वित्त मंत्री ने गाजियाबाद में नए सीजीएसटी भवन का उद्घाटन किया: कहा, गलत किया तो खैर नहीं, सही किया तो कोई बैर नहीं!

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ईमानदार करदाता का सम्मान ही नेक्स्टजेन जीएसटी की पहचान बने: निर्मला सीतारमण

NEWS1UP

विशेष संवाददाता

नई दिल्ली / गाजियाबाद। केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को गाज़ियाबाद में नव-निर्मित केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) भवन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने अधिकारियों से संवाद करते हुए कहा कि अब समय है कि “नेक्स्ट जनरेशन जीएसटी” को पारदर्शिता, तकनीक और करदाताओं के सम्मान पर आधारित बनाया जाए। इस अवसर पर शहर में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रही।

सीतारमण ने कहा-

“नेक्स्टजेन जीएसटी को लेकर करदाताओं को एक अलग अनुभव होना चाहिए। उन्हें महसूस होना चाहिए कि सरकार उन्हें सम्मान के साथ देखती है। कुछ लोग बुरे हो सकते हैं, पर सबको शक की नजर से मत देखिए। सहजता और विश्वास ही एक प्रभावी टैक्स सिस्टम की नींव हैं।”

त्योहारी सीजन में रिकॉर्ड बिक्री, ‘मेड इन इंडिया’ को 87% उपभोक्ताओं की पसंद

वित्त मंत्री ने भारत की अर्थव्यवस्था में तेजी के संकेतों की चर्चा करते हुए कहा कि कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष त्योहारी खुदरा बिक्री ₹6.05 लाख करोड़ तक पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक है। इसमें से लगभग 5.4 लाख करोड़ वस्तुओं और 65,000 करोड़ सेवाओं से आए हैं। खास बात यह रही कि 87% उपभोक्ताओं ने ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों को चुना।

वित्त मंत्री ने कहा —

“ये आंकड़े बताते हैं कि हमारी नीतियां असर दिखा रही हैं। जीएसटी दरों में हालिया कटौती ने व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों को राहत दी है।”

1 नवंबर से ‘सरल जीएसटी पंजीकरण योजना’ लागू

भविष्य की योजनाओं की जानकारी देते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि 1 नवंबर से ‘सरलीकृत जीएसटी पंजीकरण योजना’ शुरू की जाएगी। इस योजना के तहत अधिकांश आवेदकों को तीन कार्य दिवसों में स्वत: पंजीकरण मिल जाएगा। उन्होंने बताया कि यह सुधार लगभग 96% नए आवेदकों को लाभ पहुंचाएगा और पूरी प्रक्रिया तकनीक आधारित होगी।

सीतारमण ने अधिकारियों से कहा कि यह व्यवस्था “बिना किसी अड़चन और बिना देरी” के लागू होनी चाहिए और जीएसटी सेवा केंद्रों को आवश्यक मानव संसाधन दिए जाएं।

गलत किया तो खैर नहीं, सही किया तो कोई बैर नहीं

वित्त मंत्री ने कर विभाग में जवाबदेही और अनुशासन की संस्कृति को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, अनुशासनात्मक कार्रवाई में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिसने गलती की, उसे सज़ा मिलेगी, और जिसने ईमानदारी से काम किया, उसे भय नहीं होना चाहिए।

उन्होंने विभाग का नया आदर्श वाक्य प्रस्तुत किया-

“गलत किया तो खैर नहीं, सही किया तो कोई बैर नहीं।”

ईमानदार करदाता का जीवन आसान बनाना ही लक्ष्य

अपने संबोधन के अंत में सीतारमण ने कहा, सुधार, टीमवर्क और प्रतिबद्धता के साथ हम जीएसटी सिस्टम को और अधिक कुशल, न्यायपूर्ण और विकासोन्मुख बना सकते हैं। याद रखें, हमारा अंतिम लक्ष्य है ईमानदार करदाता का जीवन आसान बनाना।

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