January 12, 2026

साइबर अपराध पर सुपर क्रैकडाउन: डिजिटल अरेस्ट स्कैम के हर केस की होगी CBI जांच!

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CBI को दी देशभर में फुल पावर

RBI–टेलीकॉम कंपनियों से भी जवाब तलब

सीनियर सिटिज़न्स को निशाना बनाने पर अदालत की कड़ी नाराज़गी

NEWS1UP

विशेष संवाददाता

नई दिल्ली। देशभर में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई करते हुए इसकी जांच CBI को सौंप दी है। अदालत ने साफ कहा है कि यह धोखाधड़ी अन्य साइबर अपराधों से अलग और कहीं ज्यादा गंभीर है, इसलिए इसकी जांच प्राथमिकता के आधार पर सिर्फ CBI ही करेगी।

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने केंद्र, राज्यों, RBI, टेलीकॉम विभाग और सभी IT इंटरमीडियरीज़ को त्वरित और पूर्ण सहयोग का आदेश दिया है। कोर्ट ने इस मामले को स्वत: संज्ञान में लेते हुए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

CBI को मिली विशेष शक्तियां: अब बैंकरों की भी होगी जांच

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि CBI को डिजिटल अरेस्ट स्कैम में खोले गए बैंक खातों की जांच करने के लिए भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PCA) के तहत बैंकरों की भूमिका की जांच की पूरी आज़ादी होगी। जहां-जहां साइबर अपराध में संदिग्ध बैंक अकाउंट मिले, वहां CBI बिना किसी रोक के कार्रवाई कर सकेगी।

यह पहली बार है जब कोर्ट ने किसी साइबर मामले में CBI को इतने व्यापक अधिकार दिए हैं।

AI/ML के इस्तेमाल पर RBI से जवाब तलब

अदालत ने RBI को पक्षकार बनाते हुए नोटिस जारी किया और पूछा कि- 

“देशभर में साइबर अपराध से जुड़े बैंक खातों की पहचान और उनकी कमाई को फ्रीज़ करने के लिए AI और मशीन लर्निंग को लागू करने में कितना समय लगेगा ?”

कोर्ट ने कहा कि RBI को तकनीकी समाधान देकर देश को इस तेजी से फैल रहे स्कैम से बचाने में तुरंत भूमिका निभानी होगी।

IT इंटरमीडियरीज़ और राज्यों को अनिवार्य सहयोग का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने IT इंटरमीडियरी रूल्स 2021 के तहत निर्देश दिया है कि सभी अथॉरिटीज़ CBI को पूरा सहयोग दें। जिन राज्यों ने CBI को सामान्य मंजूरी नहीं दी है, वे भी IT Act 2021 मामलों की जांच के लिए CBI को अनुमति प्रदान करें। ताकिCBI पूरे देश में एकीकृत और बड़े स्तर पर कार्रवाई कर सके

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आवश्यकता पड़ने पर CBI इंटरपोल से भी मदद ले सकती है।

टेलीकॉम कंपनियों पर भी सख्ती: एक ही नाम पर कई SIM का मुद्दा

कोर्ट ने टेलीकॉम डिपार्टमेंट से प्रस्ताव मांगा है कि एक ही नाम पर कई SIM जारी कैसे हो जाती हैं। और कहा कि सिम कार्ड के दुरुपयोग को रोकने के लिए सभी टेलीकॉम कंपनियों पर सख्त दिशानिर्देश लागू किए जाएं। 

यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि डिजिटल अरेस्ट स्कैम में धोखेबाज फर्जी SIM और VoIP नंबर का जमकर इस्तेमाल कर रहे हैं।

सभी राज्यों को दिशा-निर्देश: जल्दी बनाएं साइबर क्राइम सेंटर

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से कहा-

  • साइबर क्राइम सेंटर जल्द से जल्द स्थापित करें

  • अगर किसी प्रकार की बाधा हो, तो सीधे सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराएं

  • IT Act 2021 से जुड़े सभी FIR तुरंत CBI को सौंपें

इसके साथ ही FIR में बरामद सभी मोबाइल फोन का डेटा ठीक तरीके से स्टोर करने का निर्देश भी दिया गया।

सीनियर सिटिज़न्स पर सबसे ज्यादा हमला: कोर्ट ने जताई गहरी चिंता

CJI ने कहा कि जैसे ही अदालत ने इस मामले पर संज्ञान लिया, कई पीड़ित सामने आए, जिनमें अधिकतर सीनियर सिटिज़न्स थे। यह स्कैम उन्हें अलग-अलग तरीकों से मानसिक दबाव में डालकर लाखों रुपये ठग लेता है।

कोर्ट ने कहा कि-

“सीनियर सिटिज़न्स को निशाना बनाकर की गई हर धोखाधड़ी की जांच अत्यंत आवश्यक है। डिजिटल अरेस्ट स्कैम के मामले तत्काल CBI को सौंपे जाएं”

अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद

अदालत ने सभी पक्षों को दो सप्ताह के भीतर स्थिति रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह आदेश भारत में साइबर फ्रॉड के खिलाफ सबसे बड़ा और निर्णायक कदम माना जा रहा है।

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