January 12, 2026

नोएडा-गाजियाबाद को चेतावनी: यहाँ हर दिन हवा के साथ उड़ती है सड़कों की मिट्टी और धुएं का गुबार!!

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17 इलाकों की हवा सबसे ज़्यादा खराब

पर्यावरणविद बोले “जनता को भी जागरूक होना पड़ेगा”

NEWS1UP

संवाददाता

नोएडा/गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) ने इस सर्दी के मौसम में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए बड़ी चुनौती की पहचान कर ली है। बोर्ड ने नोएडा और गाजियाबाद में कुल 17 प्रदूषण ‘हॉटस्पॉट चिन्हित किए हैं, जहां लगातार धूल, ट्रैफिक जाम, निर्माण गतिविधियां और खुले में रखे जा रहे निर्माण सामग्रियों के कारण वायु गुणवत्ता बेहद खराब बनी रहती है।

इनमें नोएडा के 10 और गाजियाबाद के 7 इलाके शामिल हैं। दिलचस्प बात यह है कि नोएडा में पिछले साल जितने प्रदूषण हॉटस्पॉट थे, इस बार भी उतने ही हैं, यानी पिछले एक साल की कोशिशों के बावजूद स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।

नोएडा के 10 प्रदूषण हॉटस्पॉट

UPPCB के नोएडा क्षेत्रीय अधिकारी रीतेश तिवारी के मुताबिक, सेक्टर 116/115/7X, सेक्टर 150–158, यमुना पुष्ता व पुष्ता रोड, नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे, दादरी रोड्स, सेक्टर 62–104 स्टेच, सेक्टर 62, सेक्टर 50/51, एमिटी यूनिवर्सिटी परिसर, और सेक्टर 140–143 को सबसे अधिक प्रदूषित पाया गया है। इन इलाकों में सड़क धूल, फ्लड प्लेन गतिविधियां, निर्माण मलबा, और खुले में पड़े बिल्डिंग मटीरियल प्रदूषण के मुख्य स्रोत हैं। बोर्ड की योजना है कि इन जगहों पर मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग, नियमित पानी का छिड़काव और निर्माण स्थलों की निगरानी जैसे कदम उठाए जाएं।

गाजियाबाद के 7 प्रदूषण हॉटस्पॉट

गाजियाबाद में चिन्हित हॉटस्पॉट मोहन नगर, राज नगर एक्सटेंशन, लोनी, भोपुरा-दिल्ली बॉर्डर, सिद्धार्थ विहार/कानवानी पुष्ता रोड, विजय नगर/साउथ साइड जीटी रोड इंडस्ट्रियल एरिया और लाल कुआं हैं क्षेत्रीय अधिकारी अंकित कुमार के अनुसार “इन स्थानों पर विशेष निगरानी की जाएगी और प्रदूषण नियंत्रण के लिए व्यापक अभियान चलाया जाएगा। पिछले साल छह हॉटस्पॉट थे, अब संख्या बढ़कर सात हो गई है।

थोड़ा सुधार, लेकिन चुनौतियां बरकरार

UPPCB के आंकड़ों के मुताबिक, बीते दो वर्षों में औसत वार्षिक AQI में मामूली सुधार दर्ज किया गया है-

  • गाजियाबाद का AQI 2022 में 206 था, जो 2024 में घटकर 176 पर आया।

  • नोएडा का AQI 199 से घटकर 184 पर पहुंचा।

हालांकि, गुरुवार को तीनों शहरों की वायु गुणवत्ता “खराब (Poor)” श्रेणी में रही, गाजियाबाद 252, ग्रेटर नोएडा 280 और नोएडा 276एक दिन पहले तक ये तीनों शहर “बहुत खराब ” श्रेणी में थे।

राष्ट्रीय रैंकिंग में सुधार की झलक

वायु गुणवत्ता सुधार प्रयासों का असर राष्ट्रीय स्तर पर जरूर दिखा है-

  • स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2025 में गाजियाबाद ने 10 लाख से अधिक आबादी वाले 48 शहरों में 12वां स्थान हासिल किया।

  • वहीं, नोएडा ने 10 लाख से कम आबादी वाले 42 शहरों में 9वां स्थान पाया।

ग्रीनमैन बोले-  समस्या व्यापक, जनता की जागरूकता आवश्यक

ग्रीनमैन विजयपाल बघेल

ग्रीनमैन विजयपाल बघेल कहते हैं कि प्रदुषण बोर्ड तभी चेतता है जब ग्रेप-4 जैसे सख्त नियम की जरूरत आन पड़ती है। बोर्ड ने अब तक किया क्या इस बात का कोई ठोस जवाब नहीं है, प्रदुषण से निपटने के लिए बोर्ड को दीर्घकालीक योजना बनानी पड़ेगी।

बघेल का यह भी कहना है कि प्रदुषण ने समस्त जीव जगत की सांसों पर संकट खड़ा कर दिया है, इससे निपटने के लिए जनता को भी जागरूक होना पड़ेगा।

अब फोकस ‘ग्राउंड एक्शन’ पर

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस बार सर्दी के मौसम में विशेष अभियान की रूपरेखा तैयार की है-

  • सड़क धूल को कम करने के लिए नियमित सफाई

  • निर्माण स्थलों की निगरानी

  • खुले में मलबा और निर्माण सामग्री रखने पर सख्त कार्रवाई

  • पानी का छिड़काव और धूल नियंत्रण

  • ट्रैफिक पुलिस के सहयोग से भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में वाहन व्यवस्था सुधार

नोएडा और गाजियाबाद की हवा फिलहाल “खराब” श्रेणी में जरूर है, लेकिन प्रशासनिक कोशिशें और जागरूकता बढ़ने से सुधार की संभावना बनी हुई है। प्रदूषण पर अंकुश तभी लगेगा जब उद्योग, निर्माण और ट्रैफिक, तीनों मोर्चों पर संयुक्त जिम्मेदारी के साथ काम होगा।

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