योगी सरकार की स्मार्ट पुलिसिंग: ‘यूपी कॉप’ ऐप बना डिजिटल पुलिस स्टेशन!

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50 लाख से अधिक डाउनलोड

घर बैठे एफआईआर से लेकर सत्यापन तक

27 सेवाएं उपलब्ध

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

लखनऊ। योगी आदित्यनाथ सरकार की स्मार्ट पुलिसिंग नीति अब ज़मीन पर आमजन की सुविधा और भरोसे का प्रतीक बनती जा रही है। बीते पौने नौ वर्षों में तकनीक को पुलिसिंग से जोड़ने की जो दूरदर्शी पहल की गई, उसका सबसे सशक्त उदाहरण आज यूपी पुलिस का ‘यूपी कॉप’ एप और सिटीजन पोर्टल है। यह प्लेटफॉर्म प्रदेशवासियों के लिए किसी डिजिटल पुलिस स्टेशन से कम नहीं, जहां नागरिक बिना थाने गए घर बैठे एफआईआर समेत 27 प्रकार की पुलिस सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं।

यूपी कॉप एप ने न सिर्फ पुलिस और जनता के बीच दूरी कम की है, बल्कि सेवा-प्रक्रियाओं को पारदर्शी, तेज़ और जवाबदेह भी बनाया है। इसका प्रत्यक्ष असर यह हुआ है कि थानों के चक्कर लगाने की मजबूरी काफी हद तक खत्म हो गई है और सेवाओं के निस्तारण में लगने वाला समय उल्लेखनीय रूप से घटा है।

50 लाख डाउनलोड, 2.1 करोड़ एफआईआर कॉपी

पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा पुलिसिंग को जनकेंद्रित बनाने की रही है। उसी सोच के अनुरूप टेक्नोलॉजी को सेवा का माध्यम बनाया गया। उन्होंने बताया कि अब तक 50 लाख से अधिक नागरिक यूपी कॉप एप डाउनलोड कर चुके हैं।

एप के जरिए 2.1 करोड़ से ज्यादा एफआईआर की कॉपी डाउनलोड की जा चुकी है, जबकि 7.3 लाख से अधिक लोग खोये सामान की रिपोर्ट ऑनलाइन दर्ज करा चुके हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि डिजिटल पुलिसिंग पर आमजन का भरोसा लगातार मजबूत हुआ है।

एफआईआर से सत्यापन तक: 27 सेवाएं एक क्लिक पर

यूपी कॉप एप के माध्यम से नागरिक ऑनलाइन एफआईआर दर्ज कराने, एफआईआर की प्रति डाउनलोड करने, खोये सामान की रिपोर्ट, चरित्र सत्यापन, किरायेदार सत्यापन, घरेलू सहायक व कर्मचारी सत्यापन जैसी कुल 27 पुलिस सेवाओं का लाभ ले रहे हैं।
एप हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है, जिससे हर वर्ग के लोगों के लिए इसका उपयोग आसान हो गया है।

जहां पहले हफ्ते लगते थे, अब गिने-चुने दिन

डिजिटल प्रणाली का सबसे बड़ा लाभ सेवाओं के निस्तारण में आई तेज़ी है। डीजीपी राजीव कृष्ण के मुताबिक-

  • चरित्र सत्यापन: पहले 8 दिन, अब लगभग 6 दिन

  • किरायेदार सत्यापन: पहले 24–25 दिन, अब करीब 8 दिन

  • कर्मचारी सत्यापन: पहले 13 दिन, अब लगभग 5 दिन

यह बदलाव न सिर्फ प्रशासनिक दक्षता को दर्शाता है, बल्कि नागरिकों के समय और संसाधनों की भी बचत कर रहा है।

सुरक्षा और सुविधा, दोनों का ध्यान

यूपी कॉप एप में रीयल-टाइम नोटिफिकेशन, लोकेशन ट्रैकिंग, एसओएस बटन और मैप पर नजदीकी थाना देखने जैसी आधुनिक सुविधाएं भी जोड़ी गई हैं। आपात स्थिति में ये फीचर्स आमजन के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहे हैं।

जनशिकायत पोर्टल से बढ़ी जवाबदेही

इसके साथ ही योगी सरकार का पब्लिक ग्रीवांस रिव्यू पोर्टल भी पुलिस की जवाबदेही बढ़ाने का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। नागरिक अपनी शिकायतें ऑनलाइन दर्ज करा रहे हैं, जिनकी नियमित समीक्षा और समयबद्ध निस्तारण किया जा रहा है। इससे लोगों में यह भरोसा पैदा हुआ है कि उनकी बात सुनी जा रही है।

पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण कहते हैं कि-

राजीव कृष्ण, DGP, उत्तर प्रदेश

“यूपी कॉप ऐप उत्तर प्रदेश पुलिस का ‘डिजिटल पुलिस स्टेशन’ है, जो नागरिकों की शिकायतों और सेवाओं के त्वरित, पारदर्शी और समयबद्ध निस्तारण की व्यवस्था देता है। टेक्नोलॉजी के माध्यम से हम सेवा-प्रक्रियाओं का मानकीकरण कर रहे हैं, ताकि हर आवेदन पर समान गति, समान पारदर्शिता और निश्चित समय-सीमा सुनिश्चित हो। टेक्नोलॉजी-आधारित जनशिकायत निवारण से पुलिसिंग अधिक जनकेंद्रित और जवाबदेह बन रही है, यही स्मार्ट पुलिसिंग का वास्तविक अर्थ है।”

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