सेवियर ग्रीनिसले AOA चुनाव पर कोर्ट की रोक के बाद भी निर्वाचन अधिकारी मौन, 23 अगस्त को चुनाव होगा या नहीं ?
वोटर लिस्ट से एओए अध्यक्ष का नाम हटाने पर उठे सवाल
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। क्रॉसिंग रिपब्लिक स्थित सेवियर ग्रीनिसले अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) के प्रस्तावित चुनाव को लेकर विवाद अब न्यायालय पहुंच गया है। सिविल जज (जूनियर डिवीजन) दिवांशु सैनी ने 20 अगस्त 2026 को अंतरिम आदेश जारी कर 23 अगस्त को प्रस्तावित चुनाव पर रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि विवादित मतदाता सूची के आधार पर निर्धारित चुनाव या उसकी किसी स्थगित तारीख पर चुनाव नहीं कराया जाएगा, जब तक अगला आदेश जारी नहीं होता।
हालांकि, चुनाव से ठीक एक दिन पहले तक नामित निर्वाचन अधिकारी कौशल देव ने चुनाव को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की है। उनका कहना है कि अदालत का आदेश मिल चुका है, लेकिन चुनाव कराया जाए या नहीं, इस पर शासकीय अधिवक्ता से सलाह ली जा रही है। राय मिलने के बाद ही आगे का निर्णय होगा।
एक नाम हटाने से शुरू हुआ विवाद

विवाद की शुरुआत मतदाता सूची से हुई। निर्वाचन अधिकारी ने वर्तमान AOA अध्यक्ष विशाल सिंह भदौरिया का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया। उनका तर्क है कि फ्लैट की रजिस्ट्री में विशाल सिंह को-ओनर हैं, इसलिए उन्हें मतदाता सूची में शामिल नहीं किया जा सकता।
विशाल सिंह ने इस निर्णय को सिविल कोर्ट में चुनौती दी। उनका तर्क है कि 2 नवंबर 2024 को पिछले चुनाव (10 नवंबर 2024) के दौरान तत्कालीन नामित निर्वाचन अधिकारी रिचा चौधरी ने उन्हें शेयर सर्टिफिकेट जारी किया था। ऐसे में सवाल है कि पूर्व चुनाव प्रक्रिया में जारी दस्तावेज के बावजूद इस बार उनका नाम किस आधार पर हटाया गया ?
कोर्ट ने माना, सवाल विचारणीय

न्यायालय ने उपलब्ध हिस्सेदारी प्रमाणपत्रों, पूर्व की मतदाता सूची और अन्य अभिलेखों पर विचार करते हुए प्रथम दृष्टया इस प्रश्न को विचारणीय माना कि यदि हिस्सेदारी प्रमाणपत्र में नाम प्रथम स्थान पर दर्ज है, तो उसे मतदाता सूची से हटाने का आधार क्या था ?
अदालत ने यह भी विचारणीय माना कि यह कार्रवाई गलत अथवा चयनात्मक तरीके से तो नहीं की गई।
अब शेयर सर्टिफिकेट पर भी उठेगा सवाल
आगे की न्यायिक कार्रवाई में एक और अहम सवाल सामने आ सकता है, क्या शेयर सर्टिफिकेट जारी करना नामित निर्वाचन अधिकारी के अधिकार क्षेत्र में आता है ? यदि 2 नवंबर 2024 को तत्कालीन नामित निर्वाचन अधिकारी रिचा चौधरी ने विशाल सिंह भदौरिया को शेयर सर्टिफिकेट जारी किया था, तो उसकी वैधानिक स्थिति और उसे जारी करने के अधिकार पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।
यही बिंदु आगे चलकर पूरे मामले का निर्णायक पहलू बन सकता है। इससे यह भी स्पष्ट हो सकता है कि वर्तमान निर्वाचन अधिकारी द्वारा भदौरिया का नाम मतदाता सूची से हटाने का निर्णय कितना वैध है।
नजर 23 अगस्त और अगले कदम पर
अदालत ने साफ कहा है कि 23 अगस्त को निर्धारित चुनाव अथवा उसकी किसी स्थगित तारीख पर चुनाव आयोजित या संचालित नहीं किया जाएगा, जब तक न्यायालय कोई अगला आदेश जारी नहीं करता। इसके बावजूद खबर लिखे जाने तक निर्वाचन अधिकारी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि चुनाव औपचारिक रूप से स्थगित किया जा रहा है या नहीं। उनका कहना है कि शासकीय अधिवक्ता से राय ली जा रही है।
मामले की अगली सुनवाई 8 सितम्बर 2026 को होगी। अब सवाल सिर्फ चुनाव की तारीख का नहीं है। सवाल यह है कि वोट कौन देगा, मतदाता सूची किस आधार पर बनेगी, पुराने शेयर सर्टिफिकेट की वैधानिक स्थिति क्या होगी और निर्वाचन अधिकारी की अधिकार-सीमा आखिर कितनी है ?
