93वें एयरफोर्स डे पर भारतीय वायुसेना ने दिखाया दम, परेड में झलकी देश की रक्षा शक्ति
93 साल की उड़ान: भारतीय वायुसेना ने दिखाया शौर्य, सेवा और समर्पण का आकाश
हर मिशन में ‘स्वयं से पहले सेवा’ हमारी पहचान: ए. पी. सिंह
NEWS1UP
भूमेश शर्मा
गाजियाबाद। भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) ने आज अपना 93वां स्थापना दिवस भव्यता और गर्व के साथ मनाया। इस अवसर पर हिंडन एयरबेस पर शानदार परेड का आयोजन किया गया, जिसमें वायुसैनिकों की अनुशासन और शौर्यपूर्ण झलक देखने को मिली।
एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने परेड की सलामी ली और वायुसेना के गौरवशाली इतिहास और भविष्य की दिशा पर अपने विचार साझा किए।

परेड में दिखी आधुनिक वायुसेना की शक्ति
स्थापना दिवस के मौके पर वायुसेना ने अपने अत्याधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम एस-400, राफेल, सुखोई-30MKI, और सी-295 ग्लोबमास्टर ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट जैसे उन्नत विमानों का प्रदर्शन किया। इन विमानों ने भारत की आसमान में सुरक्षा क्षमता और युद्धक तैयारी का शानदार प्रदर्शन किया।
गौरवशाली सफर: 1947 से आज तक
अपने संबोधन में एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह ने कहा कि वायुसेना ने अपने 93 वर्षों के इतिहास में कई गौरवशाली अध्याय लिखे हैं।
उन्होंने याद दिलाया कि –
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1947 में वायुसेना ने कश्मीर की रक्षा में अहम भूमिका निभाई,
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1965 के युद्ध में भारत के आसमान की रक्षा की,
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1971 के युद्ध में बांग्लादेश के गठन में निर्णायक सहयोग दिया,
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बालाकोट एयरस्ट्राइक में आतंक के ठिकानों को ध्वस्त किया,
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और हाल ही में ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान मात्र चार घंटे में शत्रुओं पर विजय हासिल की।
राहत और मानवता के मिशनों में भी आगे
एयर चीफ ने बताया कि वायुसेना न केवल युद्ध के समय, बल्कि आपदाओं और संकटों में भी देशवासियों की रक्षा करती रही है।
उन्होंने कहा कि “ऑपरेशन सिन्दूर के दौरान भारतीय वायुसेना ने संघर्षग्रस्त क्षेत्रों से भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने में सफलता पाई। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय संकटों में भी राहत सामग्री और कर्मियों को पहुंचाकर मानवता की मिसाल कायम की।”
इस बार आयोजन दो चरणों में
इस वर्ष पहली बार वायुसेना दिवस का आयोजन दो चरणों में किया जा रहा है।
पहले चरण में हिंडन एयरबेस पर परेड और औपचारिक समारोह आयोजित हुआ, जबकि 9 नवंबर को गुवाहाटी में फाइटर जेट्स और हेलिकॉप्टरों का एरियल डिस्प्ले होगा। यह कदम वायुसेना की देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंच और जनसंपर्क को और मजबूत करेगा।
सेवा पर समर्पण का प्रतीक
समारोह के अंत में एयर चीफ मार्शल ने कहा कि भारतीय वायुसेना का आदर्श वाक्य:
“सेवा परमो धर्मः” (स्वयं से पहले सेवा)
सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि हर वायुसैनिक की जीवनशैली है। उन्होंने कहा,
“भारतीय वायुसेना ने अक्सर कठिन परिस्थितियों में भी करुणा, गति और विश्वसनीयता के साथ कार्य किया है। यही हमारे गौरव और अस्तित्व की असली पहचान है।”
