October 20, 2026
[t4b-ticker]

27वीं मंजिल से मौत: प्रतीक ग्रैंड में पहले भी हादसे, फिर भी सुरक्षा के सवाल कायम

0
P6

27वीं मंजिल से वैभव की मौत के बाद फिर उठे सुरक्षा पर सवाल 

निवासियों का दावा: टावरों के बीच खुले हिस्सों को सुरक्षित करने की बिल्डर से कई बार मांग, लेकिन नहीं हुई सुनवाई

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

गाजियाबाद। सिद्धार्थ विहार की प्रतीक ग्रैंड सोसायटी में 24 वर्षीय पीएचडी छात्र वैभव सिंह की 27वीं मंजिल से गिरकर मौत हो गई। वैभव राजस्थान के जोधपुर का रहने वाला था और दिल्ली के दीनदयाल उपाध्याय कॉलेज से पीएचडी की पढाई कर रहा था। वह एक सप्ताह पहले ही सोसाइटी में रहने वाली अपनी बुआ के पास आया था। वैभव सिंह की मौत ने एक बार फिर सोसायटी की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि पुलिस फिलहाल मामले की प्रथमदृष्टया आत्महत्या के एंगल से जांच कर रही है, लेकिन घटना ने सोसायटी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुराने सवाल भी फिर सामने ला दिए हैं। सवाल इसलिए भी गंभीर है क्योंकि निवासियों के मुताबिक यह पहला हादसा नहीं है। 

इसी टावर के सामने गिरकर वैभव की मौत हुई

करीब चार-पांच वर्ष पहले बालकनी से गिरकर दो बच्चों की मौत की बात सामने आई थी। इसके बाद एक महिला की गिरकर मौत की घटना का भी जिक्र निवासी करते हैं। हर घटना के बाद सुरक्षा को लेकर चिंता जताई गई, लेकिन अब फिर वही सवाल है कि क्या पिछले हादसों के बाद सुरक्षा व्यवस्था में स्थायी सुधार हुआ ?

प्रत्येक फ्लोर पर सुरक्षा के लिए बिल्डर द्वारा मामूली सी ऊंचाई की दीवारें बनाई गई हैं।

कुछ निवासियों का कहना है कि टावरों के बीच कई हिस्से काफी खुले हैं। इन स्थानों को सुरक्षित करने के लिए बिल्डर से कई बार आग्रह किया गया, लेकिन उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। निवासियों के मुताबिक कुछ खुले हिस्से और कम ऊंचाई वाली दीवारें खासकर बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा करती हैं।

प्रतीक ग्रैंड सिटी AOA के सचिव और निर्वाचित बोर्ड सदस्य उपेंद्र गुप्ता कहते हैं कि हाईराइज में खुले स्थान अपने आप में गंभीर जोखिम पैदा करते हैं। उनके मुताबिक इन जगहों की सुरक्षा को लेकर लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है।

उपेंद्र का कहना है कि-

उपेंद्र गुप्ता

“हाईराइज में खुले स्थान बेहद जोखिम वाले होते हैं। इनसे जुड़े सुरक्षा खतरे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। प्रतीक ग्रैंड सिटी AOA की ओर से भी इस चिंता को सामने रखा गया है। वर्तमान में सोसायटी से भारी मेंटेनेंस राशि वसूलने वाला प्रबंधन ही पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है। हमारी मांग है कि बिल्डर इस सुरक्षा चिंता को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कदम उठाए।”

उपेंद्र गुप्ता के मुताबिक प्रतीक ग्रैंड में करीब 24 टावर हैं और अधिकांश 28-29 मंजिल ऊंचे हैं। उनका कहना है कि लिफ्ट के सामने और टावरों के बीच कुछ स्थानों पर भी सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।

ऐसे में सवाल सीधे बिल्डर प्रबंधन की जवाबदेही पर उठता है। यदि निवासियों का दावा है कि संभावित जोखिम वाले खुले हिस्सों को सुरक्षित करने की मांग पहले भी की गई थी, तो यह जानना जरूरी है कि उन शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई और क्यों।

वहीं आवास विकास की भूमिका भी सवालों के घेरे में आती है। क्या ऐसे गंभीर हादसों के बाद प्राधिकरण ने सोसायटी की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की ? क्या सुरक्षा संबंधी शिकायतों पर कोई निरीक्षण या अनुपालन जांच हुई ?

हालांकि वैभव की मौत के लिए फिलहाल किसी पक्ष की जिम्मेदारी तय नहीं हुई है। इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

अब सवाल कार्रवाई का है

किसी भी घटना को खुला निमंत्रण देते खुले फ्लैट

निवासियों का कहना है कि हर हादसे के बाद सुरक्षा पर चर्चा होती है, लेकिन समय बीतने के साथ मामला ठंडा पड़ जाता है। अब जरूरत सिर्फ आश्वासन की नहीं, बल्कि टावरों के बीच खुले हिस्सों, बालकनी, पैरापेट, रेलिंग और बच्चों की पहुंच वाले संवेदनशील स्थानों की तत्काल सुरक्षा समीक्षा की है। क्योंकि 28-29 मंजिल की ऊंचाई पर एक छोटी सी सुरक्षा कमी भी बहुत बड़ी कीमत मांग सकती है।

वैभव की मौत की जांच अपनी जगह है। लेकिन अब सवाल यह है, जिन जोखिमों की ओर निवासी पहले ही इशारा कर चुके थे, उन्हें दूर करने के लिए बिल्डर और संबंधित प्राधिकरण ने आखिर क्या किया ?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

error: Content is protected !!