55 दिन की आज़ादी फिर खत्म: पैन कार्ड विवाद में आज़म खान और बेटे को 7 साल की कैद!
NEWS1UP
संवाददाता
रामपुर। बहुचर्चित दो पैन कार्ड मामले में आखिरकार फैसला आ गया है। एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे तथा पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम को दोषी ठहराते हुए 7 साल की कैद और 50 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। फैसला सुनते ही दोनों को न्यायिक हिरासत में लेते हुए रामपुर जेल भेज दिया गया।
एक ही जेल में रखने पर अब अदालत करेगी फैसला
एडीजीसी संदीप सक्सेना ने बताया कि अदालत ने दोनों आरोपियों को कानून के तहत अधिकतम सजा दी है। उन्होंने कहा कि बचाव पक्ष ने अदालत से आग्रह किया है कि पिता और बेटे को एक ही जेल में रखा जाए। इस पर अब अदालत निर्णय लेगी।
जेल भेजे जाने से पहले मीडिया से बात करते हुए आजम खान ने कहा-
“अदालत का फैसला है, बेहतर है, गुनहगार समझे गए तो सजा सुनाई है।”
क्या है पूरा मामला ?

यह मामला वर्ष 2019 का है, जब वर्तमान में रामपुर शहर से बीजेपी विधायक आकाश कुमार सक्सेना ने सिविल लाइंस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप था कि अब्दुल्ला आजम ने दो अलग-अलग जन्म प्रमाण पत्रों के आधार पर दो पैन कार्ड बनवाए, और समय-समय पर उनका उपयोग भी किया।
आरोप के अनुसार, यह सब कथित रूप से आजम खान के संरक्षण में हुआ। जांच और सुनवाई के बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी पाया।
आकाश सक्सेना ने फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा-
“यह सत्य की जीत है, छह साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद न्याय मिला है।”
55 दिन पहले ही जेल से बाहर आए थे आज़म खान
गौरतलब है कि आजम खान 55 दिन पहले ही सीतापुर जेल से रिहा होकर आए थे। अब इस नए फैसले के बाद उन्हें फिर से जेल जाना पड़ा है। राजनीतिक और कानूनी मोर्चों पर लगातार चुनौतियों का सामना कर रहे आजम खान के लिए यह फैसला एक और बड़ा झटका माना जा रहा है।
फैसले के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल
इस सजा के बाद रामपुर और प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। समर्थक इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहे हैं, जबकि विरोधी पक्ष इसे कानून और न्याय की जीत के रूप में देख रहा है। अदालत के इस निर्णय के बाद दोनों नेताओं की राजनीतिक स्थिति पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं, क्योंकि दोष सिद्ध होने पर उनका चुनाव लड़ना भी प्रभावित हो सकता है।
अब अदालत यह तय करेगी कि पिता-पुत्र को एक ही जेल में रखा जाए या अलग-अलग। साथ ही उनके कानूनी विकल्प जैसे ऊपरी अदालत में अपील की तैयारी भी शुरू कर दी गई है।
