17.58 लाख से 13.78 लाख चालान: यूपी में एक साल में ट्रैफिक उल्लंघन में बड़ी गिरावट!

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हेल्मेट सबसे बड़ा जोखिम

ओवरस्पीडिंग में सबसे बड़ी राहत

NEWS1UP

विशेष संवाददाता

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सड़कों पर वर्ष 2025 में एक महत्वपूर्ण बदलाव दर्ज किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में परिवहन विभाग द्वारा लगातार चलाए गए सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक जागरूकता अभियानों का असर अब आंकड़ों में साफ दिखाई देने लगा है। बीते वर्ष की तुलना में 2025 में लगभग चार लाख चालान कम दर्ज होना इस बात का संकेत है कि ट्रैफिक नियमों के प्रति आमजन की सोच और व्यवहार में सुधार आया है।

परिवहन विभाग की हालिया समीक्षा बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में जहां 17,58,930 चालान दर्ज हुए थे, वहीं 2025 में यह संख्या घटकर 13,78,919 रह गई। यानी प्रवर्तन की सख्ती के बावजूद उल्लंघन के मामलों में उल्लेखनीय कमी आई। हालांकि इन चालानों के माध्यम से लगभग 454.49 करोड़ रुपये की वसूली की गई, लेकिन विभाग का दावा है कि लक्ष्य राजस्व नहीं, बल्कि दुर्घटनाओं में कमी और सुरक्षित सड़कें हैं।

हेल्मेट अब भी सबसे बड़ी चुनौती

रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में सबसे अधिक चालान दोपहिया चालकों द्वारा हेल्मेट न पहनने पर हुए। कुल 6,32,901 मामलों में कार्रवाई की गई, जो यह दर्शाता है कि जागरूकता बढ़ने के बावजूद हेल्मेट को लेकर लापरवाही अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
इसके अलावा सीट बेल्ट न लगाने के 1,33,189 मामले सामने आए, जबकि 14,535 ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित किए गए। अच्छी खबर यह रही कि ओवरस्पीडिंग के मामलों में भारी गिरावट दर्ज की गई, पिछले वर्ष के 7,77,897 मामलों की तुलना में इस वर्ष यह संख्या घटकर 3,30,171 रह गई।

व्यावसायिक वाहनों पर भी कसा शिकंजा

परिवहन विभाग ने व्यावसायिक वाहनों पर भी सख्त रुख अपनाया। ओवरलोडिंग के 54,923 मामले दर्ज किए गए, वहीं गलत नंबर प्लेट, स्पीड लिमिट डिवाइस न लगाने और माल वाहन से यात्री ढोने जैसे मामलों में भी हजारों चालान किए गए। विशेष चेकिंग अभियानों के तहत अपंजीकृत ई-रिक्शा, अंतरजनपदीय ओवरलोड मालवाहक और बिना नंबर प्लेट वाले डंपर-ट्रकों पर भी कार्रवाई की गई।

2026 की रणनीति: डिजिटल निगरानी और जनभागीदारी

परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2026 में प्रवर्तन के साथ-साथ डिजिटल निगरानी और जन-जागरूकता को और मजबूत किया जाएगा। इसकी शुरुआत 1 जनवरी से राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह के साथ हो चुकी है। इस दौरान परिवहन विभाग, पुलिस, लोक निर्माण, स्वास्थ्य और सूचना विभाग मिलकर प्रदेशव्यापी सघन चेकिंग और जागरूकता अभियान चला रहे हैं।

दोपहिया चालकों के लिए “नो हेल्मेट, नो फ्यूल” जैसे अभियानों को और प्रभावी बनाया जा रहा है, जबकि चिन्हित ब्लैक स्पॉट और हाई रिस्क जोन में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। स्कूलों और कॉलेजों में भी सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

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