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नोएडा प्राधिकरण की 221वीं बोर्ड बैठक: घर खरीदारों, पर्यावरण और शहरी नियोजन पर एक साथ बड़े फैसले!

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अटकी रजिस्ट्री, सीवेज ट्रीटमेंट, लिगेसी रियल एस्टेट

और सिटी लॉजिस्टिक प्लान जैसे मुद्दों पर

एक साथ लिए गए अहम जनहितकारी निर्णय

NEWS1UP

भूमेश शर्मा

नोएडा। नोएडा प्राधिकरण की 221वीं बोर्ड बैठक केवल एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रही, बल्कि यह बैठक घर खरीदारों की पीड़ा, पर्यावरणीय सुधार और शहरी व्यवस्था के भविष्य, तीनों मोर्चों पर निर्णायक संदेश लेकर आई। शनिवार को प्राधिकरण सभागार में हुई इस बैठक में जनहित को केंद्र में रखते हुए ऐसे निर्णय लिए गए, जिनका असर आने वाले वर्षों तक नोएडा की शहरी तस्वीर पर दिखेगा।

बैठक की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश के अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त तथा नोएडा प्राधिकरण के अध्यक्ष दीपक कुमार ने की। नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी लोकेश एम., यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी राकेश कुमार सिंह एवं ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सुनील कुमार सिंह बोर्ड रूम से बैठक में शामिल हुए।

ग्रुप हाउसिंग फ्लैट्स: अटकी रजिस्ट्री का रास्ता खुलेगा

बैठक का एक अहम निर्णय उन हजारों फ्लैट खरीदारों से जुड़ा रहा, जो आवासीय समितियों के माध्यम से बने ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स में वर्षों से व्यावहारिक उलझनों का सामना कर रहे हैं। त्रिपक्षीय उप-पट्टा पंजीकरण से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी की अध्यक्षता में 8 सदस्यीय समिति के गठन को मंजूरी दी गई। माना जा रहा है कि यह समिति लंबे समय से फंसे मामलों को गति देने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

सीवेज ट्रीटमेंट पर बड़ा पर्यावरणीय कदम

पर्यावरण संरक्षण के मोर्चे पर भी बोर्ड ने स्पष्ट रुख अपनाया। प्राधिकरण क्षेत्र में सीवेज ट्रीटमेंट के लिए आधुनिक शोधन प्रणाली (एसटीपी) स्थापित करने का निर्णय लिया गया। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर की एजेंसियों से ई-निविदा के जरिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट मांगा जाएगा, जिसमें पांच वर्षों के संचालन और अनुरक्षण की जिम्मेदारी भी शामिल होगी। यह कदम यमुना और हिंडन जैसी नदियों पर पड़ रहे दबाव को कम करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

किसानों और आवेदकों के बीच संतुलन की कोशिश

आवासीय भूखंड योजना 2011-1 (संशोधित 2016) के अंतर्गत कृषक श्रेणी के शेष आवेदकों के लिए ड्रॉ प्रक्रिया को लेकर नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी स्तर की संयुक्त समिति बनाने का निर्णय भी लिया गया। इससे वर्षों से प्रतीक्षा कर रहे पात्र आवेदकों को निष्पक्ष समाधान मिलने की उम्मीद जगी है।

शहर की लॉजिस्टिक व्यवस्था पर अकादमिक नजर

तेजी से बढ़ते नोएडा में ट्रैफिक और माल परिवहन की चुनौतियों को देखते हुए सिटी लॉजिस्टिक प्लान तैयार करने का फैसला लिया गया। इसके लिए स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, नई दिल्ली या आईआईटी रुड़की से प्रस्तुतीकरण लेकर सलाहकार संस्था का चयन किया जाएगा, जो दर्शाता है कि प्राधिकरण अब नीतिगत फैसलों में विशेषज्ञ संस्थानों की भूमिका बढ़ा रहा है।

स्पोर्ट्स सिटी और यूनिफाइड रेगुलेशंस

स्पोर्ट्स सिटी परियोजना से जुड़े मामलों में उच्चतम न्यायालय के आदेशों के अनुपालन की जानकारी बोर्ड को दी गई। सेक्टर-150 स्थित एससी-02/एच एंड आई के लिए सशर्त अधिभोग प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके हैं और आगे की कार्रवाई के लिए आवश्यक निर्देश भी दिए गए।

साथ ही यूनिफाइड रेगुलेशंस-2025 के अंतर्गत वाणिज्यिक, संस्थागत और औद्योगिक प्रावधानों में आंशिक संशोधन को भी मंजूरी दी गई, जिससे निवेश और नियोजन में लचीलापन आने की उम्मीद है।

लिगेसी रियल एस्टेट: आंकड़ों में राहत

बैठक में पुरानी अटकी रियल एस्टेट परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा भी हुई। शासनादेश के तहत चिन्हित 57 परियोजनाओं में से 30 ने 31 दिसंबर 2025 तक नीति का लाभ लिया है। अब तक 872.12 करोड़ रुपये प्राधिकरण में जमा हो चुके हैं, जिससे लगभग 6855 फ्लैट खरीदारों को राहत मिलने का रास्ता साफ हुआ है। फिलहाल 4134 रजिस्ट्रियां पूरी हो चुकी हैं। बोर्ड ने शेष खरीदारों की रजिस्ट्री जल्द पूरी कराने के निर्देश दिए।

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