साँस लेना हुआ मुश्किल: देश का सबसे प्रदूषित शहर बना नोएडा, गाजियाबाद का भी बुरा हाल !
देश का सबसे प्रदूषित शहर बना नोएडा, AQI पहुँचा 318 के पार
धुंध के नीचे दम तोड़ती हवा
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
गौतमबुद्ध नगर/गाजियाबाद। नोएडा में बीते बुधवार को वायु गुणवत्ता ने खतरनाक मोड़ ले लिया। 24 घंटे का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 318 दर्ज हुआ, जो इस सीज़न का पहला “बहुत ख़राब” स्तर है। यह पूरे देश में दिनभर का सबसे ख़राब AQI भी रहा। जनवरी 4 के बाद यह पहली बार है जब शहर की हवा इतनी ज़हरीली हुई है। सुबह से शाम तक पूरे शहर पर धुंध की परत छाई रही। नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे और सेक्टर-7X इलाकों में हवा में धूल और धुएं का घनत्व सबसे अधिक दर्ज किया गया।
हर तरफ चिंता की लहर: स्थानीयों के तेज़, दिल तोड़ने वाले बयान
संजीव प्रेमी (किसान, ग्रेटर नोएडा):
“कुछ साल पहले खुले खेत-मैदान प्रदूषण से दूर माने जाते थे, पर अब सुबह-सुबह यहां भी प्रदूषित धुंध रहती है, यह बेहद चिंताजनक है। अगर खुले मैदान ही प्रदूषण की चपेट में आ जाएँ, तो सैक्टरों में रहने वालों का क्या होगा?”
सुधीर वत्स (दादरी, क्रिकेट ग्राउंड संचालक):
“पहले सुबह का वक़्त ताज़ा हवा में घूमने के लिए सबसे अच्छा होता था। अब मैदान में पहुंचते ही घुटन और आँखों में चुभन महसूस होती है। फैक्ट्रियों को खुले इलाकों में अनुमति दे दी जाती है, पर पॉल्यूशन डिपार्टमेंट का नियंत्रण नगण्य है।”
मोहित शुक्ला (गौर ग्रीन्स सिटी, गाज़ियाबाद):
“हमारी सोसायटी नोएडा–दिल्ली बॉर्डर पर है, प्रदूषण की सबसे ज्यादा मार यहीं रहती है। सर्दियों और दिवाली के पास तो यहाँ की हवा इतनी घुटकू हो जाती है कि साँस लेना मुश्किल हो जाता है। इस वक्त मैं सुरक्षा कारणों से वर्क-फ्रॉम-होम पर हूँ, कई नौकरी-पेशा लोग यही कर रहे हैं।”
डॉ आर पी शर्मा (दादरी, स्कूल संचालक):
“जैसे ही हवा खराब होती है, बच्चे खाँसने लगते हैं। स्कूल AQI ‘सीवियर’ होने का इंतजार नहीं करता है, हम पहले एडवाइजरी जारी करते हैं। स्कूल परिसर में बच्चों को अधिक समाये के लिए खुले में न रहने और मास्क का इस्तेमाल करने की हिदायतें रहती हैं।”
इन बयानों में न केवल व्यक्तिगत तक़लीफ़ झलकती है, बल्कि यह एक बड़े समुदाय की चिंता का द्योतक भी है, खुल्ले इलाकों तक प्रदूषण का पहुँचना एक चेतावनी है।
CPCB के आंकड़े बोले: हवा में ज़हर घुल चुका है
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सेक्टर-125 स्टेशन: सुबह 8 बजे हवा में सूक्ष्म कण (PM2.5) की मात्रा 368 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रिकॉर्ड हुई, यानी स्वीकृत सीमा से लगभग 24 गुना ज़्यादा। शाम 4 बजे तक इस स्टेशन का औसत AQI 374 तक पहुँच गया (एक दिन पहले 312 था)।
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PM10 (बड़े धूलकण) का स्तर आधी रात से सुबह 4 बजे के बीच लगभग 500 इकाई प्रति घन मीटर हवा तक पहुँचा।
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सेक्टर-116: सूक्ष्म कणों की मात्रा 357 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रही और औसत AQI 339 तक पहुँचा।
