अंत्योदय की भावना से हर नागरिक तक पहुंचे अधिकार और सम्मान: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु
मानव गरिमा की रक्षा को बताया साझा दायित्व

NEWS1UP
विशेष संवाददाता
नई दिल्ली। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) द्वारा राजधानी में आयोजित मानवाधिकार दिवस समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि प्रत्येक नागरिक के अधिकारों और गरिमा की रक्षा करना केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का साझा दायित्व है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण लोकतंत्र में मानवाधिकारों की सुनिश्चितता तभी संभव है जब नागरिक स्वयं संवेदनशील, जागरूक और जिम्मेदार बनें।

अधिकारों और गरिमा की रक्षा हमारा सामूहिक कर्तव्य
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि मानवाधिकारों का वास्तविक अर्थ तभी पूरा होता है, जब समाज के सबसे कमजोर, अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को भी वही सम्मान और अवसर मिलें जो मुख्यधारा के नागरिकों को प्राप्त हैं। उन्होंने कहा कि मानवाधिकार केवल कानूनी शब्द नहीं, बल्कि “मानव गरिमा” से जुड़े मूल्य हैं, जिन्हें संवेदनशीलता, समानता और न्याय के साथ लागू किया जाना चाहिए।
अंत्योदय का सिद्धांत: विकास में अंतिम व्यक्ति को प्राथमिकता
राष्ट्रपति ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय द्वारा प्रतिपादित अंत्योदय के सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के विकास का असली लक्ष्य तब पूरा होगा जब लाभ सबसे अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।
उन्होंने कहा-
“मानवाधिकारों की सुरक्षा का अर्थ है कि समाज के हर तबके, विशेषकर गरीब, वंचित, महिला, बच्चा, युवा, दिव्यांग और बुजुर्ग को समान अवसर और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाए”
2047 तक विकसित भारत के निर्माण में हर नागरिक की भूमिका

अपने वक्तव्य में राष्ट्रपति मुर्मु ने ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प का जिक्र करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में देश तेज़ी से प्रगति करेगा, और इस यात्रा में हर भारतीय की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब नागरिक अधिकारों के प्रति जागरूक होंगे, कर्तव्यों का पालन करेंगे और समाज में एक-दूसरे के सम्मान की रक्षा करेंगे, तभी एक समतामूलक और उन्नत भारत का निर्माण संभव होगा।
एनएचआरसी की भूमिका की सराहना
राष्ट्रपति ने मानवाधिकार आयोग को समाज में जागरूकता बढ़ाने और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए किए जा रहे कार्यों हेतु बधाई दी। उन्होंने कहा कि एनएचआरसी न केवल शिकायतों का समाधान करती है, बल्कि सरकारों और समाज को भी लगातार मार्गदर्शन देती रहती है।
आपको बता दें कि हर वर्ष 10 दिसंबर को विश्वभर में मानवाधिकार दिवस मनाया जाता है। भारत में यह दिवस मानवाधिकारों की रक्षा एवं संवर्धन का संकल्प दोहराने का अवसर है। इस वर्ष का समारोह सामाजिक न्याय, समानता और नागरिक सम्मान पर केंद्रित रहा।
