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जब खुद फंस जाओ तो दूसरे पर इल्जाम लगाओ… कफ सिरप मामले में योगी पर अखिलेश का शायरी से पलटवार!

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NEWS1UP

भूमेश शर्मा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सियासी बयानबाज़ी चरम पर है, लेकिन इस बार शब्दों के साथ शायरी भी सियासत का हथियार बन गई है। कफ सिरप तस्करी मामले को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव आमने–सामने हैं। खास बात यह रही कि दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर तंज कसने के लिए शायरी का सहारा लिया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में कफ सिरप तस्करी से जुड़े माफिया के खिलाफ कार्रवाई का ज़िक्र करते हुए समाजवादी पार्टी और उसके नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सपा का इतिहास माफियाओं से रिश्तों से भरा रहा है। इसी दौरान योगी आदित्यनाथ ने शायरी पढ़ते हुए अखिलेश यादव पर निशाना साधा-

“यही कसूर मैं बार-बार करता रहा, और आईना साफ करता रहा।”

इस शेर के जरिए मुख्यमंत्री ने इशारों-इशारों में यह संदेश देने की कोशिश की कि सच्चाई सामने लाने पर विपक्ष को तकलीफ़ हो रही है।

योगी के इस हमले पर अखिलेश यादव ने भी देर नहीं की और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शायरी के जरिए ही पलटवार किया। 

अखिलेश यादव ने लिखा-

“जब खुद फंस जाओ तो दूसरे पर इल्जाम लगाओ।
ये खेल हुआ पुराना, हुक्मरान कोई नई बात बताओ।”

अखिलेश यादव की इस शायरी को सीधे तौर पर मुख्यमंत्री पर जवाबी हमला माना जा रहा है। सपा मुखिया का कहना है कि सरकार अपनी नाकामियों से ध्यान हटाने के लिए विपक्ष पर आरोप मढ़ रही है।

दरअसल, उत्तर प्रदेश में कफ सिरप की अवैध तस्करी करने वाले माफिया के खिलाफ हालिया कार्रवाई के बाद मामला और गरमा गया। इस माफिया की कुछ तस्वीरें अखिलेश यादव के साथ सामने आने के बाद भाजपा ने इसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इन्हीं तस्वीरों के आधार पर सपा पर माफिया संरक्षण का आरोप लगाया और कहा कि समाजवादी पार्टी का हर दौर अपराधियों और माफियाओं के साथ खड़ा दिखाई देता है।

वहीं समाजवादी पार्टी इस आरोप को पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बता रही है। पार्टी नेताओं का कहना है कि तस्वीरों के आधार पर आरोप लगाना जनता को गुमराह करने की कोशिश है।

कुल मिलाकर, कफ सिरप तस्करी का मामला अब सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शायरी के ज़रिए चल रही इस जुबानी जंग ने उत्तर प्रदेश की सियासत को एक नया रंग दे दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह सियासी शेरो-शायरी चुनावी बहस को किस दिशा में ले जाती है।

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