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सेक्टर-1: AQI = 284 | सेक्टर-62: AQI = 283 (दोनों “खराब” श्रेणी में)
ग्रेटर नोएडा और गाज़ियाबाद भी नहीं बचे
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ग्रेटर नोएडा: AQI “मध्यम” से “खराब” श्रेणी में फिसला
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नॉलेज पार्क-V = 283 | नॉलेज पार्क-III = 243
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गाज़ियाबाद: मामूली सुधार पर फिर भी चिंताजनक- औसत AQI = 254
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लोनी = 299 | इंदिरापुरम = 249 | वसुंधरा = 246 | संजय नगर = 220
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दिल्ली: औसत AQI 233 (एक दिन पहले 211)
GRAP लागू: प्रशासन ने उठाया कदम, पर जमीन पर चुनौतियाँ जस की तस
कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) ने GRAP का पहला चरण लागू किया है। नोएडा अथॉरिटी के जीएम एस.पी. सिंह के मुताबिक:
“20 टैंकरों से 63 किमी सड़कों पर ट्रीटेड पानी छिड़काव किया जा रहा है; 12 मैकेनिकल स्वीपर 340 किमी सड़कों की सफाई कर रहे हैं; निर्माण स्थलों पर सख्त निरीक्षण और जुर्माने लागू किए जा रहे हैं।”
ग्रेटर नोएडा में अवैध कचरा फेंकने पर चार ट्रैक्टरों पर 50,000-50,000 रुपए का जुर्माना लगाया गया। फिर भी, खुले मलबे, अनसुलझे निर्माण कार्य और मैनुअल स्वीपिंग जैसे कारक धूल को कम करने में बड़ी बाधा बने हुए हैं।
मौसम का खेल: हवा थमी, प्रदूषण फँसा रहेगा
IITM के अनुसार आज सुबह हैज़ और मिस्ट वाली रही। दोपहर में दक्षिण-पश्चिमी हवाएँ 6–10 किमी/घं तक चलेंगी, पर शाम तक ये 5 किमी/घं से कम रह जाएँगी, मतलब प्रदूषक हवा में तैरते रहेंगे और फैलेंगे नहीं।
स्काइमेट के महेश पलावत ने चेतावनी दी है कि दिवाली के समय हवाएँ और शांत हो सकती हैं, जिससे AQI में और वृद्धि होने की संभावना है।
नागरिकों के लिए सलाह
अल्टरनेट्स अपनाएँ: संभव हो तो सार्वजनिक परिवहन या कैब साझा करें, पब्लिक नीति के साथ नागरिक सहभागिता ज़रूरी है।
स्कूल और स्वास्थ्य सतर्कता: बच्चों और बुजुर्गों को बाहर भेजने से पहले एयर क्वालिटी चेक करें, खाँसी या साँस लेने में तकलीफ़ पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
निर्माण-साइट नियंत्रण: निर्माण कंपनियों पर सख्त नियम लागू हों, मलबा ढँका हो, पानी छिड़का जाए और धूल न उड़े।
ग्रीन दीवाली: पटाखों के विकल्प अपनाएँ, दीप, रोशनी और सामुदायिक कार्यक्रम।
स्थानीय निगरानी और सूचना: नागरिकों के मोबाइल पर AQI अलर्ट की व्यवस्था, ताकि समय रहते घर से बाहर निकलने या मास्क पहनने का निर्णय लिया जा सके।
अब हवा को बचाना है, हम सबकी ज़िम्मेदारी
स्थानीय किसानों, ग्राउंड ऑपरेटरों और सोसायटी निवासियों के दर्द भरे बयानों से साफ पता चलता है: यह सिर्फ शहर का मसला नहीं, यह इलाके-बस्तियों तक फैला हुआ संकट है। प्रशासनिक कदम जरूरी हैं, पर सचमुच बदलाव तभी आएगा जब हर नागरिक, संस्था और उद्योग मिलकर ठोस कदम उठाएँगा।
दिल्ली सहित गाजियाबाद और नोएडा की हवा बीमार है, इसे ठीक करने के लिए ज़रूरी है सामूहिक जागरूकता और त्वरित कार्रवाई।

संजीव प्रेमी (किसान, ग्रेटर नोएडा):
मोहित शुक्ला (गौर ग्रीन्स सिटी, गाज़ियाबाद):
