योगी कैबिनेट के बड़े फैसले: परिवार में संपत्ति दान आसान, निवेश और शिक्षा को नई दिशा!
5,000 में पारिवारिक संपत्ति दान
अब कॉमर्शियल प्रॉपर्टी भी शामिल
फर्जी डिग्री पर सख्ती, निवेश और रोजगार को बढ़ावा
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भूमेश शर्मा
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक साथ कई दूरगामी और जनहितकारी निर्णय लेते हुए राज्य की आर्थिक, औद्योगिक और शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। बैठक में जहां पारिवारिक संपत्ति के दान पर स्टाम्प शुल्क में ऐतिहासिक राहत दी गई, वहीं प्रदेश को ग्लोबल सर्विस हब बनाने के लिए जीसीसी नीति-2024 की एसओपी को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही उच्च शिक्षा क्षेत्र में अनुशासन कायम करते हुए फर्जी डिग्री प्रकरण में लिप्त जेएस विश्वविद्यालय के परिसमापन का फैसला भी लिया गया।

परिवार के बीच दान विलेख पर ऐतिहासिक राहत
अब कॉमर्शियल और इंडस्ट्रियल संपत्तियों पर भी केवल 5,000 रुपए स्टाम्प शुल्क
योगी कैबिनेट ने पारिवारिक सदस्यों के मध्य निष्पादित अचल संपत्ति के दान विलेख पर दी जा रही स्टाम्प शुल्क छूट के दायरे को और विस्तृत कर दिया है। अब यह राहत कृषि और आवासीय संपत्तियों के साथ-साथ व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों पर भी लागू होगी।
भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के तहत अब तक दान विलेख पर संपत्ति के मूल्य के अनुसार स्टाम्प शुल्क देय था, जबकि 3 अगस्त 2023 की अधिसूचना के जरिए पारिवारिक दान पर इसे अधिकतम 5,000 रुपए तक सीमित किया गया था। हालांकि, यह छूट केवल कृषि और आवासीय संपत्तियों तक सीमित थी।अब कैबिनेट की मंजूरी के बाद शहर और गांव, हर जगह कॉमर्शियल व इंडस्ट्रियल प्रॉपर्टी के दान पर भी केवल 5,000 रुपए स्टाम्प शुल्क लगेगा।
प्रदेश के स्टाम्प एवं पंजीयन मंत्री रवींद्र जायसवाल ने बताया कि पहले शहरों में 7 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 5 प्रतिशत स्टाम्प शुल्क देना पड़ता था, लेकिन अब पारिवारिक दान की स्थिति में पूरे प्रदेश में एक समान शुल्क लागू होगा। इससे पारिवारिक संपत्ति हस्तांतरण सरल होगा और विवादों में भी कमी आएगी।
जीसीसी नीति-2024 की एसओपी-2025 को मंजूरी
इन्वेस्ट यूपी बनी नोडल एजेंसी, निवेश और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार
कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश वैश्विक क्षमता केंद्र (GCC) नीति-2024 के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु नियमावली-2025 (SOP) को मंजूरी दी गई। इसके तहत इन्वेस्ट यूपी को नोडल एजेंसी नामित किया गया है। यह नियमावली नीति के प्रख्यापन की तिथि से प्रभावी मानी जाएगी।
औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 21 कंपनियां जीसीसी के तहत निवेश शुरू कर चुकी हैं। जीसीसी इकाइयां आईटी, आरएंडडी, फाइनेंस, एनालिटिक्स, डिजाइन, इंजीनियरिंग, मानव संसाधन और नॉलेज सर्विसेज जैसे उच्च स्तरीय कार्यों को अंजाम देंगी।
वित्तीय प्रोत्साहनों की लंबी सूची
एसओपी के तहत जीसीसी इकाइयों को फ्रंट एंड लैंड सब्सिडी, स्टाम्प ड्यूटी में छूट/प्रतिपूर्ति, पूंजीगत व ब्याज सब्सिडी, ओपेक्स, पेरोल व भर्ती सब्सिडी, ईपीएफ प्रतिपूर्ति तथा स्किल डेवलपमेंट व आरएंडडी प्रोत्साहन जैसे व्यापक लाभ दिए जाएंगे।
सरकार का मानना है कि इससे उत्तर प्रदेश ग्लोबल सर्विस हब के रूप में स्थापित होगा और युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर उच्च कौशल आधारित रोजगार सृजित होंगे।

फर्जी डिग्रियों पर योगी सरकार की सख्ती
जेएस विश्वविद्यालय का परिसमापन, आईआईएमटी विश्वविद्यालय के ऑफ-कैंपस को हरी झंडी
उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े दो अहम फैसलों में योगी कैबिनेट ने जेएस विश्वविद्यालय, शिकोहाबाद (फिरोजाबाद) के परिसमापन को मंजूरी दे दी। जांच में सामने आया कि विश्वविद्यालय ने बीपीएड पाठ्यक्रम में फर्जी और बैक डेट में डिग्रियां व मार्कशीट जारी कीं, जिनका उपयोग राजस्थान शिक्षक भर्ती परीक्षा-2022 में किया गया।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि इस मामले में राजस्थान पुलिस की जांच, कुलाधिपति-कुलसचिव की गिरफ्तारी और शासन स्तर की जांच रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताएं प्रमाणित हुईं। परिसमापन के बाद विश्वविद्यालय के सभी अभिलेख डॉ. भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, आगरा के संरक्षण में रहेंगे और वहीं से डिग्रियों का सत्यापन किया जाएगा।
इसके साथ ही कैबिनेट ने आईआईएमटी विश्वविद्यालय, मेरठ के ग्रेटर नोएडा ऑफ-कैंपस को संचालन प्राधिकार पत्र (एलओपी) जारी करने को भी मंजूरी दी। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर क्षेत्र में उच्च शिक्षा के नए अवसर सृजित होंगे।
एक साथ तीन बड़े संदेश
योगी कैबिनेट के इन फैसलों से स्पष्ट है कि सरकार एक ओर पारिवारिक और नागरिक सुविधाओं को सरल बना रही है, दूसरी ओर निवेश, रोजगार और शिक्षा में गुणवत्ता व पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए निर्णायक कदम उठा रही है। यह बैठक उत्तर प्रदेश को आर्थिक रूप से सशक्त, निवेश के लिए आकर्षक और शिक्षा में अनुशासित राज्य बनाने की दिशा में मील का पत्थर मानी जा रही है।
