February 9, 2026

पूरी दुनिया देखेगी अयोध्या का भव्य ध्वजारोहण समारोह

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NEWS1UP

विशेष संवाददाता

अयोध्या। रामनगरी में इस वर्ष विवाह पंचमी का पर्व ऐतिहासिक और अविस्मरणीय बनने जा रहा है। भगवान श्रीराम और माता सीता के पावन विवाह दिवस पर रामनगरी दुल्हन की तरह सुसज्जित है। हर मार्ग, हर मोड़, हर घाट को दीपों, पुष्पों और रंग-बिरंगी रोशनियों से सजाया गया है। इस भव्य उत्सव के मुख्य आकर्षण राम मंदिर के शिखर पर दिव्य धर्म ध्वज का स्थापित किया जाना, के लिए जोर-शोर से तैयारियां चल रही हैं।

इस अद्वितीय क्षण के साक्षी स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी होंगे, जिनके हाथों यह प्रतिष्ठित ध्वजारोहण संपन्न होगा।

किस समय होगा ध्वजारोहण ?

शुभ मुहूर्त: सुबह 11:58 से 12:30 बजे तक

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुसार इसी पवित्र काल में प्रधानमंत्री मोदी राम मंदिर के शिखर पर धर्म ध्वज की प्रतिष्ठा करेंगे। यह ध्वजारोहण केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मंदिर की पूर्णता और पूर्ण जाग्रति का प्रतीक माना जा रहा है।

धर्म ध्वज का आध्यात्मिक और शास्त्रीय महत्व

ध्वजा भारतीय संस्कृति में शुभता, ऊर्जा और आध्यात्मिकता का प्रतीक मानी गई है। शास्त्रों के अनुसार-

 दिव्य ऊर्जा का संचार

मंदिर के शिखर पर लहराती ध्वजा से ब्रह्मांडीय और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रवाह होता है, जो पूरे परिसर को सकारात्मकता से भर देता है।

 दैवीय उपस्थिति का संकेत

ध्वजा दर्शाती है कि मंदिर के भीतर विशिष्ट देवशक्ति की स्थापना हो चुकी है। चूंकि शिखर मंदिर का सर्वोच्च बिंदु है, इसलिए ध्वजा देवत्व और ब्रह्मांड के बीच पुल का कार्य करती है।

 पूर्णता का प्रतीक

धर्म ध्वज की स्थापना यह घोषणा करती है कि मंदिर अब पूर्ण रूप से तैयार है और भक्तों के लिए चेतना का केंद्र बन चुका है।

ध्वजा दर्शन का पुण्यफल

धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि मंदिर में लहराते ध्वज के दर्शन करने मात्र से पूरे मंदिर के देवताओं के दर्शन का फल प्राप्त होता है। ध्वजा स्वयं में शक्तिप्रद, पवित्र और कल्याणकारी मानी जाती है।

कैसा होगा राम मंदिर का ध्वज ?

राम मंदिर का धर्म ध्वज अत्यंत विशिष्ट और परंपरा-सम्मत रूप में तैयार किया गया है-

  • रंग: केसरिया (भगवा), जो त्याग, तेज और धर्म का प्रतीक है

  • प्रतीक: सूर्यवंशी परंपरा के अनुरूप ध्वज पर अंकित होगा सूर्य देव का चिन्ह

  • ऊँचाई: 191 फीट ऊँचा भव्य ध्वज

  • अर्थ: यह केवल एक प्रतीक नहीं, बल्कि मर्यादा, धर्म, प्रकाश और विजय की घोषणा है

अयोध्या में उत्सव का वातावरण

विवाह पंचमी पर रामनगरी की छटा देखते ही बन रही है। भजन-कीर्तन, शोभायात्राएँ, पुष्प-सज्जा और दूल्हा-दुल्हन के समान सजे श्रीराम-जानकी मंदिरों ने पूरे शहर को आध्यात्मिक आभा में डूबो दिया है। देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने अयोध्या पहुँच रहे हैं।

25 नवंबर 2025 का यह दिन न केवल रामनगरी के लिए बल्कि पूरे देश के लिए आस्था, संस्कृति और गौरव का स्वर्णिम अध्याय बनने जा रहा है।

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