिक झगड़ा प्रतीत होता है। पुलिस ने कहा है कि विकास सहरावत की तलाश में टीमें लगी हुई हैं और शीघ्र ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। मामले की हर अहम बारीकी की जांच जारी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतज़ार किया जा रहा है।
सोसाइटी का रुख और सुरक्षा:
अजनारा इंटीग्रिटी एओए के अध्यक्ष अनुज चौधरी ने बताया कि घटना की पहली सूचना उन्हें मिली थी। उनके मुताबिक विकास मोटरसाइकिल पर सोसाइटी में दाखिल हुआ था, और बाइक पर सोसाइटी का स्टीकर लगा हुआ था। अनुज ने कहा कि रूबी और उसका परिवार सोसाइटी में किसी से घुलते नहीं थे, ऐसा प्रतीत होता था कि वे बस “समय काट रहे” हों। उन्होंने कहा कि सोसाइटी में थ्री-टायर सिक्योरिटी है और अब यह और मजबूत किया जाएगा; साथ ही सोसाइटी में वे लोग जिनके पास हथियार हैं, उनकी लिस्ट तैयार कर पुलिस को दी जाएगी।
मां मर गई, पिता जेल जाएगा, अब बेटियां कहां जाएंगी ?
रूबी की मां मोदीनगर से दौड़ी चली आईं और दोनों नातिनों को अपने साथ ले गईं। लेकिन उनका सवाल अभी भी गूंज रहा है-
“इन मासूम बेटियों का क्या कसूर था ?”
मां की मौत और पिता का जेल जाना, उन बच्चों की मासूमियत पर एक ऐसा दाग छोड़ गया है जो शायद जिंदगीभर नहीं मिटेगा।
एक ‘रिवेंज ट्रैजेडी’ जो अपने ही खून में डूब गई
रूबी ने इंसाफ की लड़ाई से शुरुआत की थी, लेकिन रास्ता ऐसा चुना जिसने उसे खुद अपराधी बना दिया। अंत में न इंसाफ बचा, न इंसानियत। अब पुलिस यह जांच रही है कि विकास का हथियार लाइसेंसी था या अवैध, लेकिन सवाल बड़ा है- क्या बदले की आग कभी किसी का सचमुच इंसाफ कर पाती है?
“रूबी मरी नहीं, एक कहानी खत्म हुई — जो इंसाफ से शुरू हुई और खून पर खत्म हुई।”